Meerut: Woman running a school gets her husband murdered because she loved the Bus Driver
Got her husband hit in accident but he survived
Then gave him sleeping pills & left a poisonous snake next to him which bit him and he died
This was a Love Marriage!!
#HusbandMurder
Months back I was wondering why I have never painted Lord Jagannath, and by his grace that same evening I received a request for this painting.
Moments like these make me feel closer to bhagwan, when I know prabhu is out there looking out for me.
Last pic before I was bombed by Pakistani army on 15th July 99.
Celebrating life's rebirth since than.
Btw, I was very happy with the fat rats eating even soaps & plastic mugs than the idiots eating each other on Social media now. 🤭
‘एथनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। ये ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, एथनॉल बनानेवालों और तेल कंपनियों की साझेदारी है।
एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं बता रही है कि इससे गाड़ियों की माइलेज गिरती है और गाड़ियाँ जल्दी ख़राब हो रही हैं, स्टार्टिंग की समस्या बढ़ गई है, कुल मिलाकर कम एवरेज की वजह से तेल ज़्यादा डलवाना पड़ रहा है, गाड़ियाँ बीच सड़क में धोखा दे रही हैं, जिससे मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ गई है, गाड़ी की रीसेल वैल्यू घट गयी है और ओवर ऑल लाइफ़ भी।
एथनॉल की वजह से ज़ंग और जंक दोनों की समस्या बढ़ रही है। पुरानी गाड़ियाँ एथनॉल के हिसाब से नहीं बनी हैं, इसीलिए बीमा कंपनियों के अपने एतराज़ हैं और कार-बाइक ख़राब होने पर उन्हें क्लेम न देने का एक और बहाना मिल जाता है।
आज के महंगाई के समय में जब माँ-बाप युवाओं को किसी तरह से लाखों रुपये में एक बाइक दिलाते हैं या युवा कार लोन लेकर अपनी गाड़ी का सपना पूरा करते हैं तो उनकी चिंता महंगा तेल भी होता है और एथनॉल की वजह से गाड़ी ख़राब होने और फिर ठीक कराने का लगातार बढ़ता ख़र्चा भी। सच तो ये है कि जब खानेपीने वाली चीजों से फ्यूल बनेगा तो खाद्य महंगाई बढ़ेगी साथ ही इसका नुक़सान पर्यावरण को भी होगा क्योंकि एथनॉल के लिए पानी की भी बहुत खपत होती है।
सरकार बताए कि चंद मुनाफ़ाख़ोरों के लिए वो जनता का शोषण क्यों कर रही है।
#E20 #Ethanol #Bike #PetrolPrice #Mileage #Insurance
फीफा वर्ल्ड कप इस समय अपने पूरे यौवन पर हैं। कई देश उम्मीदों से भरे हुए है ओर कई देश गम में डूब गए हैं।ब्राजील और पुर्तगाल बाहर हो गए है।अर्जेटीना,फ्रांस और स्पेन कप के दावेदार बने हुए हैं।कल रात जब अर्जेटीना 78 वे मिनट तक दो गोल से पीछे था,तो जैसे पूरे अर्जेटीना की सांसे थम गई थी।अर्जेटीना की राजधानी ब्यूनसआयर्स में जो जहा था,
वही खड़ा होकर अर्जेटीना के जीतने की प्रार्थना कर रहा था।पूरा अर्जेटीना थम सा गया था।
तीव्र अनुभूति, सघन भावना, हर्षातिरेक, उन्माद और जुनून जैसे फुटबॉल को लेकर फुटबॉल प्रेमियों के मन में उत्पन्न होता है, किसी अन्य खेल को लेकर नहीं होता।तीसरी दुनिया के मज़दूरों,किसानों, ग़रीबों का खेल- जो यूरोप में जाकर यूनिवर्सल-स्पोर्ट्स के साथ एक मजहब बन गया।
फ़ुटबॉल आज पूरे यूरोप में एक व्यापक उन्माद में बदल चुका हैं।पूरा यूरोप और दुनिया के कई देशों के नागरिक फुटबॉल में जीते है और फुटबॉल में मरते है। यूरोप, लातीन अमरीका के कई देशों में बच्चों को जन्म के बाद माँ के चेहरे के बाद फुटबॉल दिखाई जाती है।कई देशों में अभिभावक बच्चे का नाम स्कूल में लिखवाने से पहले फुटबॉल के किसी क्लब में लिखवाने के लिए दिनरात एक कर देते है। यूरोप के हर देशों में,हर शहर में फुटबॉल के क्लब है। गली गली में फुटबॉल है।बर्सिलोना जैसे क्लब के प्रशंसक उस क्लब के एंथम को राष्ट्रगीत से कम नहीं मानते।इन देशों के फुटबॉल प्रेमी मरने मिटने और मारने को तैयार रहते है।
कोई देश विश्वकप जीतने के दावेदारों में शामिल हों ओर वह बाहर हो जाए तो समूचा राष्ट्र सामूहिक अवसाद में डूब जाता हैं।महीनों उस देश को फुटबॉल की हार से उबरने में लगते है।ब्राजील और पुर्तगाल दोनो देश बाहर हो चुके हैं और दोनों देश सार्वजनिक गम में डूब गए हैं। ब्राजील को आज यह प्रश्न परेशान कर रहा है कि जिस देश ने पेले से लेकर एक से एक महान खिलाड़ी दुनिया को दिए और जिस देश का कभी फुटबॉल में डंका बजता था,आज वह शिखर पर क्यो नहीं है?
