सविनय निवेदन है कि बिहार के लाखों परिवारों, विशेषकर माताओं के लिए जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पारंपरिक पर्व है। इस अवसर पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि की कामना के लिए विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करती हैं।
वर्ष 2026 के अवकाश संबंधी कैलेंडरों में जितिया/जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है। बिहार सरकार के सामान्य अवकाश कैलेंडर में जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि 03 अक्टूबर 2026 अंकित है, जबकि विद्यालयों के अवकाश कैलेंडर में 05 अक्टूबर 2026 अंकित किया गया है।
अतः बिहार के प्रचलित हिंदू पंचांग एवं धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए जितिया पर्व की छुट्टी की तिथि की पुनः समीक्षा कर व्रत एवं पर्व की मान्य तिथि के अनुरूप अवकाश निर्धारित/परिवर्तित करने की कृपा की जाए, ताकि शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं उनके परिवार इस महत्वपूर्ण पर्व को विधिवत रूप से मना सकें।
यह निर्णय बिहार की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ लाखों शिक्षकों एवं अभिभावकों के लिए भी सुविधाजनक होगा।
अतः बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ की ओर से आग्रह है कि इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक आदेश निर्गत करने की कृपा की जाए।
@samrat4bjp@mkrtiwari_bjp
भवदीय।
बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ
@BiharEducation_ से शिक्षक समाज की ओर से अनुरोध है,कृपया पारदर्शी तरीके से अंतर जिला,जिला के अंदर बचे हुए शिक्षकों का स्थानांतरण कर दें ताकि शिक्षक मानसिक शांति के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए पारिवारिक जिम्मेवारियों का भी निर्वहन कर सके।
#BiharTeacherTransferJustice
@BiharEducation_ से शिक्षक समाज की ओर से अनुरोध है,कृपया पारदर्शी तरीके से अंतर जिला,जिला के अंदर बचे हुए शिक्षकों का स्थानांतरण कर दें ताकि शिक्षक मानसिक शांति के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए पारिवारिक जिम्मेवारियों का भी निर्वहन कर सके।
#BiharTeacherTransferJustice
"6 जिलों का विकल्प क्या हमने केवल कागजी औपचारिकता के लिए दिया था? जब विभाग ने पोर्टल खुलवाया, हमने आवेदन किया, तो फिर आज हम वंचित क्यों? हर बार नई नीति, हर बार नया इंतजार। अब और नहीं!#BiharTeacherTransferJustice@NitishKumar
#BiharTeacherTransferJustice
"6 जिलों का विकल्प क्या हमने केवल कागजी औपचारिकता के लिए दिया था? जब विभाग ने पोर्टल खुलवाया, हमने आवेदन किया, तो फिर आज हम वंचित क्यों? हर बार नई नीति, हर बार नया इंतजार। अब और नहीं!