भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए कि 2014 की पुरानी और अप्रासंगिक सीनियरिटी लिस्ट उठाकर 2025 तक की रिक्तियों पर अधीक्षक के प्रमोशन कर दिए गए। @cgstluckzone
असली खेल सिर्फ एक था पहले अवैध प्रमोशन करवाओ फिर उन्ही को बचाने और कुछ ना करने के लिए पैसे कमाओ ।
विभाग में कुछ भ्रष्ट आईआरएस अधिकारी पूरे एक गैंग की तरह काम करते हैं। इनका लक्ष्य सिर्फ एक होता है चाहे टैक्सपेयर हो विभाग का पैसा हो या अधीनस्थ अधिकारी हो हर जगह से पैसा निचोड़ना और अकूत संपत्ति बनाना।
कई शिकायतों और ट्वीट्स में पहले भी बताया गया है कि कैसे इन भ्रष्ट आईआरएस अधिकारियों ने करोड़ों की घूस लेकर सैकड़ों कर्मचारियों को निरीक्षक के पद पर sanctioned strength के ऊपर प्रमोशन दे दिए और उन्हें दस दस साल के वेतन के बराबर increments देकर भारी अनियमितताएँ कीं।
इसके बाद शुरू हुआ पैसों की वसूली का नंगा नाच। जानबूझकर इन अवैध प्रमोशनों को रद्द करने में देरी की गई। कभी कोर्ट का बहाना कभी अस्पष्ट स्पष्टीकरण और इसी चक्कर में दस साल से अधिक समय तक मामला लटकाकर मुफ्त का पैसा कमाने का धंधा चला।
फरवरी में जो नए सीसी पी के कटियार लखनऊ @cgstluckzone आए हैं वे यहाँ पहले भी लंबे समय तक काम कर चुके हैं और अवैध प्रमोटियों के बेहद करीबी माने जाते हैं। @cusprevpatna पटना कस्टम्स में सैकड़ों करोड़ के फर्जी एक्सपोर्ट के समय वे आयुक्त थे और साफ बच निकले क्योंकि सीबीआई ने संयुक्त आयुक्त तक के खिलाफ एफआईआर की लेकिन विभाग में सबको पता है कि कस्टम्स में घोटाले आयुक्त के इशारे के बिना संभव नहीं। पोस्टिंग में वही अपने लोग सेट करते हैं और वहीं से खेल शुरू होता है।
अब यही मुख्य आयुक्त यहाँ आकर वही पुराना खेल शुरू कर चुके हैं। इसमें जॉइंट सेक्रेटरी एडमिन @cbic_india की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि समिति की स्पष्ट रिपोर्ट कि प्रमोशन अवैध हैं उसके बावजूद उन्होंने उल्टी सीधी और भ्रामक निर्देश भेजे ताकि तीन महीने तक फाइल अटकी रहे। संगठन और लगातार ट्वीट करने के बाद अवैध प्रमोशन को रद्द करने का निर्देश जारी हुआ।
लेकिन मुख्य आयुक्त महोदय ने उस आदेश को भी बारह दिन दबाए रखा और छुट्टी पर चले गए ताकि उन्हें साइन न करना पड़े और कोर्ट से स्थगन आदेश ले सकें। यह पूरा खेल सोची समझी रणनीति का हिस्सा था।
जब संगठन ने सुझाव दिया कि आकस्मिक स्थिति में adhoc प्रमोशन किए जा सकते हैं तब भी इन्होंने खेल की पराकाष्ठा कर दी। डीपीसी के नियमों, @DoPTGoI और @cbic_india के निर्देशों और सर्वोच्च न्यायालय के सभी स्पष्ट आदेशों को किनारे रखकर 2014 की आउटडेटेड सीनियरिटी लिस्ट पर adhoc प्रमोशन कर दिए जिसमें लगभग चार सौ अवैध प्रमोशन जुड़े हुए थे। इससे अवैध प्रमोटियों को सीधा अनुचित लाभ दिया गया।
डीओपीटी के आदेश के अनुसार सीनियरिटी लिस्ट अपडेटेड और समसामयिक होनी चाहिए। डीपीसी के नियम भी यही कहते हैं कि केवल updated seniority list ही कमेटी के सामने रखी जा सकती है।