अभी अर्जेटीना,फ्रांस और स्पेन दौड़ में बने हुए है और इन तीनों को फीफा वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा हैं।
देखना दिलचस्प होगा कि दुनिया के सबसे मंहगे के साथ महान खिलाडी अपने देश को विश्वकप दिलवाने में सफल होते है या कोई छोटा सा अनजाना सा देश छुपारूस्तम साबित होकर पूरी दुनिया को चौकाता है।
19 जुलाई को फाइनल मैंच तक कही खुशी और कही गम का सिलसिला चलता रहेंगा।
मेरा दाँव अर्जेटीना और स्पेन पर हैं।अभी मेरा दिल टूटा नहीं है।अर्जेटीना और स्पेन दोनों बने हुए हैं।
मेरी मां कहती है कि आपको कहीं जाना हो देरी हो रहीं हो या चाहे कितना भी फ्रस्ट्रेट रहो ,दुःखी रहो,आपस में झगड़ा लड़ाई किए रहो लेकिन अगर आपके सामने भोजन की थाली जाए तो भले आपका मन नहीं हो खाने का फ़िर भी थाली को प्रणाम करिए और उसमें से एक बाइट उठा के खा लीजिए। बाकी वापस कर सकते है।
You cannot expect respectful behaviour and basic mannerism from everyone. You cannot expect to teach them as well or expect they'll learn it... just keep your own dignity intact and move on...
दिल पर हाथ रख कर बताइए, क्या इतनी निश्चल मुस्कान वाली स्त्री किसी की हत्या कर सकती है? मीडिया ट्रायल पर भरोसा मत कीजिए, वहाँ भी सब स्त्री विरोधी बैठे है जो हर हाल में स्त्री को कंट्रोल करना चाहते है। स्त्री प्रकृति होती है और प्रकृति हमेशा बदलाव की प्रक्रिया में रहती है। प्रकृति और स्त्री में बदलाव रोकने की सामर्थ्य स्वयं ईश्वर में भी नहीं है।
स्त्री एक ऐसी किताब है, जिसे लिखा तो जरूर भगवान ने है लेकिन उसके नए नए एडिशन बनने से वो नही रोक पाया। पुरुष इसे रोकना चाहता है तो पिला जाता है। जब पिला जाता है तो ऐसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ कर उन्हें बदनाम करता है ताकि उन्हें घरों में कैद रखा जा सके, पढ़ने से रोका जा सके, प्रेम करने से रोका जा सके, जानवर की तरह किसी भी खूंटे में बांधा जा सके।
ईश्वर ने स्त्री को भौंहें दीं, वो बोली, शेप ठीक नहीं और अपनी पसन्द की आई ब्रो सेट कर के बना ली। ईश्वर ने उसे नाखून दिए तो वो बोली, सिंपल नहीं चाहिए और डिजाइनर नेल लगवा लिए। ईश्वर ने बाल दिए तो वो बोली, परफेक्ट नहीं और बेबी कट कटवा लिए। ईश्वर ने जिस शरीर की रचना की वो भी उसे पसन्द नही आया तो सर्जरी से नाक, ओंठ, ब्रेस्ट चेंज करवा लिए। जिसे ईश्वर के दिये तोहफे पसन्द नही आये उसे पुरूष प्रधान समाज का थोपा दूल्हा पसन्द आएगा? तुम क्या ईश्वर हो लड़ऊं?
Being a loyal customer comes with a penalty ?
A guy who orders groceries from Zepto almost every day
decided to compare his cart with his friend's phone someone who barely uses the app.
What he discovered left him shocked.
Same items
Same city
Same time
Yet there was nearly a ₹100 difference in the total bill.
Are loyal customers being charged more while inactive or new users get better prices and discounts ?
If that's really the case,
it doesn't feel like a loyalty reward
it feels more like a loyalty tax.
Have you ever noticed different prices on different accounts for the exact same products ?
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