1,000 days of the ongoing genocide in Gaza, which has not stopped until this very moment. We have not grown accustomed to it, and we never will. Steadfast forever on our land.
“उज़ैब ने बोला था कि 4 दिन रुक जाओ मेरा बच्चा होने वाला है मुझे फिर मार लेना”
ये कहा है उज़ैब की बीवी ने जिनके हाथ में 8 दिन का बच्चा है.. परिवार का क्या हाल है देखिए जो इंसाफ के लिए बुरी तरह रो रहें हैं
दिल्ली के उज़ैब को 8 हज़ार की मामूली रकम पर आरोपी संदीप और उसके साथियों ने बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला था..
हम चाँद हैं कोई नम्बर नहीं।
खान यूनिस के पूर्व में स्थित बानी सुहैला में हुए इजरायली हमले में 13 वर्षीय मासूम एलेन अल-फर्रा की मौत हो गई।
दागे गए एक गोले का छर्रा उसके सिर में लगा और एक मासूम ज़िंदगी हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई।
लेकिन इस घटना ने दुनिया को सिर्फ उसकी मौत से नहीं, बल्कि उसकी टी-शर्ट पर लिखे एक वाक्य से झकझोर दिया—
"हम चाँद हैं, कोई नंबर नहीं।"
यह महज़ एक जुमला नहीं, बल्कि उन तमाम बच्चों की आवाज़ है जिन्हें हर नई रिपोर्ट में सिर्फ़ "मृतकों की संख्या" बनाकर लिख दिया जाता है।
किसी के लिए वे आंकड़े हैं, लेकिन अपने माँ-बाप के लिए पूरी दुनिया थे।
जब बच्चों की पहचान उनके नाम से नहीं, बल्कि मौतों की गिनती से होने लगे, तो समझ लीजिए कि सिर्फ इंसान नहीं, इंसानियत भी घायल हो चुकी है।
एलेन अल-फर्रा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी टी-शर्ट पर लिखा यह संदेश इतिहास के पन्नों पर एक सवाल बनकर हमेशा रहेगा।
क्या मासूम बच्चों की ज़िंदगी की कीमत सिर्फ़ एक संख्या है, या फिर वे सचमुच चाँद हैं जिन्हें दुनिया ने गिनती में बदल दिया?
Monsters Walk Among Us. 😢
Aundh, Pune:
A mentally unwell young woman living on the streets was allegedly sexually assaulted in broad daylight...
@PuneCityPolice, Please look into this. This is beyond horrifying. the accused must face swift and strict legal action...
Peaceful international activists were left in shock and terror after Israeli settlers attacked them and Palestinian residents in the village of Abu Falah, northeast of Ramallah.
ज़ैद को पीट-पीट कर मार डालने वाले राहुल और उसके दोस्तों का अभी तक एनकाउंटर नहीं किया गया है। अभी तक हत्यारों के घरों पर बुलडोज़र नहीं चलाया गया है। @myogiadityanath की ज़ीरो टोलरेंस नीति यही है? यदि हत्यारे ‘दूसरे’ हों तो एनकाउंटर करा दो, बुलडोज़र चलवा दो पीड़ित को मुआवज़ा दे दो। लेकिन अगर पीड़ित ‘दूसरा’ हो तब? तब यह सब कार्रावाई क्यों नहीं होती? तब जीरो टोलरेंस नीति बदल जाती है?
हमारे नबी को गाली देती थी, दिन भर मुसलमानों को कोसती थी, अब जब भाजपा की तरफ से इस पर मुकदमा दर्ज हुआ तो इसकी टोन बदल गई।
यह हमारे नबी को गाली देती रहे और यह चाहती है कि मुसलमान इसकी तारीफ में कसीदे पढ़े..
इसकी गिरफ्तारी होनी ही चाहिए, इसका घर भी बुलडोज होना चाहिए...