@ukcmo@AU_DehradunNews समस्त पीसीएस मुख्य परीक्षा के अभ्यर्थियों का हमारे युवा मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र निवेदन है कि कृपया उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल / प्रवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा-2024' (PCS-2024-MAINS EXAM ) दिसम्बर अंतिम सप्ताह में आयोजित करने का कष्ट करें ।
@ukcmo@AU_DehradunNews समस्त पीसीएस मुख्य परीक्षा के अभ्यर्थियों का हमारे युवा मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र निवेदन है कि कृपया उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल / प्रवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा-2024' (PCS-2024-MAINS EXAM ) दिसम्बर अंतिम सप्ताह में आयोजित करने का कष्ट करें ।.
@ukcmo@AU_DehradunNews समस्त पीसीएस मुख्य परीक्षा के अभ्यर्थियों का हमारे युवा मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र निवेदन है कि कृपया उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल / प्रवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा-2024' (PCS-2024-MAINS EXAM ) दिसम्बर अंतिम सप्ताह में आयोजित करने का कष्ट करें ।..
प्रधानमंत्री जब अन्य पार्टियों के 'रेवड़ी कल्चर' की आलोचना करते हैं, जिसमें मुफ्त बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का वितरण शामिल है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बढ़ते हुए आरक्षण का यह सिलसिला भी उसी 'रेवड़ी कल्चर' का हिस्सा नहीं है?
उत्तराखंड में हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए 10% आरक्षण की घोषणा की गई है। यह भी इसी 'रेवड़ी कल्चर' का हिस्सा है, जिसमें लगातार आरक्षण का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इससे सरकारी नौकरियों में गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों के लिए अवसर कम होते जा रहे हैं।
100 सीटों का उदाहरण:
सरकारी नौकरियों के 100 पदों में से:
क्षैतिज आरक्षण (47%):
◦SC (अनुसूचित जाति): 19%
◦ST (अनुसूचित जनजाति): 4%
◦OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग): 14%
◦EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग): 10%
47 सीटें इन वर्गों के लिए आरक्षित हो जाती हैं।
ऊर्ध्वाधर आरक्षण (शेष 53 सीटों पर):
◦महिलाएं: 30% (लगभग 16 सीटें)
◦पूर्व सैनिक: 5% (लगभग 3 सीटें)
◦स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित: 2% (लगभग 1 सीट)
◦दिव्यांगजन: 4% (लगभग 2 सीटें)
◦खिलाड़ी: 5% (लगभग 3 सीटें)
◦अनाथ बच्चे: 5% (लगभग 3 सीटें)
◦राज्य आंदोलनकारी और उनके आश्रित: 10% (लगभग 5 सीटें)
इन श्रेणियों के लिए लगभग 33 सीटें आरक्षित हो जाती हैं।
इस तरह 100 में से लगभग 80 सीटें आरक्षित हो जाती हैं, और केवल 20 सीटें गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों के लिए बचती हैं।
इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि कई लोग आरक्षण के इस सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं। कुछ लोग फर्जी EWS और दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों में जगह बना लेते हैं।
जब तक वोट बैंक मजबूत होता है, तब तक राज्य और केंद्र सरकार को इन मुद्दों की परवाह नहीं होती।
गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों के लिए अब सरकारी नौकरियों में प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो गया है, और इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि यह भी एक प्रकार का 'रेवड़ी कल्चर' है, जो कुछ वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए लागू किया जा रहा है।
सरकार को एक संतुलित नीति बनानी चाहिए, ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके, बजाय इसके कि कुछ वर्गों को आरक्षण की 'रेवड़ी' बांटी जाए। @narendramodi@pushkardhami
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