तुमको जहां होना था, तुम वहां हो या न हो, मगर तुम्हारी जहां जरूरत होगी, नियति तुमको पहुंचा देगी। नियति लेख दूसरे सिरे से लिखती है, हम दूसरे सिरे से पढ़ते ��हते हैं।
जिस दिन आपने ठान लिया और मान लिया कि मैं कुछ भी कर सकता हूं, मेरे लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है, उस दिन से आपके जीवन में परिवर्तन आने शुरू हो जायेंगे, आपको तब तक कोई नहीं हरा सकता, जब तक कि आप 'खुद' से हार न जाओ।