#WATCH दिल्ली सरकार में मंत्री पंकज सिंह ने कहा, "हमें ये जानकारी 2-3 दिन पहले मिली थी। हमने ट्रांसपोर्ट विभाग से जांच कराने का आदेश दिया था। दिल्ली पुलिस इस पर जांच कर रही थी। केंद्र सरकार ने इसे प्ले स्टोर से हटाने की बात की है। सरकार ऐसी चीजों के लिए सजग है कि किसी प्रकार से लोगों को परेशानी ना हो। जो भी लोग इसमें शामिल होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी।"
सिर्फ़ नितिन गडकरी जी को दोष देना ठीक नहीं है।
तेल तो उनका मंत्रालय भी नहीं है।
नितिन जी तो बस अपने बच्चों के मोह में धृतराष्ट्र बन - देश की सभी गाड़ियों को कबाड़ बना रहे हैं।
असली गुनहगार तो भाजपा है।
उन्हें सब पता है - फिर भी नितिन जी को पूरे सम्मान के साथ नीति बनाने दे रही है
और बदले में
नितिन जी के पुत्रों की कंपनियों से अरबों का चंदा।
स्टॉकहोम, स्वीडन में 2020 में तीसरे ग्लोबल मिनिस्ट्रियल कॉफ़्रेंस में बैठ कर रोड सेफ़्टी पर ज्ञान बघारते @nitin_gadkari
और भारत में सारे ज्ञान को ताक पर रख कर गड्डे वाली सड़क बनाते @nitin_gadkari
धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार जो भी पेपर लीक का विरोध कर रहे हैं वो "देशद्रोही" हैं।
नितिन गडकरी के अनुसार जो इथेनॉल का विरोध कर रहे हैं वो "लॉबीज" हैं।
मतलब इन स्वघोषित ईमानदारों के अनुसार, विरोध करने वाली कोई भी "आम जनता" नहीं है।
“हमने रोड बनाने में स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है… स्पेस टेक्नोलॉजी से फ़ोटोग्राफ़ी होती हैं मॉनिटरिंग होती है” 2017 में प्रधानमंत्री मोदी
फिर भी गडकरी जी की बनायी सड़क पर गड्डे कैसे बन रहे हैं! क्या स्पेस टेक्नोलॉजी भी मॉनिटरिंग के लिए कम पड़ गया है? संसद में ही बताया जाना चाहिए।
मेहनत की कमाई से जिंदगी भर की पूंजी लगाकर लोग कार-बाइक खरीदते हैं, सपने देखते हैं।
लेकिन आज E20 पेट्रोल पंपों से गन्ने juice जैसा पीला पानी निकल रहा है।
इंजन खराब, माइलेज घटने की बात लोग ख़ुद बोल रहे है नई गाड़ियां तक बेकार हो रही हैं।
वही सुप्रीम कोर्ट में सरकार खुद कह रही कि ये ongoing experiment है, नतीजे अगले साल आएंगे।
तो क्या आम आदमी की गाड़ियां सरकार के लिए प्रयोग की लैब Experiment हैं? करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई और सपनों के साथ खिलवाड़ आख़िर किसके लिए ?
इतने सारे आरोप लोग लगा रहे है ! किसी के पास कोई जवाब नहीं है! और है तो हमेशा की तरह चुप्पी !
जिनको समस्या हुई है वे बोल रहे हैं।
आज जिनको लग रहा है कि उनकी गाड़ी में इथेनॉल से कोई प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन कल को जब कहीं अटकेंगे तो पता चलेगा। हो सकता है तब परिवार के साथ हों और बीच सड़क पर गाड़ी चोक हो जाए। तब आपको ग़ुस्सा आएगा और आप सोचेंगे कि सब आपका साथ दें। नहीं। अगर आज चुप रहेंगे तो कल कोई आपका साथ देने नहीं आएगा। इथेनॉल के ख़िलाफ बोलिए। सब साथ मिल कर लड़िए।
ये नितिन गडकरी का बहुत ही आपत्तिजनक बयान है!
