त्योहार के दिनों में हमने भक्ति रचनाओं की श्रृंखला चलाई। जिसे आप सभी ने पसंद किया। #Raaggiri की तरफ से सभी का धन्यवाद।
आज कौशिकी चक्रवर्ती जी को सुनिए। अधर्म पर धर्म की जीत के त्योहार दशहरे की आप सभी को मंगलकामनाएँ
#Dussehra#VijayaDasami@Singer_kaushiki@YRDeshmukh@hvgoenka
जनता की जमीन है या सत्ता का इनाम बाँटने का खजाना?
इंडियन एक्सप्रेस की अदिति राजा की रिपोर्ट बताती है कि गुजरात सरकार ने यूसुफ पठान को वडोदरा में उनके बंगले से सटी नगरपालिका की 978 वर्गमीटर जमीन देने की मंजूरी दी है। इसमें 500 वर्गमीटर उपहार में और बाकी 478 वर्गमीटर निर्धारित मूल्य पर 45 प्रतिशत छूट के साथ देने का फैसला है। पूरे भूखंड का मूल्यांकन लगभग 20.5 करोड़ रुपये हुआ था। नगरपालिका की अंतिम मंजूरियों की प्रक्रिया अभी बाकी है।
इसी जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए उन्हें 2024 में नोटिस मिला था। अब तस्वीर बदल गई है। जून 2026 में पठान दूसरे सांसदों के साथ तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए और अगस्त में गुजरात सरकार ने जमीन देने की मंजूरी दे दी। (https://t.co/cpr8chpWfg)
यह घटनाक्रम अपने आप में राजनीतिक सौदेबाजी पर सरकार से सवाल पूछने के लिए पर्याप्त है। जिस जमीन को खाली कराने का नोटिस दिया गया था, उसे अब उपहार और भारी रियायत पर देने का औचित्य क्या है? इसमें कौन सा जनहित है ?
मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर यही तो गंभीर सवाल है। राजनीतिक वफादारी बदलते ही किसी नेता के प्रति सरकारी व्यवहार क्यों बदलने लगता है? विपक्ष में रहते हुए जिसके पीछे जांच एजेंसियाँ पड़ती हैं, सत्ता के करीब आते ही उसके मामले की रफ्तार धीमी क्यों पड़ जाती है? जमीन, ठेके, पट्टे और सरकारी पद आखिर किस कसौटी पर बाँटे जाते हैं?
न्यायपालिका के मामले में भी कसौटी उतनी ही कड़ी होनी चाहिए। सत्ता के अनुकूल फैसले देने वाले किसी न्यायाधीश को सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी पद मिलता है तो फैसलों की स्वतंत्रता पर संदेह क्यों न हो? हर नियुक्ति को किसी फैसले की कीमत कहना उचित नहीं होगा, लेकिन उस संदेह को दूर करने की जिम्मेदारी से सरकार और पद स्वीकार करने वाला व्यक्ति कैसे बच सकता है?
लोकतंत्र में सांसद की निष्ठा उसके मतदाता के प्रति और न्यायाधीश की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए। अगर संदेश यह जाने लगे कि सत्ता को खुश रखिए और बदले में पद, संरक्षण या संपत्ति पाइए, तो संस्थाओं पर जनता का भरोसा कैसे बचेगा?
एक साधारण नागरिक सार्वजनिक जमीन पर कब्जे के आरोप में अपना घर उजड़ते देख सकता है। एक प्रभावशाली व्यक्ति उसी जमीन को उपहार में पाने की मंजूरी हासिल कर लेता है। कानून की बराबरी कहाँ गई?
सरकार सार्वजनिक संपत्ति की रखवाली के लिए चुनी जाती है। उसे राजनीतिक मेहरबानी में बाँटने के लिए नहीं। जनता का धन, जनता की जमीन और सरकारी संस्थाएँ किसी दल की निजी जागीर नहीं हैं।
Shocked and horrified by the brazen threats to @ajeetbharti from a public platform. To single him out for his Brahmin identity and then to threaten to skin him alive, is unacceptable. The state must provide him adequate security immediately.
Stay safe, Ajeet. We stand with you.
𝗕𝗝𝗣'𝘀 𝗰𝘂𝗻𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗰𝗼𝗺𝗺𝘂𝗻𝗶𝗰𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝘀𝘁𝗿𝗮𝘁𝗲𝗴𝘆 𝗶𝗻 𝗠𝗣 73% 𝗾𝘂𝗼𝘁𝗮 𝗰𝗮𝘀𝗲
Yesterday BJP filed SLP in Honorable Supreme Court against the MP High Court Order dismissing 73% quoa as unconstitutional.
