निर्णयक दौर है - ज़रा संभल के:
सिविल सोसाइटी के नाम पर एक अन्ना हजारे के पीछे एक जमावड़ा जुटा और 2014 में मोदी के लिये रास्ता बनाया.
जब भी मोदी संकट में होते है यही सिविल सोसाइटी ऐक्शन में आ जाती है. पेपर लीक पर मामला बढ़ा, मोदी मुश्किल में आये तो ये सिविल सोसाइटी वाले सोनम वांगचुक को ले आये. पूरे आंदोलन की हवा निकलने के लिये.
लेकिन जंतर मंतर पर जेन ज़ी भारी पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान के विकेट ले लिया.
वो नड्डा से जूस पी कर ऐसा गये कि लौटे ही नहीं.
इस बार SIR और वोट चोरी पर भी वही कोशिश है.
सिविल सोसायटी फिर एक्टिव है.
जेन ज़ी सड़कों पर है, उसे किसी नेता की ज़रूरत नहीं है. वो दिल्ली पुलिस की प्रताड़ना झेल रहा है, FIR हो रही हैं फिर भी डटा हुआ है. इस बार वो बड़ा उद्देश्य और तैयारी के साथ घर से निकला है.
साथ में संसदीय विपक्ष भी सड़कों पर है. राहुल गांधी, महुआ मोइत्रा, प्रियंका गांधी, प्रो मनोज झा आगे खड़े है. दिल्ली में वो ही रहा है जो पहले नहीं हुआ.
सरकार पर अभूतपूर्व दबाव है.
उसी माहौल में जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को "some people's representatives are doing their job" कहने पर विवश कर दिया जाए तो अलार्म बजता है कि सिविल सोसाइटी फिर आ गई अपने एजेंडे के साथ.
पिछले 19 दिन से सोनम वांगचुक जी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं, जिससे उनके स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि वे अपना अनशन समाप्त करें।
पेपरलीक और विभिन्न अनियमितताओं के मामलों के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर जो आपबीती है उसने सभी को झकझोर दिया है।
@RahulGandhi जी और हमारी पार्टी का मानना है — युवा देश का भविष्य हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा और यह सिर्फ भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
सच कहूंगा ।
दोस्तों।
जाने वाले चले गए पर अपनी यादें छोड़ जाते हैं। आपको जाते देखकर पूरा देश दुखी है ।
यह आपकी कमाई थी।
आप जैसे इंसान सदियों में जन्म लेते हैं।
पूरे विश्व की आंखें नमन है आपके जाने से आपको भवानी श्रद्धांजलि।
बीजेपी को एक बार आप बिना मीडिया के कर दीजिए।
खत्म हो जाएगी।
बीजेपी के असली ताकत मीडिया ही है।
बीजेपी की विचारधारा के अनुरूप जनता को अंधविश्वासी, विवेकहीन, नफरत करना सीखने वाला।
मीडिया अगर प्रोग्रेसिव हो जाए जो उसे कांग्रेस ने भी नहीं बनाया तो जनता का स्तर अपने आप ऊंचा उठाने लगेगा। वह रोजी रोटी महंगाई शिक्षा स्वास्थ्य दूसरी समस्याओं विकास के बारे में बात करने लगेगी।
नफरत और विभाजन का अजेंडा अपने आप खत्म हो जाएगा।
मगर कांग्रेस में भी दक्षिणपंथी इतने ज्यादा घुसे हुए हैं कि उन्हें भी दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी मीडिया ही सूट करती है।