इथेनॉल मिले पेट्रोल से तमाम समस्याएं हो रहीं हैं लेकिन नितिन गडकरी को ये “लॉबिज़” का काम लग रहा है! देश की जनता की तरफ़ से व्यक्त हर तकलीफ़ को ‘पैसा के बूते चलाया जा रहा कैंपेन’ बताना गडकरी का ओवर कॉन्फ़िडेंस दिखाता है। उल्टा विपक्षी पार्टियों का आरोप तो ये है कि अपने बेटे के बिज़नेस में फ़ायदा पहुँचने के लिए नितिन गडकरी ने इथेनॉल नीति बनायी है।
ख़ैर, जनता जब अपने कार-बाइक का कबाड़ इनके दरवाज़े पर रखना शुरू कर देगी तब शायद इनको एहसास होगा कि मंत्री पद के अहंकार में ये कितना आगे निकल चुके हैं!
जितने वीडियो देख रहा हूँ लोगों के, जो पेट्रोल पम्प से सीधे बोतलों में पेट्रोल भरवा रहे हैं, उनमें से अधिकांश तो ऐसा दिखता है कि सरकार ने संभवतः E85 को E20 के नाम पर डालना आरम्भ कर दिया है।
फ्यूल और एथनॉल का सेपरेशन दिख रहा है। एक जगह देखा उसका रंग गुलाबी है ना कि डार्क ऑरेंज। कहीं तो लीची के जूस जैसा रंग भी दिखा।
यह अविश्वास इसलिए भी है क्योंकि @nitin_gadkari, @HardeepSPuri और @PMOIndia ने बिना किसी जागरूकता अभियान के, या उपभोक्ता सहमति के, पेट्रोल कह कर E20 हमारी टंकियों में डलवाना चालू कर दिया था, दो साल बाद पता चला कि ये तो पेट्रोल है नहीं और हमारी गाड़ी भी उसके लिए उचित रूप से तैयार नहीं है।
अब @narendramodi बताएँ कि ये क्या बिक रहा है पम्प पर? क्या पेट्रोल पम्प वाले अपनी तरफ़ से भी कुछ घपला कर रहे हैं? स्थानीय पुलिस फिर क्या कर रही है? आप हर बात को चुप्पी या फिर सोरोस का एजेंट कह कर टाल नहीं सकते।
अगर किसी एक मंत्री की वजह से मोदी सरकार की छवि ध्वस्त हो रही है। जनता त्राहिमाम कर रही है तो उनका नाम नितिन गडकरी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि, जनता को राहत देने, समझाने और समाधान देने के बजाय जाने कौन सी लॉबी का जिक्र करते प्रसन्न हुए जा रहे हैं। कमाल की बात यह भी है कि, जनता से सीधे जुड़ा मुद्दा होने के बावजूद राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष नितिन गडकरी पर कभी हमलावर नहीं होता है। किसी दूसरे मंत्री के साथ ऐसे विवाद जुड़े होते तो अब तक राहुल गांधी और विपक्षी नेता जाने क्या कर रहे होते? नितिन गडकरी परफार्मिंग मिनिस्टर हैं, यह तर्क देकर जनता के मन में संदेह बने रहने और जनता को परेशान होने के लिए छोड़ देना कहां तक उचित है।
प्रतिवर्ष 3.5 लाख बेटियां लव जिहाद का शिकार हो रही हैं।
जिहादियों की 100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में आजीवन कारावास देने के लिए कानून कब बनेगा?
NSA, UAPA और BNS की धारा 111, 113, 147, 152 में संशोधन कब होगा?
