‘संविधान हत्या’ ये दो शब्द कभी एक साथ जा ही नहीं सकते क्योंकि इस देश में संविधान की हत्या करने वाला आज तक कोई पैदा ही नहीं हुआ है
हत्या की जगह 'रक्षा' या 'बचाओ' भी तो कह सकते थे. लेकिन यह हत्या शब्द BJP के अंदर की नफ़रत, उनकी कुंठा, उनका असली चेहरा और उनके अंदर की हिंसा का परिचायक है
असलियत यह है कि संविधान बदलने की BJP की साज़िश नाकाम हो गई और इस देश की जनता ने उनके षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश कर दिया - और इस तरह की ऊल जलूल हरकतें हार की झुँझलाहट और ध्यान भटकाने की नाकाम कोशिशें हैं
जब बात अग्निवीर पर होनी चाहिए, मणिपुर पर होनी चाहिए, बेरोज़गारी पर होनी चाहिए, महँगाई पर होनी चाहिए - तो बात करेंगे 50 साल पहले की!
अगर ऐसा ही है तो क्यों ना हर दिन इस देश में रोज़गार हत्या दिवस, किसान हत्या दिवस, महिला सुरक्षा हत्या दिवस ना मनाया जाये?
@hdraval93 ઓરડા બનાવવા માટે સર્વ શિક્ષા માં સિવિલ એન્જિનર ની ભરતી નું પરિણામ આપો...ઇન્ટરવ્યુ 11 માં મહિના માં થઈ ગયા છે પણ રિસલ્ટ નથી આપ્યું ...સાહેબ થોડી મદદ કરો...