2014 के बाद सर्वोच्च न्यायालय के कई स्पष्ट आदेश आये हैं जैसे कि एन आर पारमार और मेघचंद्र जिनके अनुसार सीनियरिटी का निर्धारण होना चाहिए। इस पुरानी लिस्ट का इन निर्देशों से कोई मेल नहीं है और 2014 के बाद जॉइन करने वालों के अधिकार छीनना कानूनन गलत है।
@DoPTGoI का आदेश कहता है कि जो नवीनतम सूची विवाद में है उसी disputed list के आधार पर प्रमोशन किया जा सकता है, लेकिन इन्होंने नवीनतम सूची को भी किनारे रख दिया और पुरानी लिस्ट उठाकर प्रमोशन कर दिए।
इन्होंने अपने ही विभाग और अदालत में दिए गए शपथपत्रों को भी दरकिनार कर दिया। विभागीय निर्देशों और आधिकारिक स्टैंड के विपरीत जाकर प्रमोशन कर दिए जबकि अंतिम सुनवाई की तिथियाँ बिल्कुल निकट थीं। यह दिखाता है कि मामला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि साफ तौर पर भ्रष्टाचार और गलत मंशा का है।
इस पूरे प्रकरण में कितना बड़ा खेल और कितनी बड़ी मिलीभगत है यह जल्दी ही सभी मंत्रालयों को विस्तृत शिकायत के माध्यम से बताया जा रहा है। यह गैंग यहाँ रुकने वाला नहीं है। यदि इनकी संपत्ति की गहन जांच हो जाए तो कई लोगों की आँखें फटी रह जाएँगी।
@FinMinIndia@nsitharaman@nsitharamanoffc@PMOIndia@narendramodi@DrJitendraSingh@DoPTGoI@AmitShah@RahulGandhi@sgaiceia@aiceia_lko@khurpenchh@VivekGa54515036@Khurpench_@CBIHeadquarters@CVCIndia
#CORRUPTION
@bstvlive ये ठीक नही इसकी जांच होनी चाहिए।
पर धन उगाही करता है ये bsa इसने कुछ दिन पहले अपने 3-4 clerks को विद्यालयों में भेजा बिना किसी लिखित authority, वहाँ जाकर इन तथाकथित अधिकारियों ने शिक्षकों पर दबाव बना कर bsa के सानिध्य में धन उगाही की पर ये तो दूध का धुला हुआ है shame on him👎
भयावह भ्रष्टाचार, अन्यायपूर्ण शोषण, कुप्रबंधन और अलोकतांत्रिक सामंतवाद का घिनौना चेहरा—यही है @cbic_india प्रशासन।
आदरणीय @narendramodi@nsitharaman जी,
आज @cgstluckzone से 1993 बैच के अनुसूचित जाति वर्ग के एक निरीक्षक श्री प्रदीप कुमार बिना किसी प्रमोशन के रिटायर हो रहे हैं। समाज के सामने यह भ्रम जाएगा कि शायद उनके ऊपर कोई मामला रहा होगा—कोई विजिलेंस, कोई सस्पेंशन। लेकिन सच्चाई यह है कि न तो कोई केस है, न कोई विजिलेंस जांच। यह पूरी तरह से आईआरएस के संगठित गैंग द्वारा रची गई विभेदकारी HR नीति और संस्थागत भ्रष्टाचार का परिणाम है। प्रमोशन में किए गए भ्रष्टाचार के विक्टिम्स हो गए ये। भ्रष्टाचारी जेबें गर्म करके मौज करते है और अन्याय, वित्तीय नुकसान, सामाजिक छवि ख़राब होने,कुंठा मानसिक प्रताड़ना, के शिकार कमजोर होते है। @NCSC_GoI
आज प्रमोद कुमार जी हो गए असंवेदनशील, भ्रष्ट, सामंतवादी, विभेदकारी व्यवस्था के ।सोचिए युवा Group B इस भयावह सच को देखने पर किस मानसिक स्थिति के शिकार होंगे?
