NEET की तैयारी कर रहे होनहार बेटे से मिलने एक दिन मां बाप उसके हॉस्टल पहुंचे
तो वहां का खाना देख उनके होश उड़ गए
गरीब माँ बाप दिन-रात मेहनत करके अपने बेटे को अच्छी पढ़ाई के लिए हॉस्टल भेजते हैं और
खाने-पीने के लिए हर महीने ₹15000 तक इसलिए देते हैं ताकि बच्चा वहां ठीक से स्वस्थ रह सके
लेकिन सोचिये जिन माता-पिता की अपनी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो वो
अपने बच्चे के भविष्य के लिए रुपये जोड़कर भेज रहे हैं और
बदले में बच्चों को ऐसा खाना मिल रहा हो तो उन पर क्या गुजरेगी
यदि कोई प्राइवेट हॉस्टल खाने के नाम पर ₹15000 से ₹17000 महीने लेता हो तो
कम से कम खाना साफ-सुथरा पौष्टिक और खाने योग्य तो होना ही चाहिए
बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बिल्कुल नहीं होना चाहिए
ऐसे मामलों में हॉस्टल मैनेजर की उत्तरदायित्व हर हालत में तय होना चाहिए!
इनसे मिलिए ये हैं रमेश कुमार
फतेहपुर में इनकी ये छोटी सी दुकान है लेकिन हाथ का हुनर ऐसा है कि देर रात तक यहां एक तरफ सफर करने वालों की जितनी टिकिट नहीं कटती
उससे ज्यादा ये लोगों के बाल काट देते हैं। मैंने यहां अपनी बस के इंतजार में 1 घंटा बिताया और देखा कि इनकी कुर्सी खाली नहीं हुई।
ये भी देखा कि लगातार मेहनत करते हुए इनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई।
एक शैव बनाने के ये 50 रुपए लेते हैं और एक घंटे में करीब 4 शैव बनाई।
मेरे हिसाब से अंदाजा है कि 1500 रोजाना के हिसाब से ये इस छोटे सी दुकान से करीब 40-45 हज़ार जरूर कमाते होंगे।
कहने का मतलब यह है कि काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता....लगन और मेहनत से काम किया जाए तो सफलता कदम चूमती है।
टीचर - बेटा पेंट क्यों फटी हे
स्टूडेंट- पेंशन के पैसे आने तब लाने
टीचर - पापा क्या करते हे
स्टूडेंट - पापा मर गए 😞
टीचर - उदास होते हुवे, बेटा मम्मी क्या लेती
स्टूडेंट - मम्मी भी मर गई 😢
जिंदगी सबके लिए समान नहीं होती, सबको अपनी पीड़ा दुखदाई लगती लेकिन आपसे भी कठिन जीवन कोई जी रहा
याद रखें हतास होने से कुछ नहीं होना जिंदगी का नाम चलना हे और ये प्यारा नन्हा बच्चा एक उधारण ✍️
तमिलनाडु में कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला,जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। किसी को भनक तक नहीं थी,कोई VIP सायरन नहीं, कोई पहले से तय काफिला नहीं और अचानक मुख्यमंत्री थलापति विजय सीधे एक स्थानीय पुलिस थाने के SHO के सामने खड़े हो गए!
जैसे ही SHO साहब और थाने के बाकी स्टाफ ने सामने अपने मुख्यमंत्री को खड़े देखा, सब दंग रह गए। थाने का रजिस्टर चेक हुआ, आम जनता की शिकायतों की स्थिति देखी गई और साफ संदेश दिया गया की जनता की सेवा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
बिना पूर्व सूचना निरीक्षण जब सिस्टम को यह पता ही न हो कि सीएम कब, कहां और किस दफ्तर में औचक निरीक्षण के लिए पहुंच जाएंगे, तो लापरवाही अपने आप जड़ से खत्म हो जाती है।
एक सच्चे नेता की यही पहचान होती है कि वह जनता का सेवक बनकर रहे, न कि सिर्फ AC कमरों का हुक्मरान। जब नेतृत्व खुद मैदान में डट जाता है, तो जनता का भरोसा लोकतंत्र पर और ज्यादा गहरा हो जाता है।
हर राज्य को ऐसे ही साहसी, सक्रिय और जमीनी नेतृत्व की जरूरत है ताकि सरकारी तंत्र जनता के लिए काम करे,न कि जनता सिस्टम के चक्कर काटे।
यह है डॉ. शिरीन सुबैर (Dr. Shirin Subair), केरल, कन्नूर की एक डॉक्टर, जो अपनी शादी के दिन सेवा भाव और इंसानियत के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं l
