बाराखंबा पुलिस स्टेशन से अनाउंसमेंट हो रहा है-
राहुल को रिलीज कर दिया।
थाने का दरवाजा न तोड़ें।
कार्यकर्ताओं के गुस्से को देखकर सरकार ज्यादा समय तक आज राहुल को नहीं रख पाई।
देश की राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के सामने पुलिस के साथ अर्धसैनिक बल तक तैनात करना बेहद चिंताजनक है।
अपने हक़ और अधिकार की आवाज़ उठाने वाले युवाओं से इतनी घबराहट क्यों? लोकतंत्र में जवाब दमन नहीं, संवाद होना चाहिए।
@DelhiPolice#Delhi#JantarMantar #SaveDemocracy #JaiSamvidhan
दिल्ली के सभी नेताओं को तुरंत पार्टी से बाहर करना चाहिए
राहुल जी के साथ पूरा विपक्ष दो दिनों से सड़कों पर है
संदीप दीक्षित कहां है?
अजय माकन कहां है?
देवेंद्र यादव कहां है?
क्या यह सब सिर्फ AC में बैठने के लिए ही नेता बने है?
अब नहीं तो कब सड़कों पर आयेंगे यह लोग?
सरकार और बीजेपी को स्टूडियो मीडिया और उनके साथ बैठने वालों ने बहुत नुकसान पहुँचाया है! इनके अगुआ निशिकांत दुबे जैसे लोग हैं!
देखिये अहंकार की भाषा को!
दरअसल ऐसे लोगों ने सत्ता का करीबी दिखाकर सन्देश दिया की ये किसी को कुछ कह सकते हैं! किसी का कुछ बिगाड़ सकते हैं! कुछ हद तक इन्होने अपनी ताकत दिखाई भी है! ताकत है भी! लेकिन यही सरकार का इक़बाल कम करते हैं! इनलोगों ने इतनी अति कर दी की तो डर समाप्त कर दिया!
किस तरह का अत्याचार हो रहा है और वो भी दिल्ली में दिन-दहाड़े, आप देख रहे हैं। राहुल गांधी सिर्फ अपनी बात रखने के लिए धरने में बैठना चाहते हैं, प्रदर्शन करना चाहते हैं फिर ऐसी रुकावट का क्या मतलब है?
- अधीर रंजन चौधरी