समाज के सामने यह भ्रम जाएगा कि शायद उनके ऊपर कोई मामला रहा होगा—कोई विजिलेंस, कोई सस्पेंशन। लेकिन सच्चाई यह है कि न तो कोई केस है, न कोई विजिलेंस जांच। यह पूरी तरह से आईआरएस के संगठित गैंग द्वारा रची गई विभेदकारी HR नीति और संस्थागत भ्रष्टाचार का परिणाम है।
किसी भी संस्था में योग्यता और कार्यकुशलता से लोग आगे बढ़ते हैं, लेकिन भारत और विशेषकर अंग्रजी हैंगओवर में रह रहे @cbic_india@FinMinIndia की हकीकत अलग है। यदि आपने एक बार UPSC पास कर लिया, तो बिना कोई कार्य किए, केवल गैंगिंग, साजिश, और ट्रांसफर पोस्टिंग में पैसा उगाही से आप ऊँचाई तक पहुंच सकते हैं। 12 वर्षों की सेवा में मैंने आज तक कोई IRS अफसर ऐसा नहीं देखा जो अपने आदेश स्वयं ड्राफ्ट करता हो—क्योंकि वह न तो जानता है, न कभी सीखा।उच्च पदों पर आसीन कई IRS अधिकारी यह तक नहीं जानते कि अधीनस्थ से निर्णय आदेश लिखवाना अवैध है।
जब बिना कार्य किए, केवल व्यवस्था का शोषण करके पदोन्नति, पोस्टिंग और सुविधा पाई जा सकती है, तो कोई क्यों सीखे? अधिकांश को बैलेंस शीट या रिटर्न्स देखने तक नहीं आते, फिर भी वे स्वयं को ‘राजस्व अधिकारी’ कहते हैं। यही वास्तविकता है।
IRS अधिकारियों को जहां पूरे करियर में 7-9 प्रमोशन मिलते हैं, वहीं ग्रुप B अधिकारी 20-25 वर्षों में एक या दो। यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित गैंग द्वारा रची गई रणनीति है। सारे उपर के पदों असिस्टेंट कमिश्नर से ले कर चेयरमैन तक केवल आईआरएस है। तो कोई कुछ कर नहीं पाता क्योंकि इनका गैंग है।
IRS अधिकारियों को जहां पूरे करियर में 7-9 प्रमोशन मिलते हैं, वहीं ग्रुप B अधिकारी 20-25 वर्षों में एक या दो। यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित गैंग द्वारा रची गई रणनीति है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार पर फलना फूलना है विभागों के संसाधनों की लूट करना है।
इसका दूसरा चरण होता है—HR प्रणाली को जानबूझकर एक ऐसे गड़बड़झाले में बदल देना कि ग्रुप B अधिकारी आपस में कोर्ट केसों में उलझे रहें। ‘डिवाइड एंड रूल’ की नीति से वे न केवल प्रमोशन और संसाधनों से वंचित रहते हैं, बल्कि लगातार आपसी संघर्ष में झोंके रहते हैं।
विभाग में अधिकांश पद केवल IRS अधिकारियों के लिए बनाए गए हैं—उनकी रैंक, गाड़ी,ऑफिस, वेतन और सुविधा बढ़ाने के लिए। उनका कोई ठोस कार्य नहीं है, फिर भी उनके रखरखाव पर टैक्सपेयर के सैकड़ों करोड़ खर्च हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, जहाँ पूरे राज्य के स्टेट GST में एक कमिश्नर है, वहीं केंद्र सरकार के GST विभाग में उत्तर प्रदेश में ही 40 से अधिक कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर, चीफ कमिश्नर और प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर तैनात हैं। इस ढांचे से केवल भ्रष्टाचार उपज सकता है—लोकतंत्र और उच्च स्तरीय लोक सेवा नहीं।
जब @ianuragthakur जी @FinMinIndia में MoS थे, तो हमारे संगठन द्वारा तैयार की गई कैडर रीस्ट्रक्चरिंग रिपोर्ट को VIP रिफरेंस के माध्यम से @cbic_india को ख़ुद भेजा एक रिमाइंडर भी भेजा, बिना किसी जुगाड़ से, लेकिन @cbic_india उसे जानबूझकर दबाए रखा। जब वे मंत्रालय से हटे, तो वह रिपोर्ट कूड़े में फेंक दी गई और अपनी पसंद की रिपोर्ट—बिना ग्रुप B की भागीदारी के—आगे बढ़ा दी गई।
एक बार मैंने तत्कालीन @dghrd_cbic से मीटिंग में कहा था—आपकी कैडर रीस्ट्रक्चरिंग कमेटी में केवल IRS अधिकारी हैं। ग्रुप B का कोई प्रतिनिधि नहीं। जबकि हमें भी अच्छी तरह मालूम है कि विभाग के लिए क्या अच्छा हो सकता है, क्या बुरा। हम सुझाव दें और आप उन्हें कूड़ेदान में फेंक दें, यह कौन सा लोकतंत्र नहीं। उन्होंने जवाब दिया: “अगर आपको विश्वास नहीं है तो हम क्या कर सकते है?” इन्ही ने हमसे कहा था जीएसटी के नाम पर विभाग में दीमक लग गया है। मतलबअवैध कमाई कम हो जाएगी ।