आप देखते हैं जब राहुल पर बीजेपी का कोई हमला कामयाब नहीं होता तो वह उन्हें प्रोग्रेसिव कहके संबोधित करते हैं।
यह कहते ही कांग्रेस के दक्षिणपंथी राहुल के खिलाफ फिर शुरू हो जाते हैं।
यह विचारधारा की लड़ाई है। कांग्रेस दक्षिणपंथ की कार्बन कॉपी बनाकर भाजपा का मुकाबला कभी नहीं कर सकती।
आजादी के बाद से कांग्रेस को इस समस्या का सामना करना पड़ा। नेहरू की साइंटिफिक सोच के खिलाफ उनकी ही पार्टी के तमाम बड़े नेता हमेशा खड़े रहे।
लेकिन फर्क यह है कि नेहरू ने उन्हें एडजस्ट करने के बावजूद अपनी भारत के नवनिर्माण की विचारधारा कभी नहीं छोड़ी।
राजनीति में बहुत समझौते करना पड़ते हैं लेकिन अगर विचारधारा प्रो पीपुल है तो प्रगति की धारा चलती रहती है।
मीडिया इन दिनों इसी धारा को रोकने का एक सबसे बड़ा टूल बन गया है।
लेकिन इसके बावजूद जिन ताकतों को जनता का समर्थन है वह खत्म नहीं हो रही हैं। 10 साल में विपक्ष को मिटाने की हर कोशिश हुई। मगर वह और मजबूत होकर निकला।
ऐसी ही स्थिति की कल्पना आप बीजेपी के लिए कर लीजिए कि जब वह विपक्ष में हो और उसके साथ मीडिया ना हो तो उसका कोई नाम लेवा भी नहीं रहेगा।
बीजेपी इतने साल विपक्ष में रही और क्योंकि मीडिया खुद इस विचारधारा की है इसलिए उसकी प्रिय रही।
कांग्रेस मीडिया के बेसिक कैरेक्टर को नहीं बदल पाई।
सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।
हमारे लिए स्वतंत्रता सिर्फ एक शब्द नहीं - संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों में पिरोया हुआ हमारा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
यह शक्ति है अभिव्यक्ति की, क्षमता है सच बोलने की और उम्मीद है सपनों को पूरा करने की।
जय हिंद। 🇮🇳
हम किसी के नाम को टेग करना नहीं चाहते मगर कांग्रेस के सब बड़े नेता पदाधिकारियों से कह रहे हैं कि वह इस वीडियो को सुनें और इस किताब को खरीदें।
हम व्यक्तिगत रूप से पत्रकार दयाशंकर मिश्र से परिचित नहीं है मगर उनकी राहुल गांधी पर लिखी किताब के बारे में और इस किताब को लिखने के कारण उन्हें नौकरी से निकाले जाने के बारे में पढ़ते रहे हैं।
और साथ में यह लिखना भी जरूरी समझते हैं कि कांग्रेस ने उसके मीडिया डिपार्टमेंट ने खूब पैसा देकर बहुत किताबें लिखवाई और छपवाई हैं।
अनावश्यक किताबें।
ज्यादातर रिएक्शनरी पत्रकार लेखकों से।
वे बड़े ढेर के तौर पर कांग्रेस के स्टोर में आज भी पड़ी हुई हैं।
मदद यहां की जाती है।
करना चाहिए।
देखते हैं कौन-कौन कांग्रेस का नेता और पदाधिकारी आगे आता है।
एक एक दो दो किताबें खरीदने से कुछ नहीं होगा। बड़ी तादाद में खरीदना पड़ेगी और बंटवाना पड़ेंगी।
माधबी पुरी बुच ने सुप्रीम कोर्ट और निवेशकों के आंखों में धूल झोंकी है. जिस तरह के आरोप हैं माधबी पुरी और गौतम अडानी पर मुकदमा और जेल दोनों होने चाहिये. लेकिन मोदी के पीएम रहते अडानी का बाल भी बांका नहीं होगा.
JDU और TDP इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकायेंगे.
