कन्नौज में एक ब्राह्मण का लड़का भाजपा का बूथ एजेंट था, सपा वाले बूथ लूट रहे थे, उसने विरोध किया तो अखिलेश जी ने कहा हमें वो ज़िंदा या मुर्दा चाहिए,
उस ब्राह्मण के लड़के को दूसरे दिन उसका गर्दन काट के पता नहीं कहा फेंक दिए आज तक नहीं मिला,
- ओपी राजभर
सचिन पायलट ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में इंटरव्यू प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा—
"हाल ही में साहू जी ने भी बयान दिया कि उन पर इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के अंक ऊपर-नीचे करने के लिए सुझाव और दबाव डाले जाते थे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें किसका फोन आया और किसने उनसे आग्रह किया।
लेकिन ऐसी परिस्थितियां इसलिए पैदा होती हैं क्योंकि इंटरव्यू प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश रहती है। जहां मानवीय हस्तक्षेप होगा, वहां गड़बड़ी और पक्षपात की संभावना भी बनी रहती है।"
Shiv Sena (UBT) leader Sanjay Raut said Shiv Sena (UBT) MPs whose name are going round to join Shinde, has promised they would not leave Thackeray, even one MP swore by his mother name, another by Sai Baba, third by his daughter name & 4th swore by his father so whom to trust ?
BIG: So @rautsanjay61 goes public with a sensational charge that was only until now being whispered in Maharashtra power corridors. One of the Sena (UBT) MPs Om Raje Nimbalkar he claims was told that if he wants a favourable verdict in his father’s murder case in special CBI court, he has to switch sides. The verdict was to come yesterday and has been pushed now to 19th. If true, it raises a very troubling Qs: are court verdicts also now decided by party loyalties?
पहले AAP, फिर TMC और अब खबर है कि उद्धव ठाकरे के शिवसेना के सांसद शिंदे से जुड़ेंगे.. कल यह सांसद ओम बिरला से मिल सकते हैं.. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस देश में चुनाव ही क्यों करवाया जा रहा है? पत्रकार इसे ऑपरेशन ऑपरेशन कहकर जस्टिफाई कर रहे हैं, लेकिन सही मायने में यह आपके वोटों की चोरी है.. सरकार को अब फर्क नहीं पड़ता आप बेरोज़गारी या महंगाई पर नाराज़ हो सकते हैं, सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं, लेकिन अब आपके सांसदों को ही खरीदा जाएगा! क्या आपको अब भी लगता है कि भारत में लोकतंत्र मौजूद है? अब ना ही इन्हें EVM हैक करना है, ना ही SIR करना है.. सबकुछ पैसों और डर के दम पर चल रहा है..
@ABPNews@abplive ये व्यक्ति ख़ुद को @ABPNews का पत्रकार बताता है अपने बायो में, किंतु इसकी भाषा से मुझे इस बात पे संदेह उत्पन्न हो रहा है। कृप्या पुष्टि और कारवाई करे इस व्यक्ति पे।
हाल -ए कांग्रेस ! जिलाध्यक्ष ने अपने ही PCC चीफ़ के ख़िलाफ़ रच डाला था षड़यंत्र
पिछले दिनों एक राज्य के PCC चीफ़ के ख़िलाफ़ ही 4-5 जिलाध्यक्षों ने रच दिया था षड्यंत्र…. दरअसल एक राज्य में संगठन सर्जन अभियान के तहत प्रशिक्षण शिविर चल रहा था… इस दौरान पूर्व PCC चीफ़ के के ही गुट से आने वाले एक जिलाध्यक्ष ने प्लानिंग के तहत किया षडयंत्र।
इन जिलाध्यक्ष जी ने तीन चार जिलाध्यक्षों को बरगलाया अपने ही PCC चीफ़ के ख़िलाफ़ और रच डाली साज़िश… प्लानिंग के तहत ज़िलाध्यक्षो ने तय किया कि सभी जिलाध्यक्ष PCC चीफ़ के ख़िलाफ़ अलग अलग शिकायतें आलाकमान के सामने रखेंगे और कहेंगे कि जिलाध्यक्षों की कोई सुनवाई नहीं हो रही और न ही हमें संगठन में तव्वजो मिल रही है, एक ने तो यहाँ तक कहा कि इस तरह हम काम नहीं कर पाएंगे… बंद कमरे में यह सब मीटिंग हुई पूरा प्लान बना लेकिन कुछ सच्चे कांग्रेसी जिलाध्यक्षों ने इस बात पर सहमति नहीं जतायी और यह बात अपने वरिष्ठ नेता को कह दी…
ख़ैर इसके बाद भी बहुत कुछ हुआ लेकिन समझने वाली बात ये है कि जिस प्रदेश के संगठन का ज़िक्र पूरे देश में हो रहा हो और कामकाज की दृष्टि से देश में पहले नंबर पर हो उस संगठन के ख़िलाफ़ जिलाध्यक्षों को भड़काने वाले और पर्दे के पीछे रहकर साजिश करने वालों से कांग्रेस के आम कार्यकर्ता को सचेत रहना होगा।
#rajasthan #congress
मेरे पिता, स्व. श्री राजेश पायलट जी की 26वीं पुण्यतिथि पर मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
देशसेवा उनके जीवन का उद्देश्य और संकल्प था, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत और मेहनत के साथ निभाया।
