रिपोर्ट के मुताबिक ड्रॉप आउट गरीबी और कम उम्र में अपने परिवार को सहारा देने के कारण होता है. गरीब और अशिक्षित परिवार अपना खर्च कम करें, खुद गरीबी का सामना करें लेकिन अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजें.
#DenialAndDeprivat
#MuslimFreedomFighters
आमतौर पर यह कहा जाता है कि अंग्रेजो के खिलाफ मुसल्लह जद्दोजहद का आगाज़ 1857 से हुआ, यह एक गलत बात है , जो जानबूझकर आम किया गया है।
1857 से सौ बरस पहले जिस तहरीक का आगाज़ हुआ और जिसके नतीजे में बंगाल के सिराजुद्दौला ने 1757 में , मजनू शाह ने 1776 और 1780
अहमदुल्लाह शाह, 1787 में पैदा हुए, वो फैज़ाबाद के मौलवी के नाम से मशहूर हुए। 1857 की अज़ीम हिंदुस्तानी बग़ावत की सरकर्दा शख़्सियत में से एक थे। अवध के इलाके में, मौलवी अहमदुल्लाह को 'बग़ावत का मिनारा' कहा जाता था।
अपनी शहादत से कुछ दिन पहले, अशफाकउल्लाह ने फैजाबाद जेल से चोरी से अपने देशवासियों के लिए अपना अंतिम संदेश भेजा। उन्होंनेने बताया कि वह किस तरह की आज़ादी के लिए लड़ रहे थे:
“मैं हिंदुस्तान के लिए उस तरह की आज़ादी चाहता हूं जहां गरीब खुशी से और आराम से रहें...”
कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,
आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।
दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं,
ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे।
शहीद अशफ़ाक़ुल्लाह खान का शुमार भारत के मुमताज़ मुजहीदन-ए-आज़ादी में होता है।
लिखा होगा हज़रत महल की लहद पर
नसीबों की जली थी, फलक की सताई
जब भी 1857 के 'स्वतंत्रता संग्राम' पर बात होगी। बेगम हज़रत महल का नाम बड़े एहतिराम से लिया जाएगा।
बेगम हजरत महल 1857 की आज़ादी की पहली लड़ाई की अकेली साहिब हिम्मत ख़ातून थीं जिन्हें अंग्रेज़ कभी पकड़ नहीं पाए।
शहीद वैज़ुल हक़ ने तिरंगे की लाज रखने के लिए 29 साल की उमर में अपनी जान दे दी थी।
ऐसे ही गुमनाम शहीदों के लिए त्रिलोक चंद महरूम ने लिखा -
भारत वालों भूल न जाना, अमर शहीदों का ये अफ़साना
#Bihar#AzadiKaAmritMahotsav#HarGharTiranga
भारत में जिहाद का शब्द 1915 में शुरू हुवा जब भारत के ओलमाओं ने अफगानिस्तान में एक सरकार बनाई जिस का सदर राजा महिंदर पल सिंह को बनाया था | मत्लब जिहाद तो था लेकिन बुराई के खिलाफ था किसी धर्म के खिलाफ नहीं था| अजित डोभाल
APJ Abdul Kalam जैसा महान व्यक्ति सदियों में जन्म लेता है।उन्होंने भारत को दुनिया भर में एक मकाम अता किया।आज के मुसलमान नेताओं को उनसे सीख लेनी चाहिए जिन्होंने राष्ट्रपति बनने के लिए कभी भी अपने धर्म से कोई समझौता नहीं किया था।
अल्लाह ताला उन को जन्नत नसीब फरमाए
#APJAbdulKalam
Indian Muslims have given sacrifice for the nation whenever it was needed. Here is the list of Muslim officers and soldiers who lost their lives and were martyred during #KargilWar.
#KargilVijayDiwas2022#KargilHeroes
"हम तो जा रहे हैं पर जमीन के एक टुकड़े पर भी दुश्मन का कब्जा ना होने पाए
"
यही शब्द थे मेरे परनाना,1948 में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध के महानायक,आज़ाद भारत के प्रथम महावीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान अंसारी के।
नम आंखों से खिराज ए अकीदत पेश करते हैं।