@RebornManish अब किसी पर कोई जोर जबरदस्ती तो है नही,पर सनातन में सभी धाराएं पहले से ही समाहित है। निर्गुण मानो चाहे सगुण,एक को मानो चाहे पंच देव को , चाहे 33 कोटि देवी देवताओं को।जितनी आजादी सनातन में है इतनी किसी और धर्म में नही।जो भी मार्ग चाहोगे वो सनातन में मिलेगा, गहराई से अध्ययन करें।
@LakhanmeenaIND ये भगवान का बाल स्वरूप है, जैसे एक छोटे बालक का लालन पालन किया जाता है।ऐसे ही प्रभु के बाल स्वरूप की आराधना की जाती है।जय हो सनातन धर्म की।
@anupamnawada अपनी शादी भी पंडित से करवाई थी,या खुद ही मंत्र पढ़ लिए थे।और बच्चों की शादी भी बिना पंडितों के हुई होगी। समय विपरीत होते समय नही लगता, कहीं फिर इन्हीं पंडितों की शरण में आना पड़े।
@RebornManish सनातन धर्म से जितनी भी शाखाएं निकली, धीरे धीरे फिर सनातन धर्म की नकल करने लगी।जैनी भी हिन्दू मंदिरों से भी भव्य मंदिर बनाने लगे और सिख और बौद्ध भी।वो पूजा पद्धति की अपने को सर्वोच्च मानना,और वो ही हिन्दू धर्म की सभी कुरीतियों को अपना लेना फिर सनातन से ही जुड़े रहते