आरक्षण हटाओ पार्टी बनी और 3 मिलियन लोग जुड़ गए,
बल्कि असलियत यह है आरक्षण नहीं होता तो देश के पिछड़े लोग कभी आगे नहीं आते। सीमित लोगों का वर्चस्व होता।
हां, आरक्षण में सुधार की जरूरत है वह यह है कि आबादी के अनुसार आरक्षण मिले।
आज शाम 7 बजे से 👇👇
#जितनी_जनसंख्या_उतना_आरक्षण
चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित कुलदेवी माँ कालका माताजी के पावन दरबार में दर्शन एवं पूजन कर प्रदेश और देश में अमन-चैन, सुख-शांति, समृद्धि तथा सभी के मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। माँ का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे।
😭😭😢
साधु संत ओर नेता किसी के नहीं होते हैं।
आज आंदोलन कुचलने के लिए आए थे 10 संत ओर 10 नेता।
जो 4 महिने से घर घर घूमकर आन्दोलन के लिए लोगों चावल बाटकर आन्दोलन किया उसको स्वार्थी लोगों आन्दोलन कुचलने का भरपूर प्रयास किया।
चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा कट ऑफ
कहीं न कहीं जब इतने प्रश्न उठ रहे हैं, तो उनका उत्तर देने वाला भी कोई होना चाहिए।
120 प्रश्नों की परीक्षा में सामान्यतः कोई भी अभ्यर्थी लगभग 10 प्रश्न तो छोड़ ही देता है। शेष 110 प्रश्नों में से 10–12 प्रश्न गलत हो जाते हैं। 1/3 नकारात्मक अंकन के कारण 12 गलत प्रश्नों पर लगभग 4 अंकों की अतिरिक्त कटौती हो जाती है। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 96 प्रश्न ही शुद्ध रूप से शेष बचते हैं।
यह आकलन उन प्रतिभाशाली छात्रों के संदर्भ में है, जो शीर्ष दस हजार अभ्यर्थियों में स्थान बना सकते हैं। किंतु यहाँ भर्ती प्रक्रिया में लगभग दोगुनी संख्या में, अर्थात कम से कम एक लाख अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। ऐसे में जब चयनित अभ्यर्थियों की मेरिट लगभग 87 प्रश्नों के आसपास बताई जा रही है, तो यह उच्च कट-ऑफ स्वाभाविक रूप से गंभीर संशय को जन्म देती है।
पूर्व में, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, तब डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जैसे सजग और सक्रिय विपक्षी नेता प्रत्येक भर्ती प्रक्रिया की गहराई तक जाकर ठोस प्रमाणों के साथ संदेहों को उजागर करते थे और उन्हें जनहित का मुद्दा बनाते थे। उस समय सरकार भी दबाव में आकर जांच कराती थी, जिससे कई परतें खुलकर सामने आती थीं। आज का विपक्ष इतना कमजोर प्रतीत होता है कि उसने जनता को लगभग ईश्वर भरोसे छोड़ दिया है।
यदि छात्रों के बीच इतना गहरा असंतोष और संदेह व्याप्त है, तो संबंधित संस्था और सरकार का दायित्व बनता है कि वह पूर्ण पारदर्शिता के साथ अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखे।
यदि किसी के पास संदिग्ध चयन या अनियमितताओं से जुड़ी कोई ठोस जानकारी है, तो उसे अवश्य ही SOG तक पहुँचाया जाना चाहिए और इस विषय को मुखरता के साथ उठाया जाना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्र नेताओं, अनेक परीक्षार्थियों और संबंधित विषय के जानकारों के बीच इस उच्च कट-ऑफ को लेकर लगातार विभिन्न स्तरों पर चर्चाएँ चल रही हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना आवश्यक है।
"अब टूटेगा हर भ्रम, एक साथ खड़े हैं हम