जो भी इसे पढ़े, उनसे करुणा और दया की भीख 🙏🏽
🖋️ दिलीप मंडल
आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब हिंदू भारत में आना चाहते हैं और उनको रोक कर उन्हें मौत के मुँह में दोबारा जाने को कहा जा रहा है।
ये इन दिनों भारत-बांग्लादेश सीमा में अक्सर हो रहा है।
मारे जाने या बलात्कार के डर से हिंदू बांग्लादेश से भागकर भारत आना चाहते हैं पर कँटीले तारों के इस ओर के हथियारबंद जवान उन्हें आने नहीं देते। वापस धकेल दे रहे हैं।
इससे पहले 1947-48 और फिर 1968-71 के बात जब हिंदू भारत आना चाहते थे तो न सिर्फ़ उनको आने दिया गया, बल्कि उनको बसाया भी गया। तब क्रमशः नेहरू और इंदिरा गांधी की सरकार थी। वे हिंदुओं के प्रति उदार थीं। दिल्ली की तमाम पॉश कॉलोनियाँ इन्हीं शरणार्थी हिंदुओं की हैं। आज वे लोग राष्ट्र निर्माण में प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
अब पहली बार हिंदुओं को रोका जा रहा है।
यहाँ तक कि म्यांमार के मुस्लिम रोहंगिया को भी भारत में न सिर्फ आने दिया गया बल्कि दिल्ली समेत कई शहरों में उनके कैंप चलाए जा रहे हैं।
लेकिन अभागे हिंदुओं के लिए तो शरणार्थियों के लिए बने अंतरराष्ट्रीय नियम भी भारत सरकार लागू नहीं कर रही है।
ये अविभाजित भारत के अपने लोग हैं। इनकी भारत में रि़श्तेदारियां हैं। अगर ये हिंदू, भागकर भारत भी नहीं आ सकते तो ये कहाँ जाएँगे? CAA किस दिन के लिए बना है। उसमें 2014 की शर्त हटाई जाए।
क्या रोहंगिया हमारे लिए ज़्यादा अपने हो गए। इन अभागों का दुनिया में कौन है?
अंत में प्रार्थना 🙏🏽
राजस्थान के मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp को अपनी दुविधा बताता राजस्थान का छात्र.....
आप कहते थे कि कांग्रेस के राज में पेपर लीक होते हैं, लेकिन आपके राज में तो पेपर ही नहीं हो रहे..
कुछ करो भजनलाल जी राजस्थान के युवाओं का भविष्य बर्बाद मत करो।
@SachinPilot@INCRajasthan
ये फोटो घूम घूम कर टाइम लाइन पर आकर बता रही है कि मोदी का व्यक्तिव कितना कमज़ोर है और अपने लिये बने मंच के अलावा और कहीं और कितने असहज हैं. जो दस साल प्रधानमंत्री और 12 साल मुख्यमंत्री रहा हो उसे तो आत्मविश्वास से भरा होना चाहिये.
चेहरा घमंड नहीं बल्कि एहसास-ए-कमतरी दिखा रहा है.
★ बीजेपी का कोई सांसद/मंत्री अनुराग ठाकुर है..इस ने आज राहुल गांधी का नाम लिए बग़ैर संसद में राहुल गांधी की जाति पूछी..
★ सवाल अच्छा था..तो राहुल गांधी की जाति पर नज़र डालते हैं..ग़ौर से पढ़िए..
● स्वर्गीय मोतीलाल नेहरू : आज़ादी की लड़ाई में जेल गए..अपनी सारी प्रोपर्टी भारत को दान में दे दी..
● स्वर्गीय श्रीमती स्वरूप रानी नेहरू : मोतीलाल नेहरू की धर्मपत्नी, पंडित नेहरुजी की माताजी..आज़ादी की लड़ाई में जेल गई..ब्रिटिश ने लाठी मार कर उन का सर फोड़ दिया था..उसी चोट से स्वरूप रानी नेहरू की मौत हुई..
● स्वर्गीय पंडित नेहरू : आज़ादी की लड़ाई के सबसे बड़े नेताओं में शामिल..10 साल जेल में रहे..PM बनने के पहले 198 करोड़ की संपत्ति भारत को दान कर दी..
● स्वर्गीय श्रीमती कमला नेहरू : पंडित नेहरू की पत्नी..बीमारी के हालत में भी आज़ादी के वक़्त जेल गई..शहीद चंद्रशेखर आज़ाद का शव मांगने के लिए ब्रिटिश को नाको चने चबवा दिए थे..
