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81 दिवसीय गविष्टि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा के समापन के बाद आज प्रातः गोरखपुर से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को पत्र प्रेषित किया गया
॥ श्री गोमात्रे नमः ॥
गविष्ठि अभियान — राष्ट्रव्यापी गो-संवर्द्धन एवं प्रतिष्ठा संकल्प
दिनांक: 22 जुलाई 2026
स्थान: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
प्रतिष्ठा में,
माननीय मुख्यमंत्री जी,
उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ।
विषय: उत्तर प्रदेश के समस्त 403 विधानसभा क्षेत्रों में संपन्न 'गविष्ठि यात्रा' का जन-निष्कर्ष एवं गोमाता को पशुसूची से मुक्त कर 'राष्ट्रमाता'/राज्य-माता का दर्जा प्रदान करने हेतु ज्ञापन।
माननीय मुख्यमंत्री जी,
सस्नेह शुभ आशीर्वाद ।
उत्तर प्रदेश की पुण्यधरा पर संस्कृति, धर्म और जन-आस्था की संवाहिका गोमाता की गरिमा की पुनर्स्थापना हेतु आयोजित 'गविष्ठि यात्रा' का सफल समापन हुआ है। गत 3 मई को गोरखपुर से प्रारंभ होकर निरंतर 81 दिनों तक संचालित इस ऐतिहासिक प्रवास के उपरांत गोरखपुर पहुंचने पर प्राप्त जन-भावनाओं और तथ्यों को आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए हम अत्यंत हर्ष एवं दायित्व का अनुभव कर रहे हैं।
यह यात्रा केवल एक अभियान नहीं, अपितु संपूर्ण उत्तर प्रदेश के जन-जन के हृदय की वेदना और संकल्प का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण थी। यात्रा के मुख्य आंकड़े निम्नवत् हैं:
• कुल अवधि: 81 दिन (1,920 घंटे)
• कुल आच्छादित विधानसभा क्षेत्र: 403 (शत-प्रतिशत)
• कुल वाहन काफिला: 11 गाड़ियाँ
• कुल सहयात्री 108 (औसतन)
• कुल तय दूरी: 14,630 किलोमीटर
• आयोजित जन-सभाएँ: 2,403 सभाएँ
• प्रत्यक्ष जन-संवाद: 81 दिनों और 1,920 घंटों के इस अविरल प्रवास में उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीमा को स्पर्श करते हुए 14,630 किलोमीटर का मार्ग तय किया गया। इस दौरान आयोजित 2,403 सभाओं के माध्यम से 18 लाख से अधिक लोगों से सीधा संवाद हुआ। सोश्यल मीडिया, समचार पत्रों, न्यूज़ चैनलों के द्वारा लगभग 27 करोड़ लोगो ने अपने को जोड़ा अर्थात् शंकराचार्य जी की गविष्ठी यात्रा को देखा - सुना और समझा।
विशेषरूप से मुस्लिम समुदाय द्वारा गोमाता को राज्यमाता / राष्ट्रमाता बनाने हेतु 81 ज्ञापन-एवं समर्थन पत्र प्राप्त हुए ; जिसमें प्रमुख रूप से मुस्लिम पर्सनल लो बोर्ड , इमरान मसूद (सांसद) , फहीम इरफ़ान (विधायक, बिल्लारी), काज़ी नौमान मसूद ( अध्यक्ष, नगरनिगम गंगोह) , ओल उम्मत फाउंडेशन, मुस्लिम युवा समाज , प्रबंध समिति ईदगाह, मैनेजिंग कमेटी जामा मस्जिद भी शामिल है l
यात्रा के दौरान जनता द्वारा 396 गोमाता की प्रतिमा / स्मृति चिह्न, 3123 तस्वीरे, 1827 शाल-दुपट्टे, 18 तलवारें भेट स्वरूप प्राप्त हुई ।
सम्पूर्ण यात्रा के दौरान अनेकों पार्टियो-दलों- समाजिक संगठनों सहित सनातनी-हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन, कबीर पंथ सहित अनेक मतानुयायियों ने शंकराचार्य जी की गविष्ठी यात्रा का स्वागत किया गोमाता को राज्य और राष्ट्रमाता बनाये जाने के समर्थन में शंकराचार्य जी की यात्रा में सम्मिलित हुए l