But, none of the BJP handles have posted on this.
Even MP CM Mohan Yadav's tweets do not mention anything about MP govt decision to implement 73% quota.
His twitter handle is about wishing people on Navratri Festival.
Modi, Amit Shah, Nitin Nabin, BJP party handle, handles of BJP IT cell , mainstream media- all have been completely silent on the fact that the MP BJP govt is hell bent on implementing 73% quota.
Because, all along BJP has been calling Rahul Gandhi as urban naxal as he is calling for removal of reservation ceiling of 50% but now BJP govts are pushing for 70% quota.
That's the clever communication strategy of BJP.
In the popular media and narrative, they want to give the impression to the General Category that BJP is their friend and congress is their enemy.
It works because many GCs blindly support BJP, they do not scrutinize policy decisions of BJP govts and the submissions made by BJP in the courts.
While fooling GCS, BJP gives a message to SC, ST, OBCs that they are in support for implementing 73% quota and making policies in their favour.
𝗜𝗳 𝗵𝘆𝗽𝗼𝗰𝗿𝗶𝘀𝘆 𝗵𝗮𝘀 𝗮 𝗻𝗮𝗺𝗲, 𝗶𝘁 𝘄𝗼𝘂𝗹𝗱 𝗯𝗲 𝗕𝗝𝗣.
#AntiGCBJP
BREAKING: Supreme Court rules that former caste status cannot be used to claim Reservation after religious conversion.
At this point, the judiciary is doing every job our elected leaders should be doing!
अंकिता भंडारी केस में बीजेपी लीडर विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य को उम्र क़ैद की सजा हुई।
जांच के दौरान दो व्यक्तियों के फ़ोन कभी नहीं मिले।
1. पुलकित आर्य
2. अंकिता भंडारी
अंकिता भंडारी की डुप्लीकेट सिम बनवा कर पुलिस ने साल भर की कॉल डिटेल, वॉट्सएप मेसेज निकलवा लिए।
लेकिन पुलकित आर्य के मामले में ऐसा नहीं किया गया!
क्यों?
क्योंकि पुलकित आर्य की कॉल डिटेल्स और मेसेज से पता चल जाता कि कौन कौन VIP इसमें शामिल था।
ये भी पता चल जाता कि क्या मामला सिर्फ अंकिता के शोषण का था या और भी युवतियों को मजबूर किया जाता था।
इसीलिए उत्तराखंड में इस मामले में रोष है।
इसीलिए अंकिता के माता पिता आंदोलित हैं।
पुलिस ने तो VIP के नाम उजागर नहीं किए। लेकिन जब बीजेपी के अपने नेताओं ने पिछले साल दुष्यंत गौतम का नाम उजागर कर दिया, तो पूरे उत्तराखंड में जनता सड़कों पर उतर आई।
तब जनवरी 2026 में CBI जांच की घोषणा की गई।
लेकिन दस महीने हो गए, जांच आगे नहीं बढ़ी।
अंकिता के पिता को पहली बार CBI ने पिछले हफ़्ते 9 अक्टूबर को संपर्क किया!
और फिर 12 अक्टूबर को दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बना कर जाँच के दायरे से बाहर कर दिया। राज्यपाल को संवैधानिक immunity होती है। कोई CBI या SIT उनसे पूछताछ नहीं कर सकती है।
राज्यपाल बनाने के लिए गृह मंत्रालय और IB ने दुष्यंत गौतम को चुपचाप क्लीन चिट भी दे दी!
ऐसा क्यों किया, यही सवाल अंकिता के माता पिता राष्ट्रपति जी पूछना चाहते हैं।
भाजपा के मध्यप्रदेश में कारनामे के बाद पेश है उत्तरप्रदेश के कारनामे👇
कल जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि पिछले साल दिए गए शपथपत्र का उल्लंघन क्यों किया, तो सरकार कहती है कि हम सहमत नहीं थे!
