चार जीव गेले…
आई-वडिलांनी मुलांना बाहेर पाठवलं असेल, कुणी कामावर निघालं असेल, क��णी घरी परतत असेल… पण त्यांचा मृत्यू अपघाताने नाही, तर भ्रष्टाचाराने झाला.
नाशिकच्या रस्त्यांवरील खड्डे हे पावसाने पडलेले नाहीत. ते अफाट भ्रष्टाचाराने, निकृष्ट कामांनी आणि सत्ताधाऱ्यांच्या बेफिकीरीने तयार झालेले मृत्यूचे सापळे आहेत.
या चार मृत्यूंची जबाबदारी कोण घेणार?
पालकमंत्री गिरीश महाजन, नाशिकमध्ये रस्त्यांच्या कामांमध्ये झालेल्या अफाट भ्रष्टाचाराची आणि त्यातून निर्माण झालेल्या या जीवघेण्या परिस्थितीची नैतिक आणि राजकीय जबाबदारी तुमच्यावर आहे. चार कुटुंबं उद्ध्वस्त झाली आहेत.
जोपर्यंत भ्रष्टाचारावर पांघरूण घातलं जात राहील, तोपर्यंत खड्डे भरले जाणार नाहीत.
हे चार मृत्यू अपघात नाहीत. हा भ्रष्ट���चाराने घेतलेला बळी आहे. आणि या प्रत्येक बळीचा हिशेब जनतेसमोर द्यावाच लागेल.
@girishdmahajan
MPSC पेपरफुटी प्रकरणाचे आका देवेंद्र फडणवीसच?
MPSC (अन्न व औषध निरीक्षक भरती) पेपरफुटीचे धागेदोरे हे आता पुणे महापौर कार्यालयापर्यंत पोहोचले असल्याचे समोर येत आहे. विशेष म्हणजे या प्रकरणात मुख्यमंत्र्यांचे माजी पीए आणि आता भाजप आमदार असलेले अभिमन्यू पवार यांच्याकडे संशयाची सुई वळत असल्याची चर्चा आहे. फडणवीस मुख्यमंत्री असताना २०१७-१८ मधील महाभरती पोर्टल घोटाळ्यासह त्यांच्या मुख्यमंत्रीपदाच्या कार्यकाळात झालेली तलाठी भरती - २०२३, म्हाडा, पोलीस भरती, वनविभाग भरती, मृद व जलसंधारण विभाग भरती आणि आताच्या अन्न व औषध निरीक्षक भरती घोटाळा प्रकरणाची निष्पक्ष चौकशी होणे अत्यंत आवश्यक आहे. राज्यातील लाखो विद्यार्थ्यांच्या आणि त्यांच्या कुटुंबियांच्या स्वप्नांची राखरांगोळी करणाऱ्या आणि भविष्याशी क्रूर खेळ करणाऱ्यांना ���घडे पाडल्याशिवाय काँग्रेस पक्ष स्वस्थ बसणार नाही.
तूर्तास एवढेच….
#MPSC #MPSCPaperleak #MPSCExam #Druginspector
ये हमेशा से छात्रों के विरोध में रहे है,
छात्रों को इनका भी बहिष्कार करना चाहिए,
व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी की ज्ञान को वायरल कर रहे है,
सरकार से पूछा गया कि पुलेट गन व AK47 चलाने का आदेश किसने दिया तो उन्होंने बताने से मना कर दिया,
��िर सदन का वाकआउट कर दिया,
लेकिन अधूरी जानकारी से भ्रमित करना है इनको,
इनकी दर्द साफ झलक रहा है।
मेरे दोनो बच्चे अंदर है मै बाहर खडा हू!😲
मै कंपनी मे करोडो की सैलरी पर हू😳 हमने इतने दिनो से बच्चो को बैठे देखा था पर मन नही पिघला मगर कल जो देखा...ये धीटपना गलत है अब ज��तने बच्चे है उससे 3 गुना लोग आयेंगे क्योकि अभी तक बच्चे है अब उनके प��िजन आयेंगे बच्चो के लिए मुझे आना पडा उन्होने मुझे धिक्कारा
Youth of my country are fighting for their future . a movement like freedom struggle is brewing again . i will continue to empower this churning.. i will continue to hold their hands.. give them my strength and stand by them for their future. 💪💪 #justasking
आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है।
हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा।
हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया।
इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना था कि छा���्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है।
कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।”
यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी।
यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है?
हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है?
यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इस�� पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आ��्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है।
यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पन�� की जा सकती है।
सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे।
#JantarMantar
#StudentVoices
#Delhi
#NEET
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नवरा गेल्यावर तिसऱ्या दिवशी अजिबात संवैधानिक नसलेल्या पदाची शपथ घेणं लाजीरवाणं नाहीये.
आपला टुकार मुलगा राज्यसभेवर घुसवून त्या सभागृहाचं अवमूल्यन करणं लाजीरवाण��� नाहीये.
नवऱ्याची बेनामी संपत्ती आणि साम्राज्य जपण्यासाठी गुजरात आणि नागपूरच्या माफियांच्या दरबारात मांडलिक होणं लाजीरवाणे नाहीये.
आपण लिहून दिलेली असंबद्ध भाषणं वाचतो आणि त्यातले विचार रानोमाळ हरवलेले असतात हे लाजीरवाणे नाहीये.