पैनूर मे डॉ. शिरीन की शादी का रिसेप्शन चल रहा था, वह भारी-भरकम दुल्हन के लिबास, गहनों और मेकअप में सजी हुई थीं,
तभी अचानक शादी में भोजन परोसने वाली कैटरिंग टीम की दो महिला कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार हो गईं,
महिला की नाक से तेजी से खून बहने लगा, जिससे शादी के पंडाल में अफरा-तफरी मच गई,
शिरीन अपनी शादी की रस्मों को बीच में छोड़कर तुरंत मरीजों की तरफ दौड़ पड़ीं,
उन्होंने किसी भी चीज की परवाह न करते हुए ज़मीन पर बैठकर दोनों महिलाओं को तुरंत मेडिकल फर्स्ट-एड दी,
अस्पताल ले जाने से पहले डॉ. शिरीन ने दोनों महिलाओं की स्थिति को पूरी तरह स्थिर कर दिया,
उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं,
असली हीरो सुपरहीरो वाले केप में नहीं, बल्कि कभी-कभी दुल्हन के जोड़े में भी आते हैं l
कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि राहुल गांधी बदल रहे हैं, कुछ कह रहे हैं कि उनकी राजनीति बदल रही है, कुछ कह रहे हैं कि उनका तरीक़ा बदल रहा है। मैं कहूंगा कि असल में, समय बदल रहा है।
जो राहुल गांधी को जानते हैं, करीब से देखते हैं, वे जानते हैं कि वे 20 साल पहले से वैसी ही राजनीति कर रहे हैं। लोगों के बारे में, सरकार के बारे में, अपनी विचारधारा के बारे में वे जो 20 साल पहले बोल रहे थे, वही आज भी बोल रहे हैं।
वे पिछले दो दशक भी सबसे कमजोर लोगों के घर जाते थे, उनकी मदद करते थे, उनकी आवाज उठाते थे। वे आज भी वही कर रहे हैं।
फिर नया क्या है? नया ये है कि लोगों की आंख पर पड़ा पर्दा हट रहा है। यह पर्दा कुटिल राजनीति और कॉर्पोरेट के घृणित गठजोड़ का नतीजा था। राहुल गांधी को अगंभीर साबित करने के लिए सैकड़ों हजारों करोड़ रुपए फूंक दिए गए। एक हाहाकारी प्राचारतंत्र तैयार किया गया।
राहुल गांधी इसके आगे डिगे नहीं। वे जमे रहे। वे सरकार की नाकामियों और मूर्खताओं को लेकर भविष्यवाणी करते रहे और वे भविष्यवाणियां सच साबित होती रहीं।
आज सौ के आसपास पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं की बर्बादी के बोझ से दबी एक भ्रष्ट सरकार बैकफुट पर है। सरकार में बैठे लोग अभी तक उनका मजाक उड़ाते थे, अब उन्हें राहुल गांधी की बातों को, मांगों को स्वीकार करना पड़ रहा है। सरकार की साख, सरकार का इकबाल खत्म हो गया है। वह पूरी तरह जनविरोधी साबित हो चुकी है।
देश के युवा सारा तमाशा देख रहे हैं और यह भी समझ रहे हैं कि उनके भविष्य के लिए क्या बेहतर है। लोगों की सोच बदल रही है और इसलिए समय भी करवट ले रहा है।
नरेंद्र मोदी से देश की जनता का मोह भंग हो चुका है और अब लोग उम्मीद से राहुल गांधी की ओर देख रहे हैं।
मिलिए तुकाराम मुंढे सर से।
मई 2026 में, वे महाराष्ट्र के FDA कमिश्नर बने।
तब से, हर जगह सख़्त कार्रवाई हुई है:
• 904 छापे • 457 गिरफ्तारियां • 322 प्रतिष्ठान सील किए गए • ₹34.7 करोड़ का स्टॉक ज़ब्त किया गया • 42 गाड़ियां ज़ब्त की गईं
और निशाने पर कौन था?
गुटखा और पान मसाला। मिलावटी दूध, पनीर, तेल, घी और मसाले।
IIT-बॉम्बे की कैंटीन। मुंबई के बड़े क्लब। K. Rustom। Blinkit। Reliance Retail। होटल और रेस्टोरेंट।
और यह सिर्फ़ महाराष्ट्र की समस्या नहीं है।
खाने में मिलावट एक राष्ट्रीय समस्या है।
इन्हें @fssaiindia का CEO बनाइए।
पूरे भारत को सुरक्षित बनाइए। 🇮🇳
इस ताऊ को हल्के में लेने कर भूल मत करना, इनके पास एक अदभुद शक्ति है, जिस कारण इन्हें युगों युगों तक याद किया जाएगा...
चलो अब इनकी कुछ विशेषता के बारे में बताता हूं, इनके पास 23 बीघा जमीन है, जिसका इस्तेमाल ये खेती के लिए नहीं, आर्केस्ट्रा डांस देखने के लिए करते हैं...