मैंने कहा: “मुद्दा विश्वास का नहीं है, लोकतंत्र भागीदारी से चलता है—विश्वास से नहीं।” भारत में साइमन कमीशन की मानसिकता अभी भी जीवित है—बस फर्क यह है कि अब अंग्रेज नहीं, UPSC से निकले ‘भारतीय अंग्रेज’ शासक बन बैठे हैं।
भारत के नेतागण ही सुधार कर सकते है। श्री अनुराग ठाकुर ने कदम उठाया था। लेकिन ये धूर्त और मक्कार नौकरशाही ने ऐसा नहीं होने दिया। ये तो 1947 के पहले के ही भारत में रहना चाहते है। सुधार इनको नहीं चाहिए। इनको तो ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे ये अपने सरकारी आवास में स्विमिंग पूल टैक्सपेयर के पैसे से खुदवा ले और कोई कुछ ना बोल पाए। ऐसी मानसिकता की नौकरशाही लोकतंत्र के लिए श्राप है।
जब बेरोजगारी इतनी ज़्यादा हो देश में उस समय अगर मुझे अच्छा लगें कि अच्छा हुआ कि मुझे इन भ्रष्टाचारियों के गैंग ने इस cartel द्वारा शासित भ्रष्ट विभाग से निकाल दिया तो इससे बड़ा फीडबैक मैं क्या दे सकता हूँ ।
श्री प्रदीप कुमार के साथ जो एक केंद्र सरकार के विभाग में हुआ वो ना ही निंदनीय है बल्कि आईआरएस के गैंग और भ्रष्टाचार की पोल खोलता है। ऐसे गैंग को तुरंत डिस्मेंटल कर देना चाहिए। इसमें से कई सैकड़ो करोड़ के मालिक है।प्रमोशन में किए गए भ्रष्टाचार की जांच कर इसमें जेबें गर्म करने वाले सभी अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए।
@DoPTGoI@DrJitendraSingh@PIB_India@RahulGandhi@rashtrapatibhvn@khurpenchh@cgstdelhizone@CGSTMumbaiAudit@PMOIndia@DainikBhaskar@JagranNews@sgaiceia@OfficeCATDelhi@DelhiHighCourt@indSupremeCourt
These bureaucrats are root cause of corruption, inefficiency and injustice in India. Making them judge is a danger to a justice system. They carry their inefficiency and corruption with them.
It is with a heavy heart that I reflect on the shocking news of the passing of Shri Mahendra Ranga Sir, the Principal Chief Commissioner. Though our paths were fraught with conflict, and though you never held me in favor—going so far as to play a pivotal role in the termination of my service—I had always hoped to meet you one day. To look you in the eye and say, “Sir, there was never anything personal. My only aim was to reform the system, to create a space where honest, dedicated officers could thrive and truly serve the public.”
I wanted to admire you, Sir, I truly did. But I could not—I cannot—turn a blind eye to injustice or a system riddled with corruption. My fight, as an association leader, was never for myself alone. It was for everyone—for you, for the IRS, for Gr. B, Gr. C, for the department, and for the nation. It was a fight to ensure that every officer had a fair chance to grow, that integrity was rewarded, and that the system worked for the people it was meant to serve.
You were a man of intellect, an avid reader, and even some of my own people held you in high regard. You may never know this, but there was my small contribution to the conversion of your writings into book form. I filed complaints because I believe everyone must be held accountable. That is the foundation of a just system.