तदुपरांत कुछ स्थानों पर (छुटमुट) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल , भाजपा सहित संगठनों के कार्यकर्ता भी गोमाता के रक्षार्थ गविष्ठी यात्रा व्यक्तिगत रूपसे शामिल हुए । साथ ही साथ हजारों की संख्या में, विश्व हिंदू परिषद, RSS, बजरंगदल और भाजपा के अनेकों नेता कार्यकर्ताओं ने संदेश भेजकर या गुप - चुप तरीके से भेट कर गविष्ठी यात्रा का समर्थन किया किन्तु उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, हमें हमारी संस्था द्वारा शंकराचार्यजी के कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं होने का निर्देश होते हुए भी हम गोमाता के प्रति श्रद्धा के कारण
हम छुपछुपकर अभियान के समर्थन में शामिल हो रहे है l
लगभग आधे से अधिक पड़ावो पर आयोजकों को सरकारी दवाव में लेकर डराया-धमकाया गया आयोजनों को रद्द करने का दवाब डाला गया । आज यात्रा के समापन के समय तक भी लोगो को डराने धमकाने का सिलसिला चल रहा है ।
प्रदेश की जनता जनार्दन ने एक स्वर में स्वीकार किया कि इतने कम समय में सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों का ऐसा सघन, नियमबद्ध और निष्ठापूर्ण प्रवास अपनी तरह का पहला और अभूतपूर्व ऐतिहासिक कीर्तिमान है।
यात्रा का सर्वसम्मति निष्कर्ष:
सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश एक स्वर में गोमाता को पशुसूची से हटाकर 'माता' का दर्जा देने की माँग कर रहा है और गोमाता को राज्य व शासन द्वारा 'पशु' कहे जाने पर अत्यंत आहत है।
@ANI@ABPNews@aajtak@ndtv@myogiadityanath
#Lucknow#लखनऊ 🙏
81 दिवसीय गविष्टि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा करके बीते कल मध्याह्न 10 बजे पत्रकारों को सम्बोधित करने के उपरांत
गत रात्रि प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुँच गए हैं परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती '१००८' जी महाराज 🙏
आज दोपहर 1 बजे से पत्रकार वार्ता आयोजित है तदन्तर पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज का शुभाशीर्वाद आप सबको प्राप्त होगा ।
स्थान - चांसलर क्लब, आशियाना, लखनऊ
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मुख्य जन-आकांक्षाएँ :
1. 'पशु' शब्द के प्रयोग से आहत आस्था: प्रदेश के नागरिकों में इस बात का गहरा क्षोभ और दुःखातिरेक है कि जिस गोमाता को हमारी परंपरा में पूजनीय और जगन्माता माना गया है, उसे प्रशासनिक दस्तावेजों और कानूनों में साधारण 'पशु' की श्रेणी में रखा जाता है। नीतियों में गोमाता को पशु श्रेणी से तत्काल विलोपित किया जाना चाहिए।
2. संवैधानिक दायित्व (अनुच्छेद 48): भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48 स्पष्ट रूप से गायों के नस्ल सुधार और उनके वध पर प्रतिषेध का निर्देश देता है जिससे स्पष्ट है कि संविधान गायों के प्रति विशेष दृष्टि रखता है। उत्तर प्रदेश, जो देश की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है, को इस दिशा में अग्रगामी भूमिका निभाते हुए गोमाता को राज्य-स्तरीय विशेषाधिकार व 'माता' का दर्जा देना चाहिए।
3. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण: गोवंश केवल धार्मिक आस्था का विषय ही नहीं है, अपितु हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और प्राकृतिक संतुलन का मूल आधार भी है। गोमाता को यथोचित सम्मान और दर्जा मिलने से गो-संवर्द्धन और पंचगव्य आधारित अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, जिससे गो संबंधी व्यावहारिक समस्याओं का भी स्थायी समाधान संभव होगा।
हमारी विनम्र अपेक्षा :
उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता के प्रतिनिधि होने के नाते आप से यह नम्र अपेक्षा है कि जन-जन की इस पुकार को स्वीकार करते हुए विधान सभा के आगामी सत्र में संकल्प पत्र लाकर गोमाता को 'पशु' की श्रेणी से पृथक करने तथा उन्हें 'राष्ट्रमाता' / विशेषाधिकार प्राप्त दर्जा प्रदान करने हेतु केंद्र सरकार को संस्तुति भेजें एवं राज्य स्तर पर राज्यमाता का दर्जा देते हुये अन्य भी आवश्यक नीतिगत निर्णय लें।
आशा तो यही है कि स्वयं को सनातन संस्कृति की संवाहिका निरूपित करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार इस जन-आकांक्षा को पूर्ण कर विश्व के समक्ष एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगी और लोकमानस में चिरप्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहेगी।
यहां हम यह भी बताना चाहेंगे कि लाखों लोगों ने हमारे समक्ष यह संकल्प भी लिया है कि ऐसा न कर पाने की दशा में वे आगामी चुनाव में इस सरकार/पार्टी को वोट नहीं दे पायेंगे। जिससे भी आपको सादर अवगत करा रहे हैं।
महिपाल सिंह मकराना कई दिनो से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन उसका साथ 1% भी लोग नहीं दे रहे हैं।
यह अंतिम सामाजिक नेता है जो आपके हक और अधिकारों के लिए लड़ रहा है।
अगर इसके आंदोलन को जनसमर्थन नहीं मिला तो भविष्य में कोई भी सामाजिक नेता अपना समय धन, संसाधन खर्च करके आपके लिए कोई नहीं खड़ा होगा।
जैसे तुम लोग इस सरकारी अंधभक्ति कर रहे हो महिपाल मकराना का समर्थन करो कम से कम सोशल मीडिया पर तो माहौल बनाकर रखो।
Mahipal Singh Makrana
#UGCROLLBACK
अगर अपने बच्चों की चिंता है तो,
"निकलो बंद मकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से"
वरना ये आधुनिक हिटलर, आधुनिक लुटेरे, भगवान के मंदिर के डकैत और लुटेरे, RSS और भाजपा के महाडकैत आपके हमारे बच्चों का भविष्य खा जाएंगे और सब कुछ लूट ले जाएंगे
इतिहास में लिखा जाएगा जब स्वर्ण ना मर्द विधायक सांसद नेता अपने बच्चों के लिए धन इक्कठा कर रहे थे गुलामी करके। उस समय राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना अध्यक्ष अपने सहयोगियों के साथ स्वर्णों की आने वाली पीढी के लिए अकेला सड़कों पर निकल कर पैदल चलकर लोगो को जगा रहा था
भगवत्पाद शिवावतार जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य भगवान ने जिस सनातन सिद्धांतों, वर्णाश्रम धर्म, प्रशस्त मानबिंदुओं की रक्षा की और जो भगवती श्रुति के वास्तविक चरमोत्कृष्ट सिद्धांत को पुनः प्रतिपादन किया, प्रत्येक सनातन धर्मावलबियों को इस पर आस्थान्वित होना चाहिए।
जैसी परिस्थिति है, उसी में भजन करो। परिस्थिति बदलने की आशा में मत बैठे रहो।
Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
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भजन मार्ग | परम पूज्य वृन्दावन रसिक संत श्री हित प्रेमानन्द गोविन्द शरण जी महाराज
श्री हित राधा केली कुंज, वराह घाट, वृन्दावन धाम