यानी बिना सहमति के शपथपत्र दे दिया कोर्ट में?😂
मतलब सबको मूर्ख बनाने वाली पार्टी, अब कोर्ट को भी मूर्ख बना रही है😂😂
नवरात्र चल रहे हैं तो माँ की भक्ति में डूबे पंडित जसराज जी को सुनिए।संगीत प्रेमी उन्हें रसराज कहते हैं।बहुत कम कलाकार ऐसे हैं जिनका संगीत आपको आध्यात्म से जोड़ सकता है,किसी दैवीय लोक में पहुंचा सकता है।संगीत मार्तंड पंडित जसराज ऐसे ही गायक हैं।
#Raaggiri@YRDeshmukh@hvgoenka
प्रिय युवाओं
ज्ञानेश चोर हो सकते हैं. पेपर लीक हो सकता है. बेरोजगारी और महंगाई बढ़ सकती है. देश अंबानी-अदानी चला सकते हैं. लेकिन अगर तुमको लगता है कि इन आंदोलन से कल कोई दूसरा नेता आकर देश में सब कुछ ठीक कर देगा, तो ये तुम्हारी बुद्धि की बलिहारी है.
दरअसल तुम अभी नहीं जान सके हो कि इस देश में आंदोलन एक बौद्धिक व्यापार है. हर आंदोलन से राजनीति के बाजार में कुछ नई दुकाने खुल जाती हैं. कुछ चल पड़ती हैं और कुछ बंद हो जाती हैं.
फिर इस लोकतंत्र के क्षितिज पर कुछ देर के लिए एक धुआँ उठता है और इस देश के राजनीतिक कवि-लेखक-पत्रकार नारे लगाते हैं, “देखो-देखो हम ज़िंदा हैं.” और तब तक चिल्लाते हैं जब तक कि उनकी पसंद का नेता कुर्सी पर बैठ नहीं जाता.
इसलिए कहना चाहूँगा, अगर तुम किसी पार्टी के कार्यकर्ता हो तो आंदोलन जरूर करो. कार्यकर्ता का तो फ़र्ज़ है. लेकिन अगर नहीं हो तो फिलहाल पढ़ाई-लिखाई और कैरियर पर ध्यान दो.
अगर एसआईआर में ज्ञानेश ने तुम्हारा नाम काट दिया है तो फ़ार्म 6 भरने का आप्शन अभी भी तुम्हारे पास है. अपना नाम ऑनलाइन जोड़ लो और जब चुनाव आए तब वोट देकर अपना गुस्सा दर्ज कर लेना.
लेकिन ये वक़्त पढ़ने-लिखने और ख़ुद की दुनिया गढ़ने का है. ये बीत जाएगा तो फिर न आएगा. इस देश में तमाम अवसर और नए आसमान आज भी मौजूद हैं. तुम्हारी मेहनत और योग्यता को राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी मिलकर भी नहीं रोक सकते..
मेहनत करके ऐसा सामर्थ्यवान बनो कि कुछ लोगों का जीवन बदल सको. यही सच्ची देश सेवा होगी.
बाक़ी इस आंदोलित भेड़ियाधसान में कुछ नहीं रखा. जिस भैया-दीदी का भाषण सुनकर आज मज़ा आ रहा, वो दस साल बाद पार्टी बदलकर राजनीतिक भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाएँगे. और तुम हाथ मलते रह जावोगे.
कम से कम इतिहास तो यही कहता है.
बिश्वास नहीं तो जेपी के सम्पूर्ण क्रांति से लेकर आज तक हुए आंदोलन का इतिहास उठाकर देख लो, आंदोलन, क्रांति और परिवर्तन के नाम पर भारत की जनता आज तक बेवक़ूफ़ ही बनती आई है. और आगे भी बनती रहेगी. कम से कम तुम तो न बनो.
जेपी के पास तो नैतिक जमीन भी थी, चरित्र भी था. उनके पीछे चलना भी गर्व का विषय था. तुम जिनके पीछे हो उनके पास कुछ नहीं है..बस सत्ता मिलने की देर है..ये भी उतने ही भ्रष्ट, अलोकतांत्रिक और ग़ैरजिम्मेदार हैं…
बुरा लगे तो माफ़ करना… आजकल ऐसी बातें कहने का जमाना नहीं रहा 😌
Atul
26,27,00,00,000
यह रकम देखकर चौंकिए मत !!!
पिछले 5 सालों में SC ST Act के तहत जो फर्जी केस दर्ज किये गए हैं,उन फर्जी केसों को दर्ज करने के लिए सरकार ने 2627 करोड़ रुपए का मुआवजा(इनाम) SC ST के फर्जी केस कराने वालों को दिया है
गौरतलब बात यह है कि सरकार पार्लियामेंट के अंदर खुद यह कबूल चुकी है कि SC ST Act में 99.३३% केस फर्जी होते हैं
यह रकम पिछले 5 सालों में लुटाई गई है।
सोचने वाली बात यह है कि 1989 से लेकर आज तक इस फर्जीवाड़े के नाम पर देश को कितना चूना लगाया जा चुका है।
A big thanks to all our team members who helped in bringing Mahajan commission report, BRAUSS report, AISHE reports, and other related data from MP reservation case in public domain.
