यूपी की कानून व्यवस्था की तस्वीर को रोज़ देखिए।
शामली में अंकित बालियान के साथ जो हुआ है, वो कोई अचंभा नहीं है।
टांग में गोली मारकर फर्जी हॉफ एनकाउंटर करना,
अपने आका को खुश करने के लिए पत्रकार के घर रात में रेड करना,
उस ��र झूठे मुकदमे गढ़ना,
किसी गरीब का घर बुलडोजर से ढहा देने में जी जान से जुट जाना,
कोडीन कफ सिरप के राजा के सजातीय अपराधियों के आगे हाथ-पैर जोड़कर दंडवत हो जाना,
कानून-व्यवस्था के नाम पर गैंगवार लड़ना।
एक गैंग का सफाया करना और दूसरे गैंग को खुला संरक्षण देना।
इस दौर की पुलिस व्यवस्था पर इतिहास के सबसे गहरे और दागदार सवाल हैं।
सुप्रीम कोर्ट इस प्रदेश की कानून व्यवस्था पर यहां तक टिप्पणी क�� चुका है कि- "Complete breakdown of the law and order machinery in the State."
यूपी पुलिस इस दौर में अपनी गिरावट का ऐसा इतिहास रच रही है जो न भूतो है और न भविष्यत।
अधिकारी इस कदर उन्मत्त हो गए हैं कि नियति के मूलभूत सिद्धांत को ही भूल गए हैं कि भ्रष्टाचार व अहंकार के शिखर पर बैठे राजा का महापतन तय है,
और राजा को खुश करने के लिए संविधान की मर्यादा तार तार कर रहे इन महाभ्रष्ट अधिकारियों का नाम भी नियति अपनी किताब में दर्ज करती जा रही है।
पाप की डूबती हुई कश्ती में सवार कोई भी यात्री ये कहकर नहीं बच सकता कि हम तो मजबूर थे!
जो पाप की गठरी के अकूत भ्रष्टाचार से अपना घर-परिवार भरने में मजबूर नहीं थे,
वे पाप की इस गठर�� का परिणाम उठाने में मजबूर कैसे हो सकते हैं!!