गांव, गरीब, किसान एवं युवा वर्ग के कल्याण के प्रति उनकी प्रगतिशील सोच और संघर्ष सदैव मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।
#राजेश_पायलट_अमर_रहे
राजेश पायलट: मिट्टी से उठकर राजनीति के आकाश में चमका एक नक्षत्र
राजेश पायलट।
कल्पना कीजिए, सफ़ेद बालों, उसी दृढ़ चेहरे और किसान-जवान के प्रश्नों पर गरजती हुई आवाज़ के साथ वे आज की राजनीति को किस निगाह से देख रहे होते! उस राजनीति को, जिसमें साधनहीन प्रतिभाओं के लिए दरवाज़े संकरे और धन, वंश तथा चाटुकारिता के लिए राजमार्ग चौड़े होते जा रहे हैं।
राजेश पायलट का मूल नाम राजेश्वर प्रसाद था। अत्यंत साधारण और अभावग्रस्त पशुपालक परिवार में पले इस मेधावी युवक ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज तक अपनी राह बनाई। वह कॉलेज, जहाँ से निर्मल वर्मा, सुचेता कृपलानी, गोपालकृष्ण गांधी, राजमोहन गांधी, गोपीचंद नारंग, अमिताव घोष और रामचंद्र गुहा जैसी विलक्षण प्रतिभाएँ निकलीं। राजेश्वर प्रसाद का वहाँ पहुँचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था; वह उस ग्रामीण भारत की विजय थी, जिसके बच्चों के पाँव में धूल अधिक और अवसर बहुत कम होते हैं।
उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट की प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त की, लेकिन आकाश में उड़ते हुए भी उनकी दृष्टि नीचे खेतों पर टिकी रही। किसानों की बदहाली ने उनके भीतर यह प्रश्न जगाया कि इस जीवन में ही इन परिस्थितियों को बदलने का रास्ता क्या है। उन्हें उत्तर राजनीति में दिखाई दिया। उन्होंने सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी छोड़कर उस अनिश्चित संसार में प्रवेश किया, जहाँ प्रतिभा से अधिक खेमे, षड्यंत्र और विरासतें काम करती हैं।
वे बागपत से चौधरी चरणसिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। निराशा के उसी क्षण संजय गांधी ने उन्हें भरतपुर से चुनाव लड़ने भेजा। भरतपुर उनके लिए अपरिचित था। जयपुर में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया; उनके नामांकन में त्रुटियाँ छोड़कर रास्ता रोकने तक के प्रयास हुए। लेकिन आम कार्यकर्ताओं और जनता ने उस अनजान युवक में अपना भविष्य देखा। राजेश्वर प्रसाद, राजेश पायलट बनकर उभरे और राजस्थान की राजनीति में एक नई धारा प्रवाहित हुई।
भरतपुर से शुरू हुई उनकी यात्रा दौसा पहुँची। वे 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार लोकसभा पहुँचे। तूफ़ानों से लड़ते, गिरते और फिर उठते हुए उन्होंने स्वयं को मिट्टी से सोना निकालने और इस्पात मोड़ने वाली शख़्सियत सिद्ध किया। उनमें किसान की सरलता, सैनिक का अनुशासन और लोकतांत्रिक नेता का साहस था।
राजेश पायलट को किसान और जवान से गहरा प्रेम था। वे उस संस्कृति से निकले थे, जिसमें गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, परिवार की सदस्य होती है; जिसमें गोधूलि कोई काव्यात्मक शब्द नहीं, श्रम, पशुधन और ग्रामीण जीवन की साँस होती है। इसीलिए उनकी राजनीति में खेत की गंध और साधारण मनुष्य की पीड़ा थी।
11 जून 2000 को एक सड़क दुर्घटना ने उस यात्रा को अचानक रोक दिया। वे अपनी राजनीति को उसके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने से पहले चले गए। राजस्थान की लोकतांत्रिक राजनीति को मिले श्रेष्ठ नेताओं में राजेश पायलट का स्थान सदैव विशिष्ट रहेगा।
केदारनाथ अग्रवाल की पंक्तियों के साथ उस दमकते नक्षत्र को असीम प्रणाम :
“हम जिएँ न जिएँ दोस्त, तुम जियो
एक नौजवान की तरह,
खेत में झूम रहे धान की तरह,
मौत को मार रहे बाण की तरह।”
#RajeshPilot #SachinPilot
I fondly remember and pay tributes to my father, Late Shri Rajesh Pilot ji, on his death anniversary.
A life well lived as an air force officer and then as a politician — dedicated to the nation and committed to public service.
His radiant smile and values continue to remind me of the path of service he believed in.
🙏
#राजेश_पायलट_अमर_रहे
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मेरे पिता स्व. राजेश पायलट जी की मूर्ति का अनावरण किया।
उन्होंने अपना पूरा जीवन देश सेवा और जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
इस अवसर पर मैं उन्हें अपनी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
📍सकरघटा, जिला करौली