मैला ढोने वाले लोग किस हाल में काम करते हैं, इसका वास्तविक दृश्य आपके ज़ेहन में बन ही नहीं सकता. उसके लिए आपको इन्हें क़रीब से देखना व महसूस करना होगा. इसीलिए इस काम में आज भी 97% दलित ही हैं. वहीं प्रोफ़ेसर, जज, अधिकारी 97% ब्राह्मण हैं. बस यही है इस मुल्क की हक़ीक़त. शर्मनाक.