@narendramodi@AmitShah
चंपत राय की एक अलग दुनिया थी। जैसे कोई राजा टाइप। उनकी अपनी सेना थी जिसे निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स कहते हैं। एक करोड़ रुपया महीना और सालाना 12 करोड़ निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स को दिए जा रहे थे वो भी नंबर एक से और अकाउंट से। ये सेक्युरिटी गार्ड्स लूट के मॉल के रूट पर तैनात रहते थे। ये चढ़ावा चोरी का मामला आपको जितना सरल लगता है वो बेहद पेचीदा और साजिशों से भरा हुआ है। बहुत ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल गैंग की तरह इसे ऑपरेट किया जा रहा था।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अब 400 निजी सुरक्षाकर्मी रडार पर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा अब और बड़ा होता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। उनकी ड्यूटी, रोस्टर, CCTV फुटेज, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद मंदिर परिसर में इतनी बड़ी संख्या में निजी गार्ड क्यों लगाए गए थे?
सूत्रों का दावा है कि जिस निजी सुरक्षा कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई थी, वह RSS से जुड़े बिहार के एक पदाधिकारी से संबंधित बताई जाती है, जो पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। इसी कंपनी पर ट्रस्ट हर महीने करीब 1 करोड़ रुपये खर्च करता था। यानी सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च हो रहे थे।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि चढ़ावे के आवागमन के दौरान नियमों का पालन हुआ या कुछ लोगों को बिना जांच के आने-जाने की छूट दी गई। सवाल यह भी है कि अगर दान-पात्र, गिनती कक्ष और चढ़ावा रूट पर निजी सुरक्षा तैनात थी, तो चोरी और गड़बड़ी कैसे होती रही?
अब जांच सिर्फ गिनती कक्ष तक सीमित नहीं है। बैंक नियमों के उल्लंघन, ट्रस्ट की निगरानी, निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका और करोड़ों के सुरक्षा खर्च तक सवालों के घेरे में हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में हर दिन नया खुलासा हो रहा है, और जांच अब छोटे कर्मचारियों से आगे बढ़कर पूरे सुरक्षा और प्रबंधन सिस्टम की तरफ जाती दिख रही है।
#Breakingnews | @ShriRamTeerth@Uppolice@LucknowDivision@Igrangelucknow@ayodhya_police@dir_ed@CBIHeadquarters
India’s Big Leap in Green Energy
Solar energy capacity rises 52 times, from 2.8 GW in 2014 to 150+ GW in 2026.
Green energy production capacity reaches 283+ GW.
12 Saal Vishwas ke, Vikas ke, Jan-Kalyan ke.
@PMOIndia@MinOfPower@mlkhattar@officeofmlk@CMDNTPC@PIB_India
#NTPC #PoweringInfinitePossibilities
.@RailwaySeva@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw ट्रेन already late है, उसके बावजूद हर जगह रोका जा रहा है। पिछले 30 मिनट से प्रयागराज में रुकी है। अब फालतू का रिप्लाई करके पीएनआर और मोबाइल मत मांगना। Train - 12423 (16 March) राजधानी से चलने का क्या फायदा?
खामनेई की मौत हो चुकी है। अमेरिका के हमले जारी रहेंगे । ईरान अब सबसे बड़े हमले की बात कर रहा है।
अमेरिका तक तो ईरान के मिसाइल नुक़सान पहुँचाने से रहे लेकिन मिडिल ईस्ट में मासूम लोग शिकार हो रहे। उधर ईरान में भी मासूम मारे जा रहे।
सद्दाम को मार दो, मादुरो को उठा लो, अफ़ग़ानिस्तान में घुस जाओ और फिर सब छोड़छाड़ के निकल आओ.. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं। इस दुनिया को बर्बाद करने में अमेरिका ने जितना योगदान दिया है शायद ही किसी और देश ने दिया होगा।
दुनिया में 50 से ज्यादा युद्ध चल रहे हैं. यूरोप और अफ्रीका में भीषण युद्ध जारी हैं. अमेरिका-इजराइल-ईरान लड़े पड़े हैं. तमाम सुन्नी देशों में शिया देश ईरान के बम गिर रहे हैं, लोग मर रहे हैं. गाजा उजाड़ है. लेकिन अपने यहां वसंत है, होली है, क्रिकेट है. ऐसी ही विदेश नीति होनी चाहिए.
