बहुत ग़लत बात है।
एक छात्र जो अपना जीवन ख़त्म कर चुका है।
उसके लिए परीक्षा में चीटिंग करने की ग़लत खबर आपने फैला दी।
पूरा मीडिया उसी Fake News को दिखा रहा है।
अब बेशर्मों की तरह माफ़ी माँग रहे हो!👎
Who would believe that this is Badrinath. And some idiots replying on this are saying that this is good for GDP. How crass and how ill informed. Will the custodians of Hindutva stand up and speak against this commercialization at one of our most sacred dhams.
हालात तब और बदतर हो जाते है जब ज़िम्मेदार हाकिम अपनी ज़वाबदेही की गठरी कमज़ोर लोगो के सिर पर पटक देते है। स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने वाली SDM अपूर्वा सिंह अब CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) सील करती घूम रही है। वीडियो बनवाये जा रहे है, फ़ोटो सेशन चल रहा है, अखबारों में बड़ी बड़ी खबरे छप रही है। और एसडीएम साहिबा और बाकी अफसर पदों पर बरकरार है।
जबकि CSC में केवल आवेदन करने का माध्यम है, ऑनलाइन आवेदन के बाद फाइल प्रशासन को ट्रांसफर हो जाती है, जाँच करना, प्रमाण पत्र निर्गत करना एसडीएम का काम है।
ये तो वो बात हो गई कि पैर के दर्द में सिर दर्द की दवाई दी जा रही है।
@pushkardhami@dmdehradun@DehradunPolice
तहसील से प्रमाण पत्र लेने में आम आदमी के जूते घिस जाते है। और यहाँ देहरादून की सदर तहसील से फ्रीडम फाइटर आश्रितों के फ़र्जी सर्टिफिकेट की रेवड़ी बंट गई। नीचे से आई रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम अपूर्वा सिंह और पूर्व एसडीएम हरिगिरि ने आँख बंद करके साइन किए। मजे की बात ये है कि हरिगिरि हरिद्वार में सिटी मजिस्ट्रेट का पद एंजॉय कर रहे हैं और अपूर्वा सिंह भी एसडीएम की कुर्सी पर सुरक्षित है।
ये भी एक्सक्यूज़ लिया जा सकता है कि हर प्रमाण पत्र की जाँच एसडीएम द्वारा मौके पर जाकर नहीं की जा सकती, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों की तो हो ही सकती है। फ्रीडम फाइटर तो वैसे भी गिनती के है।
इन प्रमाण पत्र धारकों में से चार में MBBS में दाखिला भी ले लिया। जब हंगामा हुआ तो इनमें से चार को निरस्त करते हुए FIR कराई गई। बाक़ी की जाँच जारी है। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में अलग अलग जिलों में फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र बनाए जाने की ख़बर आ रही है। जिनकी जाँच चल रही है।
@pushkardhami@dmdehradun
Uttarakhand. माय लॉर्ड ने फैसला सुनाया भी नहीं था और मंत्री गणेश जोशी ने ख़ुद को क्लीन चिट मिलने की बात मीडिया में प्रसारित कर दी। सोशल मीडिया तैरती मंत्री की ख़ुशी देखकर न्यायमूर्ति हैरान रह गए। जो फ़ैसला रिज़र्व था वो रिज़र्व ही रह गया, और केस दूसरी खंडपीठ को ट्रांसफर हो गया।
गौरतलब है कि धामी सरकार के मंत्री गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति के मामले में 8 सितंबर को नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया और 12 सितंबर को मंत्री गणेश जोशी ने ऑन कैमरा मीडिया से बात कर फैसला आने से पहले ही खुद को 'क्लीन चिट' मिलने की बात कह दी। फिर रायता फ़ैल गया, जिसे अब जोशी जी समेटने में लगे है।
सुनिए क्या कहा था मंत्री जी ने !!!
@ganeshjoshibjp@BJP4India@INCIndia
जब सफाई NGO और देश के तमाम यूथ को ही करनी है,
तो फिर हम म्युनिसिपैलिटि वाले दीमकों को कुर्सी तोड़ने के लिए सैलरी दे रहे? ये हरामखोर सुअर कब काम करेंगे?
Dump the Neta, Only Believe Scientists & Experts:
What we are witnessing in Nepal and Tibet is much more than a localised flash flood. A catastrophic chain of events involving the high Himalayas, glacial/ice-rock collapse, rivers and vulnerable infrastructure has caused enormous destruction.
For much of the Indian Himalayan Region and my home state of #Uttarakhand, the parallels are deeply worrying. When I am looking at various visuals, I am reminded about the Raunthi Gad disaster in Chamoli in February 2021, the Dharali disaster of August 2025 and the recent Tamak Gad tragedy in Chamoli; all in Uttarakhand.
The Himalayas need to be understood much better but to do that, please for once - dump all the netas on one side and don't believe even one single word that they say about development while balancing economy and ecology.
The only ones who can provide any answers and show the road map are serious scientists and experts who are willing to call a spade a spade. Apart from scientists and experts; we need better monitoring, credible early warning systems and development decisions based on the carrying capacity and geology of these mountains.
My condolences once again to everyone affected by this devastating tragedy 🙏
Photo Courtesy : AFP
पुलिस कसाईपने पर उतर आई !!
देहरादून में इस छात्र को सुनिए, उसका कहना है कि हेलमेट नहीं होने पर चालान करने के बजाय पुलिस वाले पैसे मांग रहे थे, उसने वीडियो बनानी शुरू कर दी तो पुलिस वालों ने चौकी के अंदर ले जाकर बर्बरता से पीटा।
साथ में जा रही छात्रा का आरोप है कि उसके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। मामला बिधोली पुलिस चौकी का है।
@DehradunPolice कृपया संज्ञान ले, @DIGGarhwalRange कुछ कीजिए, @uttarakhandcops एक जाँच तो बनती है।