राजस्थान में रोस्टर एक भयंकर कैंसर बीमारी का रूप ले चुका है जो अंतिम स्टेज पर है। इस वजह से ओबीसी आरक्षण को 21% से खत्म करके 1-7% पर ला दिया है।
ओबीसी नेता कुम्भकरण की नींद सो रहे हैं।
युवा भी सो रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार ओबीसी के युवा है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ नही सकते
राजस्थान में रोस्टर प्रणाली के नाम पर OBC एवं आरक्षित वर्गों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
पहले LDC भर्ती में 21% की जगह 14% और आज विद्युत विभाग की LDC भर्ती में फिर से ओबीसी को 1% से भी कम मात्र .25% आरक्षण दिया गया हैं।
OBC वालों तुम सोते रहेंगे तो यदि होगा।
एलडीसी भर्ती 2026 में भी 500 पदों का नुक़सान OBC वर्ग को हुआ अगर ऐसा MBC,SC,STको हुआ होता तो अब तक सरकार को हिला देते परंतु OBC वर्ग सबसे निकम्मा है उनके साथ जो करो वो सही लेता है मैंने आवाज़ उठाई है जाग जाओ वरना सिर्फ जनरल कि सीटे ही बचेगी
@RajCMO@hanumanbeniwal
भजनलाल जी हर बार ही ओबीसी के साथ ये कुठारघात क्यों..!
ओबीसी वालो ने आपका क्या बिगाड़ा है जो हर बार हमारी पोस्टें खा जाते हो..!
Ews वालो के साथ तो कभी नहीं होता है ऐसा
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी कब तक OBC के साथ छलावा करते रहोगे? #OBC के भी लगभग नेता इस मामले पर मौन धारण रखते है आखिर क्यों? हर बार सरकार obc के युवाओं की पोस्ट निगल जाती है!
भजनलाल सरकार क्या इस आरक्षण को पूरा करने की जवाबदेही लेगी?
@RajCMO@ashokgehlot51@GovindDotasra
राजस्थान में रोस्टर प्रणाली के नाम पर OBC एवं आरक्षित वर्गों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं।पहले LDC भर्ती में 21% की जगह 14% और आज विद्युत विभाग की LDC भर्ती में फिर से ओबीसी को 1% से भी कम मात्र .25% आरक्षण दिया गया हैं। 765में (#केवल2पद)
@RajCMO@RajGovOfficial
राजस्थान में रोस्टर प्रणाली के नाम पर OBC एवं आरक्षित वर्गों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
पहले LDC भर्ती में 21% की जगह 14% और आज विद्युत विभाग की LDC भर्ती में फिर से ओबीसी को 1% से भी कम मात्र .25% आरक्षण दिया गया हैं।
OBC वालों तुम सोते रहेंगे तो यदि होगा।
“कभी-कभी इतिहास किसी बड़ी क्रांति से नहीं,
बल्कि एक छोटे से शब्द से बदलना शुरू होता है…”एक ऐसा शब्द…
जिसे लोग अपने घरों में भी पसंद नहीं करते — “कॉकरोच”।
लेकिन जब वही शब्द देश के मुख्य न्यायाधीश के मुख से निकला,
तो वह सिर्फ एक शब्द नहीं रहा…
वह लाखों युवाओं के भीतर दबे आक्रोश, निराशा और दर्द का प्रतीक बन गया।
सालों से बेरोजगार युवा संघर्ष कर रहे थे…
पेपर आउट होते रहे…
मेहनत करने वाले बच्चे टूटते रहे…
सरकारें आईं और गईं…
लेकिन उनके भविष्य को लेकर एक स्थायी भरोसा कभी नहीं बन पाया।
धीरे-धीरे यह frustration भीतर जमा होता गया…और फिर एक छोटी-सी घटना ने उसे आवाज़ दे लेकिन इतिहास हमें एक और बात भी सिखाता है
अन्ना हज़ारे आंदोलन भी कभी युवाओं की उम्मीद बना था।
लाखों लोगों ने सोचा था कि अब व्यवस्था बदलेगी।
लेकिन समय के साथ उसी आंदोलन से निकले चेहरे
अलग-अलग राजनीतिक दिशाओं में चले गए।
किसी ने पार्टी बनाई…
किसी ने सत्ता चुनी…
किसी ने समझौते किए…
इसलिए आज के युवाओं को सिर्फ भावुक नहीं,
समझदार भी बनना पड़ेगा।
क्योंकि भारत का युवा बहुत जल्दी उम्मीद पाल लेता है।
उसे लगता है—
“शायद अब कुछ बदल जाएगा…”
और उम्मीद होना गलत नहीं है।
लेकिन बिना समझ के किसी भी भीड़, चेहरे या आंदोलन का हिस्सा बन जाना
कई बार हमें किसी और की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का साधन भी बना सकता है।
फिर भी एक बात साफ दिखाई दे रही है
युवाओं के भीतर आक्रोश बहुत बड़ा है।
और जब किसी समाज में लंबे समय तक
सपनों, मेहनत और भविष्य का शोषण होता है,
तो वह कभी भी बड़ी सामाजिक या राजनीतिक क्रांति का रूप ले सकता है।
शायद यही आंदोलन सरकारों को यह समझाए कि
युवाओं के मुद्दे सिर्फ चुनावी भाषण नहीं,
बल्कि देश के भविष्य का प्रश्न हैं।
अब देखना यह होगा—
क्या यह आंदोलन सच में युवाओं के सपनों का प्रतीक बन पाएगा,
या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#leak
#कोकरोज_जनता_पार्टी
#cockroach
SI भर्ती 2021 में फॉर्म करेक्शन करने के लिए बिंदु संख्या 6 में प्रॉब्लम आ रही हैl
(बिंदु संख्या 6 प्रॉपर रूप से ओपन नहीं हो रहा ) इसका समाधान करें
@alokrajRSSB@RajGovOfficial
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
@ashokgehlot51
समाज गौरव – डॉ. लोकेश सैनी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले
डॉ. लोकेश सैनी (Associate Professor, Pediatric Neurology, AIIMS Jodhpur) को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई।
आपको OMR में नंबर बढ़ाकर चयन लेने वाला घोटाला याद है? सबसे बड़ा सवाल इस मुद्दे पर विपक्ष मौन क्यों है?
इन 38 लोगों की सूची जारी हुए अब लगभग तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है। OMR घोटाले में शामिल 38 लोगों के खिलाफ अब तक क्या कोई कार्रवाई हुई है? इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कुछ अहम सवाल खड़े होते हैं–
1.ये 38 लोग इस समय कहाँ हैं?
2.क्या ये अभी भी सरकारी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं?
3.अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने के बाद इन्हें जो वेतन मिला, क्या उसकी वसूली की गई है?
4.क्या इनमें से किसी की गिरफ्तारी हुई है?
क्या इन्होंने पूछताछ के दौरान किसी और का नाम उजागर किया है?
5.इस पूरे मामले पर सरकार अपना पक्ष रखेगी या विपक्ष इस पर सवाल उठाएगा?
यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे गंभीर विषय पर कोई भी पक्ष युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा होता दिखाई क्यों नहीं देता?