हिंदुस्तानी मुसलमानों को आज दो रकात नफ़्ल पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने आपको भारत में पैदा किया।
शुक्रगुज़ार होना कमजोरी नहीं… ईमान की निशानी है।
जब दुनिया के कई हिस्सों में मुसलमान आपस में ही सियासी लड़ाइयों और जंग का शिकार हैं, तब आप यहाँ अमन से रोज़ा रख रहे हैं, नमाज़ पढ़ रहे हैं, ज़कात दे रहे हैं।
आपकी मस्जिदें खुली हैं।
आपका रोज़ा महफ़ूज़ है।
आपकी इबादत पर कोई पहरा नहीं।
ये सब यूँ ही नहीं है।
ये इस मिट्टी की ताकत है। इस लोकतंत्र की ताकत है। इस बहुसंख्यक हिंदू क़ौम की सहनशीलता है।
हर वक़्त शिकायत करने से पहले आईने में देखिए।
जिस थाली में खाते हैं, उसी को कोसना बंद कीजिए।
वतन ने आपको पहचान, अधिकार और सुरक्षा दी है।
भारत आपकी सबसे बड़ी नेमत है।
अल्लाह भारत को सलामत रखे…और हमें भी शुक्रगुज़ार बनाए। आमीन
सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ❤️
रुचि तिवारी वाली घटना में मोदी ही इनेबलर है:
१. ‘ब्राह्मणों से आजादी, मनुवाद से आजादी’ के नारे लगे: आपने कहा छात्र हैं, डिसेंट है
२. दीवारों पर ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’, ‘ब्राह्मण-बनिया वापस जाओ’, ‘वी आर कमिग फॉर यू’, ‘देयर विल बी ब्लड’ लिखे गए: आप चुप रहे, कुछ नहीं बोले केवल डिबेट में दूसरे प्रवक्ताओं को चुप कराने के लिए आपने इसका प्रयोग किया
३. आगे नारे जेनोसाइडल हुए, ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’, ‘ब्राह्मणों की छाती पर, बिरसा फूले अम्बेडकर’, ‘इनको मारो जूते चार’ आए, हिंसा बढ़ती गई नारों में: आप चुप रहे, ब्राह्मण घृणा का नॉर्मलाइजेशन होता गया
४. कल रुचि तिवारी को उसके ब्राह्मण होने के कारण पीछे के लड़कों द्वारा ‘इसे वहाँ ले चल, इलाज करेंगे’ की योजना बन रही थी, और वामपंथी लड़कियों ने उसकी हत्या के प्रयास किए: आप आज भी चुप हैं, संभवतः एक वीडियो ढूँढ रहे होंगे जहाँ उसने भाजपा की आलोचना की हो, ताकि उसे सोरोस एजेंट बताया जा सके।
तो पूरा एक पैटर्न है कि आपने एक कैम्पस के नारों से दीवारों पर ग्रैफिटी, फिर हिंसक नारे, हत्याकांड की धमकी वाले नारों से होते हुए, आज एक लड़की की गैंगरेप और हत्या के प्रयास तक यह जातिवादी घृणा पहुँची है।
ये सब 2014 के बाद हुआ, सोशल मीडिया पर दिखा और आप लगातार चुप रहते रहे। फिर इसका क्रेडिट और किसको दे दिया जाए? इस सरकार ने कितनी बार जेएनयू-जाधवपुर जैसे विश्वविद्यालयों के प्रशासन को कहा कि यह जातिवादी घृणा नहीं चलेगी?
कितनी बार यूजीसी ने कहा कि कैम्पस पर यह अस्वीकार्य है? आपने एक कैम्पस से इसे मल्टी-कैम्पस बनाया, फिर यह मवाद सोशल मीडिया पर पसरा, फिर आपने SC/ST Act का हथियार दिया, फिर आपने कम्पाउंड किया इस घृणा को, उनके हाथ सशक्त किए, और आज एक ब्राह्मण लड़की के कपड़े फाड़ने और गला दबा कर हत्या की चेष्टा आपकी पुलिस के सामने हो रही है, तो इनेबलर कौन हुआ?