आजकल नेताओं का नया सिलेबस है—
सवाल पूछो… गोदी मीडिया।
ज़्यादा सवाल पूछो… और भी गोदी मीडिया।
सरकार को घेरो… फिर भी गोदी मीडिया।
विपक्ष को घेरो… पक्का गोदी मीडिया।
खबर दिखाओ… गोदी मीडिया।
खबर न दिखाओ… गोदी मीडिया।
तथ्य रखो… गोदी मीडिया।
तथ्य पसंद न आएँ… डबल गोदी मीडिया।
अब रिपोर्टिंग नहीं, लेबल चलते हैं।
तर्क नहीं, ट्रेंड चलता है।
तथ्य नहीं, ठप्पा चलता है।
जिसे खबर से असहमति होती है, वह खबर का जवाब नहीं देता—सीधे पत्रकार पर “गोदी मीडिया” का स्टिकर चिपका देता है।
आलोचना कीजिए, सवाल पूछिए, बहस कीजिए… लेकिन हर असहमति का एक ही शब्दकोश होगा, तो सबसे पहले लोकतांत्रिक संवाद ही दम तोड़ देगा।
आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय
आदरणीय डीजीपी साहब
थानों में फरियादियों के साथ कैसा व्यवहार होता है और किस भाषा में बात की जाती है, इसकी बानगी भीलवाड़ा के बनेड़ा थाने का यह वीडियो है। आप लोगों को हो सकता है कि वीडियो देखे बिना भरोसा ही नहीं हो कि आपको तनकर सलूट करने वाले और फिर 90 डिग्री तक झुक कर नमस्कार करने वाले ये थानेदार लोग थानों में आने वाले गरीब लोगों के साथ कैसे पेश आते हैं।
हालांकि पुलिस, अफसरों और नेताओं की भाषा गरीब और कमजोर लोगों के लिए हमेशा ऐसी ही रही है। इस जमाने में तो तथाकथित शिक्षक भी हल्की भाषा बोलने की होड़ कर रहे हैं। लेकिन साहब, जब कोई गरीब आदमी थाने में आता है, तो उसका कॉन्फिडेंस खाकी वर्दी और रौबीला चेहरा देखकर वैसे ही 50% पर आ जाता है। ऊपर से जब थाने के लोग मां बहन की गालियां देकर बात करते हैं तो फिर हिम्मत पूरी ही जवाब दे जाती है। ये थाने गरीबों और पीड़ितों की सुनवाई के लिए होने चाहिए। उल्टा हो रहा है।
साहेबान, वक्त बदल गया है। सरकारें 80 साल में भी गरीब आदमी को एंपावर नहीं कर पाई लेकिन ये जो कैमरा वाले फोन आए हैं, इन्होंने कमजोर लोगों को भी कुछ ताकत दी है। जरूरी नहीं है कि ये लोग कोई बहुत अच्छे वीडियो बना पाएं लेकिन जितना बन पाते हैं, व्यवस्था को नंगा करने के लिए काफी है। सुधार की जरूरत आप लोगों को है। कितना कर पाते हैं, यह आपके ऊपर ही है।
फिलहाल हम इस मामले में सख्त कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।
@Bhilwara_Police@PoliceRajasthan@BhajanlalBjp@Rajeev_ips
(कृपया हेडफोन लगाकर ही सुनें। वरना अचानक से आवाज कम करने या एग्जिट बटन दबाने की नौबत आ सकती है)
वैसे मंत्री जी की गाड़ी , सरकारी घर , और कमरे का एसी १ मिनट के लिए भी बंद नहीं होता होगा —लेकिन पुलिस कर्मी ने तपती गर्मी में गाड़ी में एसी चलाकर बैठ जाने का इतना बड़ा दुस्साहस किया है कि उसको ज़लील तो सबके सामने ही करना पड़ा !
तस्वीरें राजस्थान के हनुमानगढ़ से
सड़क पर चलती महिलाएं भी सुरक्षित नहीं! हनुमानगढ़ में बाइक सवार की शर्मनाक हरकत ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर खड़े किए गंभीर सवाल।
*यूथ फेस्ट नहीं, परफॉर्मर्स का अपमान... करोड़ों का घोटाला! 🛑*
राजस्थान विश्वविद्यालय के 'यूथ फेस्टिवल' की कड़वी सच्चाई आपके सामने है। एक तरफ करोड़ों का बजट, और दूसरी तरफ यह बदहाली!
*प्रशासन से हमारे सीधे सवाल:*
*करोड़ों का बजट, पर व्यवस्था शून्य?* : यूथ फेस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये आते हैं, लेकिन धरातल पर न कोई टेंट है, न बैठने की जगह और न ही कोई बुनियादी इंतजाम। आखिर यह पैसा कहाँ खर्च किया जा रहा है?
*बिना दर्शक कैसा उत्सव?:* कार्यक्रम का कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। आम छात्र को खबर तक नहीं कि कैंपस में उत्सव चल रहा है। जब कार्यक्रम में छात्र ही नहीं, तो यह आयोजन किसके लिए? क्या सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति करने के लिए यह नाटक रचा गया?
