बाजार खाला, खाकी लाचार, अपराधियों की बहार!
क्षेत्र में गुंडाराज चरम पर, अपराधियों का बाजार बना बाजार खाला,
संवाददाता @saif35748 साबरी,
#राजधानी_लखनऊ का #थाना_बाजार_खाला अब पुलिसिंग का इलाका कम और अपराधियों के लिए मनमर्जी का सस्ता बाजार ज्यादा लगने लगा है, जहां कानून और सुरक्षा कौड़ियों के भाव बिक चुके हैं। ऐशबाग ईदगाह के पास पीली कॉलोनी में दिनदहाड़े पति शाहिद ने पत्नी का धारदार हथियार से सरेआम गला रेत दिया। दीवारों पर बिखरे खून के लाल छींटे साफ-साफ गवाही दे रहे हैं कि इस इलाके में अपराधियों को खाकी का कितना जबरदस्त खौफ है।
वैसे इस इलाके के लिए यह कोई नई बात नहीं है। बाजार खाला थाना क्षेत्र में हत्या, सरेआम गोलीबारी और बमबारी होना अब उतना ही आम हो चुका है जितना कि बाजारों में बंपर सेल। स्थानीय लोग अभी पिछले कुछ समय में हुई ताबड़तोड़ वारदातों, आपसी रंजिश में चली गोलियों और दहशत फैलाने के लिए फेंके गए बमों के खौफ से सो भी नहीं पाए थे कि इस तीसरे बड़े कांड ने कानून-व्यवस्था का बचा-खुचा जनाजा भी निकाल दिया। रात की नींद तो छोड़िए, अब दिन के उजाले में भी जनता डर के मारे जाग रही है। अपराधियों ने इस पूरे थाना क्षेत्र को अपनी मनमर्जी की लैबोरेट्री बना लिया है, जहां वे जब चाहें, जैसे चाहें, अपराध का नया एक्सपेरिमेंट कर डालते हैं।
और हमारी मुस्तैद पुलिस का ढर्रा तो हमेशा की तरह लाजवाब है। जब वारदात पूरी हो गई, तमाशबीनों की भीड़ लग गई और लहूलुहान चांदनी ने दम तोड़ दिया, तब जाकर महकमे की कुंभकर्णी नींद खुली। इसके बाद भारी-भरकम पुलिस बल और फोरेंसिक टीम के साथ बड़े अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लकीर पीटने और कागजी खानापूर्ति करने की रस्म बखूबी निभाई। फिलहाल, हमेशा की तरह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है, का पुराना और घिसा-पिटा राग अलापा जा रहा है, जबकि बेखौफ घूमते अपराधियों को देखकर जनता इस असमंजस में है कि अगली गोलीबारी या बमबारी का शिकार किसे बनना है। @LkoCp@lkopolice@Uppolice@LoJcp@Uppolice
मुस्कुराइए नहीं, दुआ कीजिए कि आप ज़िंदा हैं!
भाजपा नेता को सरेराह गोलियां, पुलिस की नाक के नीचे मच रहा है मौत का तांडव!*
सम्वाददाता: @saif35748 मोहम्मद सैफ साबरी
#लखनऊ। मुस्कुराइए कि अब आप उस लखनऊ में हैं जहाँ की फिजाओं में इत्र की खुशबू नहीं, बल्कि बारूद की गंध बसने लगी है। जिस शहर ने दुनिया को तहजीब का सलीका सिखाया, जहाँ गालियों की जगह भी अदब ने घेर रखी थी, आज उस नवाबी पहचान पर अपराधियों के जूतों के निशान साफ देखे जा सकते हैं। अब यहाँ सड़कों पर पहले आप की सदाएं नहीं, बल्कि कट्टों की तड़तड़ाहट सुनाई देती है।
ताजा मिसाल आज की ही ले लीजिए, जहाँ आपसी रंजिश के पुराने ड्रामे में भाजपा युवा मोर्चा के नेता चेतन को दो गोलियों का नजराना पेश कर दिया गया और वे ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए। यह कोई पहली बार नहीं है, इस साल की शुरुआत से ही लखनऊ के हर कोने से खौफ की ऐसी ही खबरें आ रही हैं। कभी रील बनाने के चक्कर में सरोजनी नगर में एक मासूम की जिंदगी का द एंड हो जाता है, तो कभी आशियाना में शिक्षा के बोझ तले दबा बेटा अपने ही बाप के वजूद के टुकड़े-टुकड़े कर देता है। गोमती नगर के सामुदायिक केंद्रों में अब शादियां तब तक मुकम्मल नहीं मानी जातीं, जब तक हर्ष फायरिंग में किसी बेगुनाह का सीना छलनी न हो जाए।
आज के लखनऊ में किसी इंसान की जान की कीमत सड़क किनारे उगे घास-फूस से ज्यादा नहीं रह गई है, जब चाहा, जिसे चाहा, साफ कर दिया। अपराधी इतने बेखौफ हैं मानो उन्हें पुलिस कमिश्नरी का डर नहीं, बल्कि आशीर्वाद प्राप्त हो। पुलिस की मुस्तैदी का आलम यह है कि शहर में बम और बारूद का रमसा मचा हुआ है और खाकी शायद किसी गहरी नींद में नफासत के ख्वाब देख रही है। जिस राजधानी में कभी सालों तक सन्नाटा रहता था, वहां अब हर रोज गोलियों का शोर एक नया रिवाज बन गया है।
अदब और तमीज के इस मरते हुए शहर को देखकर बस यही कहने का दिल करता है कि अब यहाँ जान बचाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। प्रशासन शायद भूल गया है कि लखनऊ सिर्फ नक्शे पर एक शहर नहीं, एक संस्कृति थी, जिसे आज अपराधियों ने अपनी सनक की भेंट चढ़ा दिया है। अब मुस्कुराना छोड़िए और दुआ कीजिए कि अगली गोली की बारी आपकी न हो।
@Aazad45998220@Uppolice@lkopolice@dgpup@UpforestUp यह घटना सरकारी तंत्र के नैतिक पतन को दर्शाती है। जब एक थाना प्रभारी जो अपने पद की शपथ लेता है, कानून की रक्षा करने के बजाय स्वयं अवैध पेड़ कटाई जैसे जघन्य अपराध में शामिल हो जाता है, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं रहता, यह लोक विश्वास का आपराधिक हनन है।