जिसे आना है वो शिक्षा को बचाने के लिए आए
स्टूडेंट जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर _
"आज़म खान साहब से राजनीति लड़ाई किसी की
हो सकती है, व्यक्तगत अगर किसी की लड़ाई है
तो कृपया करके वो यहां न आए _
जिसे आना है वो एजुकेशन शिक्षा को
बचाने के आए आए, इतिहास उन्हीं का लिखा
जाता है जो सच का साथ देता है, अगर तुम
आवाज़ भी नहीं उठाना चाहते तो चुपचाप आकर
बैठ जाओ और बोलदो भाई हम साथ हैं
कुछ तो ऐसा करो कि आने वाली पीढ़ी याद रखे
तुम शिक्षा के लिए आवाज़ उठाई थी।"
यूनिवर्सिटी bachane के लिए dharne पर बैठे छात्रों की आवाज़।
Huge Congratulations to the CJP movement for bringing the govt to the table.
But history also remembers what movements choose to speak for.
Pls add this to your demands -
An immediate halt to the demolition of #JauharUniversity.
If we defend the right to education,we must defend educational institutions too. More importantly when they are educating country’s most marginalized minorities.
Stand for every student.
Stand for every university.
Education without exceptions.
मैं पहले दिन से इस बात पर कायम हूं कि CJP को BJP ने ही बनाया है.
पहले दिन से प्लान था कि विपक्ष को डिस्क्रेडिट करके, अपने हिसाब का विपक्ष तैयार कर दिया जाए.
एयरपोर्ट पर परमिशन देना हो, या जंतर-मंतर पर धरना चलते देना हो. सब कुछ प्लान के हिसाब से था.
मैं ये गारंटी के साथ कह सकता हूं- 20 तारीख से पहले मोदी सरकार चाह देती तो 1 घंटे धरना ना चल पाता, लेकिन सरकार ने स्क्रिप्ट के हिसाब से चलने दिया.
वांगचुक जिन्हें खुद अमित शाह ने जेल से निकाला था, उनका भूख हड़ताल करना, और अचानक से एक सुबह उन्हें उठा लेना. सब कुछ स्क्रिप्ट के हिसाब से था.
बस 20 तारीख को जो हुआ, वो ना BJP को पता था, ना ही CJP को अंदाजा. बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच गए.
यहां से सब कुछ स्क्रिप्ट के बाहर चला गया. इसलीए CJP की पूरी टीम ही मौके से गायब हो गई. किसी को एक लाठी नहीं पड़ी.
देश भर से आए बच्चों ने सब कुछ झेला, और उसके बाद ये मामला बहुत बड़ा हो गया. जो अब BJP और CJP के कंट्रोल से बाहर था.
स्क्रिप्ट का अंत करीब-करीब ऐसा ही था, जिसमें सरकार संवेदनशील लगे और विपक्ष के नाम पर कुछ लोग खड़े कर दिए जाएं, जो सरकार के हिसाब से हों.
क्योंकि विपक्ष पिछले 3 साल में बहुत ज्यादा मजबूत हो गया था. खासकर युवाओं के बीच में अपनी पहुंच मजबूत की थी. इसी बात को तोड़ने के लिए CJP का नाटक किया गया.
जब 20 तारीख के बाद मामला स्क्रिप्ट के बाहर गया तो पहले कुछ वक्त इंतजार हुआ. फिर वांगचुक को खुद सरकार ने सूप पिलाकर मामला खत्म किया.
और आखिर में धमेंद्र का इस्तीफा हो गया.
इस्तीफे के बाद जिस तरह से सरकार के मंत्री बता रहे हैं कि धरना तत्काल खत्म किया जाए, वो बताता है कि इसे कौन चला रहा था.
आप खुद सोचिए, ये जितने सेलिब्रेटी हैं, ये अचानक से कैसे बोलने लगे. एक जैसी टीशर्ट पहनकर, कॉओर्डिनेटेड तरीक से. जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है, वो देश की चिंता क्यों करने लगे, वो भी अचानक.