जब इनके पास पैसे खत्म हो जाते है, तब ये दो बीघा जमीन को चटका देते हैं...
इनके इलाके में ऐसी कोई आर्केस्ट्रा डांसर नहीं है, जिसको ये सोने की चैन गिफ्ट में ना दिए हो...
क्या आप इस ताऊ की तारीफ में दो शब्द नहीं कहेंगे...??
अगर हमने जल्द से जल्द इस बच्चे की माँग पर विचार नहीं किया, तो इतिहास हमें कभी माफ़ नहीं करेगा।
जिस महत्वपूर्ण विषय की ओर इस बच्चे ने हमारा ध्यान दिलाया है, सच तो यह है कि संविधान निर्माण के बाद ही हमें इसके लिए एक संवैधानिक संशोधन विधेयक लाना चाहिए था l जिसमें हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस माँग की अनिवार्य समीक्षा का प्रावधान होता।
लेकिन स्वतंत्रता के 80 साल बाद भी हम इस दिशा में कुछ नहीं कर पाए। न जाने कितने मासूमों की आँखें इसी इंतज़ार में सूख गईं। हम सब सामूहिक रूप से इसके दोषी हैं।और माँग भी ऐसी कोई असंभव माँग नहीं है।
इस बच्चे का कहना है कि स्वतंत्रता के 80 साल बाद भी स्वतंत्रता दिवस पर हमें सिर्फ दो लड्डू ही क्यों मिलते हैं ?
अगर लोग हमारे बारे में सोचते, हमारी भावनाओं का सम्मान करते और हर स्वतंत्रता दिवस पर सिर्फ एक-एक लड्डू बढ़ाते जाते, तो आज हमें 80 लड्डू मिल रहे होते।
और अगर 80 लड्डू देना सरकारों को भारी लगता था, तो कम से कम एक काजू कतली का पैकेट तो दिया ही जा सकता था l
यह वास्तव में सिर्फ दो लड्डुओं का सवाल नहीं है। यह उस पीढ़ी का सवाल है जिसने 80 साल तक इंतज़ार किया है।
इसलिए अब समय आ गया है कि संसद गंभीरता से विचार करे l अगले स्वतंत्रता दिवस पर दो लड्डू होंगे, चार होंगे, या फिर आखिरकार हर बच्चे के हिस्से में एक काजू कतली का पैकेट आएगा?
इतिहास सबकुछ देख रहा है। इस महत्वपूर्ण विषय पर हमारी चुप्पी इतिहास में लिखी जाएगी l
मैं तो इनका फैन हो गया हूं।
अफसर हो तो ऐसा जो लोगों की नाक में दम कर दे और खुली चुनौती दे भले से ट्रांसफर क्यों न हो जाए।
महाराष्ट्र में इन दिनों तुकाराम मुंडे ने FDA के साथ मिलकर फूड सेक्टर वालों की नींदे उड़ा रखी हैं।
आज फिर उन्होंने मुंबई के चेम्बूर में पारले एग्रो के एक गोदाम पर छापा मारा और एक्सपायर्ड फ्रूटी, एपी फिज और कैंडी जूस बरामद करके गोदाम का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।
कल उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि
"कोई भी माई का लाल मुझे घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता है अगर कोई सोच रहा है तो पहले वो जाकर 100 बार सोचे। मैं अपने हिसाब से काम करने वाला व्यक्ति हूं।"
अगर प्रदेश में ऐसे काम करने वाले अफसर हों तो भ्रष्टाचार पनप ही नहीं सकता है।
ये ऐश्वर्या है - BJP विधायक बी. सुरेश गौड़ा की बेटी
12 अगस्त को ऐश्वर्या मंदिर में दर्शन के लिए गई. यहां एक महिला सब-इंस्पेक्टर तैनात थी.
ऐश्वर्या को फुल VIP ट्रीटमेंट चाहिए था. उसने महिला सब-इंस्पेक्टर से कहा- मुझे गर्भगृह में ले चलो, सब-इंस्पेक्टर ने मना किया.
फिर ऐश्वर्या भड़क गई. उसने बताया कि पापा विधायक हैं हमारे.
लेकिन महिला सब-इंस्पेक्टर ने लोड ही नहीं लिया. वो अपने नियम कायदे से चलने की बात कर रही थी.
ऐश्वर्या को बर्दाश्त नहीं हुआ कि एक सब-इंस्पेक्टर ऐसे कैसे बात कर सकती है. ऐश्वर्या ने महिला सब-इंस्पेक्टर को कई थप्पड़ मार दिए.
अब महिला सब-इंस्पेक्टर ने FIR लिखवा दी है, लेकिन अब तक विधायक की बिटिया रानी गिरफ्तार नहीं हुई है.
विधायक जी ने अपनी बेटी की हरकत के लिए माफी मांगी है.