*परफॉर्मर्स का अपमान:* हमारे विश्वविद्यालय के प्रतिभावान छात्र बिना किसी ऑडियंस के, बिना किसी हौसलाअफजाई के परफॉर्म करने को मजबूर हैं। कलाकारों के लिए इससे बड़ा अपमान और क्या होगा कि उन्हें देखने वाला कोई नहीं, बस जज बैठे हैं। क्या हमारे कलाकारों की मेहनत की कोई कीमत नहीं?
*गुपचुप आयोजन की साजिश:* बिना टेंट, बिना पोस्टर और बिना छात्र भागीदारी के यह कार्यक्रम करवाकर छात्रों के साथ छलावा किया जा रहा है।
मैं, *शुभम रेवाड़,* राजस्थान विश्वविद्यालय का छात्र प्रतिनिधि, प्रशासन से यह जवाब चाहता हूँ कि छात्रों और इन कलाकारों की गरिमा के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों किया गया? हम अपनी यूनिवर्सिटी के कलाकारों का अपमान और छात्रों के अधिकारों की अनदेखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे! 📢
राजनीति अक्सर बड़े मंचों और भाषणों तक सीमित दिखाई देती है, लेकिन असली नेतृत्व वही होता है जो ज़मीन पर लोगों के दर्द को समझे और तुरंत कदम उठाए।@DrSatishPoonia@OfficeOfDrSP@Deep_samota
तेजाजी महाराज के दरबार पहुंचे राजकुमार परसावल ! क्या राजकुमार परसावल सबका समीकरण बिगाड़ने की रणनीति बना रहे है ?
राजस्थान की सियासत में आस्था और राजनीति का रिश्ता हमेशा खास रहा है। वीर तेजाजी महाराज का आशीर्वाद कई नेताओं के लिए शक्ति का प्रतीक माना जाता है, और Hanuman Beniwal के साथ भी यह जुड़ाव अक्सर चर्चा में रहा है ।
अब यूथ कांग्रेस चुनावों के बीच शेखावाटी में शक्ति प्रदर्शन के बाद राजकुमार परसावल का तेजाजी महाराज के दरबार पहुंचना सियासी हलकों में नई चर्चा का विषय बन गया है । परसावल खुद को तेजाजी का बड़ा भक्त मानते हैं और इस आस्था के जरिए वे युवाओं के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव भी स्थापित करते नजर आ रहे हैं ।
खास बात यह भी है कि इससे पहले परसावल Hanuman Beniwal से भी मुलाकात कर चुके हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि सियासी संकेतों के तौर पर भी देख रहे हैं।
क्या यह कदम शेखावाटी और जाट समुदाय के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करने की रणनीति है?
या फिर यह सिर्फ व्यक्तिगत आस्था का प्रदर्शन है?
फिलहाल इतना तय है - राजकुमार परसावल अब हर मोर्चे पर सक्रिय नजर आ रहे हैं
जनसमर्थन, राजनीतिक संपर्क और धार्मिक आस्था-तीनों के जरिए वे अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह “आस्था + सियासत” का मेल उन्हें चुनावी बढ़त दिला पाता है, या फिर यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक संदेश बनकर रह जाएगा…
@RajkumarParswal #YouthCongress
झूट फरेब धोखे और किसी का नाम यूज करने से जिंदगी में उठाव नहीं आता
उबाल लाना पड़ता है मेहनत की तपिश से उसके बाद ज़िन्दगी में चार चाँद लगते है वैसे लंबी लंबी हांकना भारी पड गया
खैर सुबह बधाई देने वाले लोग शाम होते होते फोटो भी डिलीट करने में लगे हुए है
कैंटीन का ताला, छात्रों का निवाला! ☕✊
राजस्थान विश्वविद्यालय के हमारे साथी छात्र पिछले काफी समय से कैंटीन बंद होने के कारण परेशान हैं। दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कैंटीन सिर्फ खाना-पीना नहीं, बल्कि एक बुनियादी जरूरत है।
प्रशासन की इस कुंभकर्णी नींद को तोड़ने के लिए आज हमने एक सांकेतिक विरोध (Symbolic Protest) किया। मैंने खुद चाय बनाकर छात्रों को पिलाई और यह संदेश दिया कि अगर प्रशासन बुनियादी सुविधाएँ नहीं दे सकता, तो छात्र खुद अपना हक लड़कर लेना जानते हैं।
आज की यह 'चाय' कुलपति (VC) महोदय के लिए एक चेतावनी भी है और छात्रों के लिए मेरा समर्थन भी। हम मांग करते हैं कि कैंटीन को तुरंत प्रभाव से सुचारू रूप से शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को हो रही असुविधा का अंत हो सके।
जब तक हक नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा!
@arvindchotia@Rajsthanikaka
कमजोर दिल वाले इसे नहीं देखें
रावतभाटा में नगर पालिका द्वारा दुकान हटाते समय एक पिता के पांव पकड़े पांच साल का बच्चा रोता रहा लेकिन पुलिस वालों की दादागिरी खत्म ही नहीं हो रही