असम के धुबरी जिले में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने अडानी पावर के 3,200 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी.
https://t.co/P9NkXFhrMB
1/2
@ANI Just tell me if this is not staged ..
Making him wear the same cloth he was wearing that night .
This totally shows the police has encountered some innocent person with no relation to this case .
Bihar is doomed under corruption and political pressures
@A1DNP किर्पया अफवाहों से बचें
लड़का लड़की और आरोपी सभी हिन्दू हैं
अगर गलती से लड़का मुस्लिम होता तो
आज करोड़ो लोग आरोपियों के साथ खड़े होते
और बोलते लड़की के साथ सही हुवा है,
आरोपियों को छुड़ाने के लिए एक खास धार्मिक संगठन और एक पार्टी के समर्थक प्रदर्शन करते !
The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
भारत में कैंसर, हृदय , गुर्दा रोग महामारी की तरह फ़ैल रहा है, Erectile dysfunction (ED) बहुत तेजी से बढ़ रहा है...इसके कई कारणों में से एक मुख्य कारण Food Adulteration हैं पर इसके लिए capital punishment नहीं है, गिरफ्तारी भी नहीं होती.कभी भी किसी बड़े रेस्टोरेंट पर न छापा पड़ता है और न कार्रवाई होती है क्यों ??? यह तो जंगलराज से भी गंभीर अपराध है , इसके अपराधियों का सामाजिक , आर्थिक एनकाउंटर क्यों नहीं ????
डिप्टी CM रहते हुए सम्राट चौधरी ने कहा था 👇
"बिहार में रात के 12 बजे भी कोई व्यक्ति खाना खाकर अपने गांव देख आए और यदि किसी ने उसे छू भी दिया तो सम्राट चौधरी सुबह अपना इस्तीफा दे देगा।"
लेकिन अब जमुई की घटना के समय तो वो CM हैं... शायद इस्तीफा तो दे दिया होगा?
बस जनता को बताया नहीं जा रहा है कि नहीं तो वो अपने लोकप्रिय CM के लिए छाती पीटने लगेगी...
सीओ जियाउल हक हत्याकांड में CBI कोर्ट ने खारिज की कार्रवाई! 5 लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी!
"हमें लंबे समय से न्याय की उम्मीद थी, जो अब टूट गई है। गरीबी में बेटे को पढ़ा लिखाकर पुलिस अफसर बनाया था। कुंडा में खुलेआम उसकी हत्या कर दी गई। हमने अपना बेटा खो दिया, लेकिन उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा। कोर्ट के आदेश से बहुत दुख हुआ है।"
प्रतापगढ़ के सीओ रहे जियाउल हक के पिता हाजी शमसुल हक ने कहा। सीओ के हत्याकांड से जुड़े मामले में लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट बीती 19 सितंबर को स्वीकार कर ली गई। इसके बाद विधायक समेत 5 लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।