महाराष्ट्र राज्य माहिती आयोगात, तीन आयुक्तांची नियुक्ती करण्यात आली. मात्र, 52% ओबीसींची संख्या असून एक ही ओबीसी नाही. हा बहुसंख्य ओबीसी समाजावर महायुती सरकारने केलेला अन्याय आहे.
#Maharashtra@The_Mooknayak@TheNewsBeak
छत्तीसगढ़ में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की इसलिए बेरहमी से हत्या कर दी गयी क्यों कि उन्होंने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार को उजागर किया.
56 करोड़ की सड़क को 102 करोड़ दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया. इस भ्रष्टाचार में मुकेश के सगे संबंधी भी लिप्त थे.
आज कल के पत्रकार कॉम्फोर्ट जोन में काम कर रहे हैं. एसी न्यूज़ रूम में बैठकर एंकर प्रोपागेंडा चला रहे हैं. मुकेश चंद्राकर ने आदिवासियों की समस्या पर रिपोर्टिंग कर और भ्रष्टाचार उजागर कर पत्रकारिता को जिंदा रखा था.
लेकिन इस ईमानदार पत्रकार को तड़पा तड़पा के कुल्हाड़ी से मारा गया. देश खामोश है, नेता खामोश हैं, बड़े पत्रकार खामोश हैं.
राजकारण!
कार्यकर्त्यांनी एकमेकांच्या उरावर बसा. राजकारणात असे क्षण नसावे, असे माझे मत नाही. सत्ताधारी आणि विरोधक वैयक्तिक शत्रू नसावेतच, फक्त हेच सूत्र कार्यकर्त्यांना सुद्धा सांगावे. नाहीतर कार्यकर्त्यांच्या झुंजी लावून आपण अशी राजकीय संस्कृती (?) जपत राहायची!
एक और NFS...👇
विगत दिनों संसद सत्र के दौरान हमने दिल्ली विश्वविद्यालय में हुए NFS(not found suitable) का मुद्दा उठाया था।
उसी दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज में NFS(not found suitable) का एक मामला संज्ञान में आया है जहां पत्रकारिता विभाग में 2 पदों (1 पद GEN,1 पद OBC) का विज्ञापन जारी किया गया था।
इन दो पदों में से GEN का जो एक पद था उसे भर लिया गया लेकिन OBC का जो एक पद था उसे खाली छोड़ दिया गया यानी जबकि इसके लिए 31 ओबीसी अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिया था।
हैरानी की बात ये है कि इस बार रिजल्ट में OBC के पद को NFS( not found suitable) भी नही दिखाया गया बल्कि उसे रिजल्ट से ही गायब कर दिया गया।
नीचे रिजल्ट और विज्ञापन दोनो के प्रूफ लगे है
👇👇👇
काँग्रेस पक्षाचे माजी प्रदेशाध्यक्ष, माजी मंत्री व सद्यस्थितीत विधानसभेतील काँग्रेस पक्षाचे गटनेता आमदार मा. बाळासाहेब थोरात यांच्याशी संविधान सन्मान संमेलनात भेट झाली. यावेळी त्यांनी 'ओबीसी अधिकारी कर्मचारी संघ'च्या कामाची दखल घेऊन राज्यातील ओबीसी प्रवर्गाच्या समस्यांवर चर्चा
Glad that opposition members have raised the sham in the form of Shengol which is against the spirit of democracy. In fact , last time during the discussion on motion of thanks , I had raised this .
This is the marks card of Anitha, a Dalit girl from Tamil Nadu's Ariyalur district who got 1176/1200 (98%) in her 12th standard but committed suicide after her fight against NEET failed after the Supreme Court dismissed her pleas.
Today, when you see candidates who failed in Physics and Chemistry score 705/720 in NEET, you realise how unfair and one-sided the system is. Anitha is a martyr in this fight. Read her story below (1/4)
EWS quota candidates got less cut off marks in written exam than OBC candidates in Indian Forest Service exam. What Election Commission cannot do UPSC is doing in getting poor forward caste candidates getting selected to Civil Services