भ्रम फैलाने वाले अब क्या कहेंगे? बिश्नोई समाज के दिग्गज भी हेमाराम जी के साथ! धोरीमन्ना में दिखेगी '36 कौम' की असली ताकत! 🤝🔥
जो लोग पिछले कुछ दिनों से धोरीमन्ना-गुड़ामालानी के सीमांकन विवाद को 'एक समाज विशेष' के खिलाफ बताने की साजिश रच रहे थे, आज उन्हें अपनी आंखों से हकीकत देख लेनी चाहिए
बाड़मेर के स्वाभिमान की इस लड़ाई में अब बिश्नोई समाज का शीर्ष नेतृत्व भी खुलकर मैदान में आ गया है। कल 14 जनवरी धोरीमन्ना की ऐतिहासिक रैली में :
🔹 श्री सुखराम बिश्नोई (पूर्व मंत्री और सांचौर विधायक) - जिनका अनुभव और समाज में पकड़ यह बताने के लिए काफी है कि बिश्नोई समाज अन्याय के खिलाफ हमेशा खड़ा रहता है।
🔹 श्री अभिमन्यु पूनिया (विधायक, संगरिया और युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष) - जो युवाओं में करंट और जोश का दूसरा नाम हैं।
इन दोनों दिग्गजों का आना कई मायनों में ऐतिहासिक है:
अफवाहों का अंत: यह साफ हो गया है कि यह आंदोलन किसी मंत्री या समाज के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के गलत फैसले के खिलाफ है
किसान एकता: सुखराम जी और अभिमन्यु जी का आना यह संदेश है कि जब बात किसान और गांव के अस्तित्व की हो, तो हम सब एक हैं
सरकार को चेतावनी: जब एक मंच पर हेमाराम चौधरी, सचिन पायलट, सुखराम बिश्नोई, अभिमन्यु पूनिया गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली और हरीश चौधरी होंगे, तो जयपुर की दीवारें हिलनी तय हैं
बिश्नोई समाज के युवाओं से विशेष अपील:
कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए आपको गुमराह कर रहे थे लेकिन अब जब आपके समाज के चुने हुए जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता खुद इस मंच पर आ रहे हैं, तो आपको भी समझ जाना चाहिए कि सच्चाई किस तरफ है
यह लड़ाई गुड़ामालानी और धोरीमन्ना के भविष्य की है। अगर आज हम बंट गए, तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी
आओ, कल धोरीमन्ना चलकर भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश करें कि सरकार मजबूर हो जाए!
📍 स्थान: धोरीमन्ना धरना स्थल
📅 तारीख: 14 जनवरी
⏰ समय: सुबह 11 बजे
"जात-पात की बात नहीं, अब सिर्फ बाड़मेर की बात होगी!"
@AbhimanyuP00NIA@MlaSanchore
@Tilok_Daukiya कल तक तो @ManzuDinesh मेवाराम का गुण गाते थकते नहीं थे आज के,के,विश्नोई का गुण गा रहे
बोल रहा है में कांग्रेसी हु
कही फूट डालनी हो तो इनसे शेख़
“दिनांक परिवर्तन सूचना”
आप सभी को सूचित किया जाता है कि जन आक्रोश रैली कार्यक्रम की तिथि में परिवर्तन किया गया है।
यह रैली 13 जनवरी की जगह अब 14 जनवरी, बुधवार को आयोजित की जाएगी।
सरकार द्वारा जनभावना के विरुद्ध बाड़मेर तथा बालोतरा जिलों में किए गए पुनर्सीमांकन के विरोध में धोरीमन्ना मुख्यालय पर पिछले सात दिनों से हम सभी के आदरणीय हेमाराम चौधरी जी व क्षेत्र के नागरिक तानाशाही फैसले के विरुद्ध धरने पर बैठे हैं।
इस आवाज को और मजबूती प्रदान करने के लिए आगामी 13 जनवरी को धोरीमन्ना मुख्यालय पर विशाल “जन आक्रोश रैली” का आयोजन किया जा रहा है।
मेरा आप तमाम से आव्हान है कि अधिक से अधिक संख्या में जन आक्रोश रैली में शामिल होकर इस जन आंदोलन को मजबूती प्रदान करें।