The social media impact in this case has been significant.
GC team-You all did good🙌
अभी कुछ महिलायें ट्रेन से नई दिल्ली स्टेशन उतरीं. काफ़ी परेशान होकर उन लोगों ने मुझे फ़ोन लगाकर पूछा - क्या दिल्ली नोएडा के बीच कैब बंद है? रात बारह बज गए हैं और हमे यहाँ कोई कैब नहीं मिल रही नोएडा के लिए. सब कह रहे हैं नोएडा नहीं जा सकते.
अगर CJP के तीन जोकरों से इतना डर है कि सारी ताक़त लगायी जा रही है तो फिर सरकार को सीरियसली सोचना चाहिए कि उसमे वाक़ई दम है भी?
और समूचे विपक्ष को घर बैठ जाना चाहिए क्योंकि उन सब की वर्षों की राजनीति के बावजूद मोदी सरकार का कुछ नहीं बिगड़ा और तिलचट्टों ने तहलका मचा दिया!
किसको बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है, समझ नहीं आता क्या?
ये तीनों जेपी और अन्ना हो गए हैं? वैसे दोनों आंदोलनों ने लोगों की उम्मीदों का बलात्कार ही किया. फिर भी दोनों आंदोलनों में ज़मीनी और संघर्ष से निकले लोग तो थे. ये तो निपट नालायक और डपोरशंख हैं. इन्होंने डरा दिया ! ग़ज़ब है भाई!!
ये भाजपा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा है:
"50% आरक्षण की लिमिट अटूट नहीं, इसको तोड़ा जा सकता है!"
इनका ये भी कहना है कि मराठा पिछड़े हुए हैं, और ये एक असाधारण स्थिति है, इसलिए 50% आरक्षण लिमिट तोड़कर बेचारे मराठा लोगों को आरक्षण ज़रूर देना चाहिए!
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी ये मांग खारिज़ कर चुका है, ये कहकर की मराठा सबसे प्रभावशाली समुदाय है और उनको आरक्षण देने का कोई औचित्य नहीं!
लेकिन तब भी भाजपा सरकार, कोर्ट के जजमेंट को अनदेखा कर, बार बार नए ordinance लाकर, मराठा आरक्षण देती जा रही है!
अब इनसे कोई ये पूछे कि "कांग्रेस आ गयी तो आरक्षण बढ़ा देगी" का डर दिखाने वाले, खुद ही कोर्ट में 50% लिमिट तोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं!
फिर इनमें और कांग्रेस में फर्क क्या है?
UGC कोई कानून है ही नहीं @girirajsinghbjp! वह एक नियमावली है। शब्दों से मत खेलिए। भगवतबा भी यही चिरौरी कर रहा था।
और भाजपा के हाथ में दस महीने से है इसको निरस्त करना, पर वो घास छील रहे हैं। कोर्ट में स्टे लगा है, वह किसी सरकार की भीख नहीं है। मुँह में हाथ डाल कर स्टे लगवाया है।
इसलिए अब ये ‘बिहार सवर्ण आयोग’, ‘यूपी के द्विवेदी जी को प्रभार’, ‘राज्यसभा में ब्राह्मण नाम’ का लॉलीपॉप मत दीजिए। सवर्ण समाज मूर्ख नहीं है।
यह वीडियो पूरी दुनिया को देखना चाहिए,
कि भारत में एक ऐसा SC/ST एक्ट कानून है।
जिसमें झूठा केस दर्ज होने पर भी सरकार लाखों रुपये का मुआवजा देती है और आरोपी को जमानत भी नहीं।
एक ही दिल है मोदी जी! पत्नी केस करे मोदी एक्ट का, पति गवाही दे दे, दलाल बात करे और प्रति केस ₹2.5 लाख की कमाई!
ओ हो हो हो, ओ हो हो हो, ओ हो हो, हो हो
इक्स तेरा तड़पाबे…
कैंसर दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर... सरकार को ₹333 में मिलने वाली दवा मरीजों को ₹12,500 में; सुप्रीम कोर्ट ने 2 बार सवाल उठाए
#CancerMedicine#SupremeCourt#DrugPricing#Healthcare
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