पैसा, वर्ण, इज़्ज़त, नौकरी और जाति को देखकर विवाह करने वाला समाज फिर किस मुँह से कह यह देता है कि जोडियाँ ईश्वर ने बनाईं हैं।
~ सत्यव्रत रजक
@Satyavrat_R
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
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कि ये बदन ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव है मेरी ख़ातिर
ये होंठ और ये बाँहें मेरी अमानत हैं
#drhariomias
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