● स्वर्गीय श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित/स्वर्गीय श्रीमती कृष्णा हट्टी सिंह : दोनों पंडित नेहरुजी की बहनें..आज़ादी की लड़ाई में अपनी जवानी खपा दी और जेल काटी
● स्वर्गीय पंडित रंजीत सीताराम : पंडित नेहरू के बहनोई..आज़ादी के लड़ाई में जेल में ही स्वर्गवासी हो गए..
● स्वर्गीय पंडित बृजलाल नेहरू/स्वर्गीय श्रीमती रामेश्वरी नेहरू : पंडित नेहरू के चचेरे भाई और उनकी धर्मपत्नी..दोनों ने आज़ादी में जेल काटी..
● स्वर्गीय फ़िरोज़ गांधी : आज़ादी की लड़ाई के दौरान ब्रिटिश की नाकों में दम कर दिया था..बरसों जेल में गुज़ारे..
● स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी : फ़िरोज़ गांधी की धर्मपत्नी.. फ़िरोज़ गांधी के साथ कंधे से कंधा मिला कर आज़ादी के दौरान ब्रिटिश से लड़ाई की और बरसों जेल में रही..
👉 ये सिर्फ़ कुछ नाम लिखे हैं..नेहरू परिवार के और भी कई लोग थे जिन्होंने आज़ादी की जंग में क़ुरबानी दी थी..
★ चलिए सवाल बदलता करता हूँ..
◆ शहीद भगत सिंह की जाति बताइए..नेहरुजी भगत सिंह से मिलने जेल गए थे..
◆ शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जाति बताइए..आज़ाद की पूरी लड़ाई में नेहरुजी के पैसे लगते थे..
◆ नेताजी सुभाषचंद्र की जाति बताइए..नेहरुजी और नेताजी की दोस्ती ने ब्रिटिश की नींद हराम कर दी थी..
◆ सरदार पटेल की जाति बताइए..सरदार पटेल नेहरुजी को "मेरा नेता" कहते थे..
◆ कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर की जाति बताइए..कविगुरु नेहरुजी को "ऋतुराज" और "भारत का होने वाला PM" कहते थे..
👉 वापिस सवाल पलटता हूँ :
★ स्वर्गीय इंदिरा गांधी की जाति बताओ जिनके ख़ून का एक एक क़तरा हिंदुस्तान की मिट्टी में समा गया?
★ स्वर्गीय राजीव गांधी की जाति बताओ जिन के जिस्म का हर एक टुकड़ा भारत माता को समर्पित हो गया?
👉 @ianuragthakur ये सब तब हो रहा था जब आप के सियासी पुरखे या तो ब्रिटिश के लिए मुख़बरी कर रहे थे या फिर ब्रिटिश की पेंशन के टुकड़ों पर पल रहे थे..याद आया या नाम बताऊं?
👉 अनुराग ठाकुर, ज़रा उस दुर्दांत आतंकी गोडसे की जाति बताओ जिस ने गांधी का क़त्ल किया था?
✋ राहुल गांधी को जितना गाली दोगे उतना ही शुभ होगा..गाली हैसियत वालों को दी जाती है।
💐 राहुल गांधी ज़िंदाबाद
आपके घर से 60 किमी के भीतर किसी भी टोल बूथ पर कोई टोल शुल्क देय नहीं है। इसके लिए आपको अपने आधार कार्ड से गुजरना होगा।@nitin_gadkari
यह केंद्र सरकार का आदेश है. 🙏
तब आप चुप थे..ये पक्षपात नहीं चलेगा:
जिस तरह से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ सदन चलाते हैं ऐसा संसदीय इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया.
आसन की तरफ से विपक्ष से सदस्यों पर इतनी टोका टाकी आसान से कभी नहीं हुई.
इन दोनों ने आसन का लिहाज ही खत्म कर दिया.