फ़तेहपुर (उत्तर प्रदेश) में विद्यार्थियों ने अपने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की माँग को लेकर लोकतांत्रिक ढंग से आवाज़ उठाई। लेकिन अब ख़बरें आ रही हैं कि आंदोलन के बाद पुलिस छात्रों के घर-घर जाकर उनसे पूछताछ और दबाव बना रही है।
अगर छात्र अपने ही स्कूल में बेहतर कक्षाएँ, शौचालय, पेयजल, शिक्षक और अन्य बुनियादी सुविधाओं की माँग भी नहीं कर सकते, तो फिर लोकतांत्रिक अधिकारों का अर्थ क्या रह जाता है? सवाल उठाने वाले विद्यार्थियों को प्रताड़ित करना किसी भी संवेदनशील और न्यायप्रिय व्यवस्था की पहचान नहीं हो सकती।
सरकार और प्रशासन को छात्रों की आवाज़ दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। शिक्षा के अधिकार की माँग करने वाले विद्यार्थियों को डराना नहीं, उनका भविष्य सुरक्षित करना राज्य की ज़िम्मेदारी है।
महोदय @dgpup साहब @Uppolice इस जॉम्बी के खिलाफ कार्रावाई क्यों नहीं करती? क्या पुलिस इससे डरती है? क्या ये कानून से ऊपर है?
महोदय @uttarakhandcops इस जॉम्बी के खिलाफ कार्रावाई क्यों नहीं करती? क्या पुलिस इससे डरती है? क्या ये कानून से ऊपर है?
महोदय @CPDelhi साहब @DelhiPolice इस जॉम्बी के खिलाफ कार्रावाई क्यों नहीं करती? क्या पुलिस इससे डरती है? क्या ये कानून से ऊपर है?
Location: Saptari, Madhesh Province, Nepal
These are not children, they are terror!sts.
A Hindutva mob attacked a mosque, vandalizing it and pelting stones.
दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है।
इस दुनिया में इंसान कितना दुख झेल रहा है।
भगवान की कृपा से हम में से ज़्यादातर लोग ऐसे दुखों से बहुत दूर हैं। फिर भी हम अक्सर भगवान से शिकायत करते रहते हैं।
असल में इंसान अपने दुख से उतना परेशान नहीं होता, जितना दूसरों की खुशी देखकर हो जाता है।
अब इस मामले को ही देख लीजिए।
इंदौर में "महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी" के नाम से एक वृद्ध आश्रम चल रहा है। वहाँ एक नाबालिग लड़का अक्सर बुजुर्गों के साथ मारपीट करता है और बेचारों के पास सब कुछ सहने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
क्या आप कभी सोच सकते हैं कि अपने ही जीवन में ऐसा दुख झेलना पड़े, जैसा ये बेबस बुजुर्ग झेल रहे हैं?
इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए, ताकि इस नालायक को उसके किए की सज़ा मिल सके।
11 Muslim men spent years behind bars.
Their homes were bulldozed before the trial even began.
Now the court says the police failed to prove a single charge.
Watch this video.
Then drown in shame. Video coutesy @TheQuint@vishnukant_7
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2
आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।
यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार @harshdelhise ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है।
छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
@DelhiPolice और RAF ने जो किया वह गृह मंत्री @AmitShah के आदेश से किया!
The students will hold you to account for the anti-Muslim, anti-Dalit witch hunt that you are carrying out, and for firing pellets and bullets at peacefully protesting youth of this country.