अब लोगों के बीच ये भ्रम पैदा हो गया कि CJP की सरकार सुन रही है, विपक्ष वही है. सरकार यही भ्रम लोगों में बनाए रखना चाहती है. और स्क्रिप्ट के हिसाब से ये बात लोगों में चली गई.
सरकार को अपने हिसाब का विपक्ष मिल गया, जिसे वो अपने हिसाब से चला सकती है. जो भी इस भ्रम जाल में फंस रहा है, वो अपना और देश का नुकसान कर रहा है.
इस पूरे आंदोलन में लेफ्ट के जितने भी छात्र संगठन, कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन और बाकी विपक्ष के छात्र संगठन शामिल हैं, उनकी मंशा साफ थी. वो असल में विपक्ष का काम कर रहे थे.
इस आंदोलन में जितने भी युवा थे, जो देश के अलग-अलग कोनों से जुड़े, सबकी मंशा साफ थी.
बस CJP का मामला अलग है, जिसपर बहुत संदेह है. इसे लेकर सावधान रहना ठीक.
’शिक्षा की रक्षा’ आंदोलन भी जीतेगा!
रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं की हौसलाअफ़जाई के लिए हमारे सांसद व विधायक शामिल हैं। जब यूपी सरकार के शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार अन्य निर्माणों का नियमतीकरण कर सकती है तो जौहर यूनिवर्सिटी का क्यों नहीं, जौहर यूनिवर्सिटी के साथ भेदभाव-दुराव क्यों? हम सबकी माँग है कि भाजपा अपने प्रतिशोध की आग में नौजवानों का भविष्य न झोंके।
गुजरात में जहीरुद्दीन शेख की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है।
मृतक के बेटे की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि पोस्टमार्टम में पसलियों का टूटना सीपीआर (CPR) देने के कारण हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत में मौत और चोटों के मामले में प्रथम दृष्टया संदेह होने पर निष्पक्ष जांच के लिए एफआईआर दर्ज करना आवश्यक है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया जाएगा और मामले की जांच 'असामान्य मौत' के रूप में की जाएगी।
अदालत ने एसआईटी को तीन महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, स्थानीय पुलिस आयुक्त को याचिकाकर्ता और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है।
Students Are Jailed For Merely Protesting; Bail Denied Even For Having Biryani On Ganga Boat Trip : Justice Ujjal Bhuyan |@1Simranbakshi
Justice Bhuyan lamented that the space for dissent in India was shrinking.
https://t.co/TCaa7mlwuE
सुना है चैनलों के न्यूज रूम में मातम का माहौल है . सरकार भक्तों की जमात किलस रहे हैं .करें तो करें क्या ?
अपने बुलेटिन में सरकार को कवर फायर नहीं दे पा रहे हैं . आंदोलन को गरिया नहीं पा रहे हैं .
मन मारकर सब लोकतंत्र में युवाओं की ताकत की व्याख्या कर रहे हैं. भीतर ही भीतर छाती पर सांप लोट रहा है .
ये हमारे छात्रों की जीत है, जो हिंदुस्तान के भविष्य हैं।
देश की शिक्षा व्यवस्था की कभी दुनिया में तारीफ होती थी, लेकिन पिछले कुछ साल से इसपर कब्ज़ा किया जा रहा है। RSS ने दीमक बनकर एजुकेशन सिस्टम को खोखला कर दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार, अयोग्यता और शिक्षा व्यवस्था की तबाही का symbol थे और अच्छा हुआ कि ये symbol हट गया।
मगर अब शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।
छात्रों की दो और मांगे हैं, जिन्हें हमें नहीं भूलना नहीं है 👇
• छात्रों से बर्बरता करने वालों पर कड़ा एक्शन हो
• नरेंद्र मोदी देश के सभी छात्रों से माफी मांगे
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
Please do not forget the contribution of AISA, SFI, AISF whose leaders, students sat on a hunger strike for more than 20 days despite threats to their health. Thank you for showing us what moral courage looks like @neha_aisa