भाजपने शिट्टी मारली की समाजमाध्यमावर लाळ गाळणाऱ्या पोस्ट टाकणं लाजीरवाणं नाहीये.
बिनविरोध निवडून येण्यासाठी भावनेचं दुकान मांडणं लाजीरवाणं नाहीये.
���हिला आरक्षणाच्या माध्यमातून गुजरातचे माफिया देशाची संघराज्य चौकट मोडीत काढताहेत हे कळण्याइतपत समज आपल्याला नाही आणि म्हणून किमान तोंड बंद ठेवावं हे आपल्याला कळत नाहीये हे लाजीरवाणे नाहीये.
आणि तुम्ही महाराष्ट्राच्या स्वयंघोषित पहिल्या कुटुंबाच्या वारस आहात.
सगळ्यात लाजीरवाणं हे आहे.
लवकरात लवकर तुमचं कौटुंबिक संस्थान बारामतीपासूनच खालसा व्हावं ��ा महाराष्ट्राला शुभेच्छा.
ज्या माणसाने तुमच्या वडिलांवर , मातोश्रीवर खालच्या पातळीवर टीका केली, सरकार मीच पाडलं अस गुर्मीत मिडियासमोर येऊन सांगितल
त्याच्या पोरीच्या बड���डेला एका Invitation वरून जाण्याची गरज होती का ?
वंदनीय हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे यांचे नातू आहात थोडी तरी आब राखा @AUThackeray
महाराष्ट्र में #गडरिया (धनगर) समाज दीपक भोरड़े जी की अगुवाई में पिछले 10 दिन से आंदोलन कर रहा है
इनका माँग है की धनगर समाज को आरक्षण मिले बीजेपी और मुख्यमंत्री @Dev_Fadnavis जी ने चुनाव में वादा किया था की धनगर समाज को आरक्���ण देंगे वादा निभाना चाहिए
धनगर समाज की एक ही पुकार ..
“आरक्षण हमारा अधिकार है, हम लेकर रहेंगे,
यह हमारी एकता, संघर्ष और स्वाभिमान की पहचान है।
अब समय आ गया है कि हर युवा, हर बुजुर्ग, हर समाजसेवी
एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाए।
23 मार्च – एक दिन नहीं, आंदोलन की पहचान बनेगा।
जब हजारों कदम एक साथ बढ़ेंगे,
AAP MP राघव चड्ढा ने कहा, "आज मैंने सदन में प्रीपेड रिचार्ज कराकर अपना फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं का मुद्दा उठाया। जब रिचार्ज की वैद्यता समाप्त हो जाती है तब आउटगोइंग कॉल का बंद होना समझ आता है लेकिन इनकमिंग कॉल भी उसके साथ बंद कर देना उ��ित नहीं है। ये टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी है जिस पर रोक लगनी चाहिए... मैंने मांग रखी कि कम से कम 1 साल तक इनकमिंग कॉल चालू रहनी चाहिए ताकि देश का आम आदमी राइट टू कम्युनिकेशन सरेंडर ना करें..."
#RaghavChadha #AAP #PrepaidRecharge #Telecom
Breaking News या Bhakti News?
आजकल कई टीवी चैनलों के thumbnails देखकर लगता है कि खबर कम और narrative ज्यादा दिखाया जा रहा है।
हर international issue में भी "PM Modi ने फोन किया, मोदी ने ये किया, मोदी ने वो किया" जैसे thumbnails बनाकर TRP बटोरी जा रही है।
क्या यह सच में journalism है या thumbnail journalism?
आप क्या सोचते हैं?
यह पोस्ट thearjuntalks द्वारा साझा की गई है, जिसमें समाचार चैनलों द्वारा सनसनीखेज थंबनेल (thumbnails) के इस्तेमाल और पत्रकारिता के गिरते स्तर पर सवाल उठाए गए हैं।
सोर्स सोशल मीडिया
Credit Respected creator
भारत को रशिया से तेल ख़रीदने की इज़ाज़त देने वाला अमेरिका कौन होता है? भारत को अमेरिका से इज़ाज़त की क्यो ज़रूरत है?
पिछले कुछ महीनों में देशवासियों ने बहुत पीड़ा के साथ देखा है कि किस तरह एक के बाद एक, हर कदम पर आप ट्रम्प के सामने झुक गए और आपकी उसके सामने बोलने तक की हिम्मत नहीं हुई।
मोदी जी, आख़िर आपकी ऐसी कौन सी मजबूरी ह�� जिस की वजह से आप ट्रंप के सामने नतमस्तक हैं।
भारत हज़ारों वर्ष पुराना देश है। भारत 140 करोड़ लोगों का एक महान देश है। भारत ने एक से बढ़कर एक वीर योद्धा पैदा किये हैं। आज तक भारत ने किसी भी देश के सामने इस तरह सर नहीं झुकाया। आज तक भारतीय इतिहास में कभी भी भारत का नेतृत्व इतना कमजोर नहीं रहा।
अगर आपकी वाकई कोई ऐसी मजबूरी है जिसका फ़ायदा ट्रम्प उठा रहा है, तो भारत और ��ारतीय हितों की ख़ातिर, कृपया इस्तीफ़ा दे दीजिए। पर ऐसे भारत माँ का सर मत झुकाइए। सभी देशवासियों को बेहद पीड़ा हो रही है।