Yes, perhaps it was because of you that I was removed from my service. But I hold no bitterness, no grudges. Not then, not now. You once told me I was committing harakiri, and in a way, perhaps I was. But I did what I believed every officer of the CBIC should do—what every officer who truly loves this department and public service should do. My battle was never against individuals; it was against a system that stifles transparency, integrity, and accountability. A system that, if reformed, could drastically reduce corruption instead of perpetuating a feudal structure that breeds it.
Yes, my removal perhaps upset me momentarily. But in the grand scheme of things I believe I lost far bigger things in my life. So, I actually took it as a new opportunity. Still, I remain steadfast in my belief that the fight was worth it.
Sir, if I ever hurt you, I am truly sorry. What you did was to preserve the system as it stood which might be beneficial to you people, and what I did was to challenge it to make it beneficial for everyone including citizens. We were on opposite sides of a war, but even wars cannot extinguish admiration, respect, or love. I hope, wherever you are, you understand that my intentions were never personal. They were always for the greater good—for a system that serves the people, for a nation that deserves better.
Rest in peace, Sir.
@cbic_india@sgaiceia@CGSTJAIPURZONE@FinMinIndia@IRS_CIT@PIB_India@cgstluckzone@PMOIndia@aiceia_lko@aiceia_lko
प्रोन्नति में करोड़ो की लगातार घूसखोरी -३
मैंने @nsitharaman जी को इस बिना रिक्तियों के कैबिनेट द्वारा मंजूर पदों के ऊपर जा के सैकड़ो - हज़ारों की तादात में किए गए प्रमोशन और १० साल की वेतन वृद्धि और मामला प्रकाश में आ जाने के बावजूद इन भ्रष्ट प्रोन्नति को वापिस करने पर निर्णय ना ले कर लाखों करोड़ों की कमाई करने की जाँच का पत्र लिखा तो महा भ्रष्ट अधिकारियों ने मिल कर मुझे नौकरी से निकाल दिया , संगठन की तरफ़ से चिट्ठी लिखने के जुर्म में।
पहले सभी मुख्य आयुक्तों के विरोध और कैट मुंबई के आदेश के विरोध में जा के कुछ बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने अथॉरिटी का दुरुपयोग करके प्रोन्नति करा दी । और उनके आगे आने वाले भाई बंधु इसको सही करने के बजाय इस भ्रष्टाचार पर काली कमाई करते रहे ।
अब मुझे निकालने के बाद जब माननीय कैट की प्रधान बेंच ने इन्हें ही समिति बना के सब गंदगी को समेटने को कहा तो कुछ और लोगो को पैसा कमाने का मौक़ा मिल गया । DoLa और जॉइंट सेक्रेटरी एडमिन ने जब तक कोर्ट में मामला था अपने ही स्टैंड के विपरीत जाते हुए , भ्रष्ट प्रमोशन को सही ठहराने लगे । @DoLA ने तो अपना कमेटी के सामने लिखित संस्तुति ही बदल दी और जॉइंट सेक्रेटरी उसके आगे जाते हुए पहले तो जबरिया अपना ग़लत dissent note लिखा फिर कमेटी के रिपोर्ट को एक महीने तक दबाए रखा जिससे प्रमोशन करने के इच्छुक और कमेटी में प्रोन्नति में भ्रष्टाचार के विरुद्ध टस से मस ना हुए लखनऊ जोन के PCC रिटायर हो जाए ।
उसके बाद भी @cbic_india और JS (एडमिन) का खेल रुका नहीं , इन्होंने एक मनमानी चिट्ठी हैदराबाद को कमेटी के रिपोर्ट के ऊपर जा के जारी कर दी और फिर उसे वापिस ले लिया ।ये चिट्ठी जारी करना और वापिस लेना दर्शाता है कि अपने निजी स्वार्थ के लिए ये भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी युवा लोगो के ना केवल करियर से खिलवाड़ कर रहे है अपितु भ्रष्टाचार के ऊपर भी भ्रष्टाचार कर अपनी जेबें भर के एक बार फिर पूरे मामले में रायता फैला कर कोर्ट में उलझने का प्रयास कर रहे है ।
आखिर कमेटी के रिपोर्ट के बाहर जा कर पत्र निकालने का क्या मकसद जब ये ख़ुद कमेटी में थे? इनके ऊपर विभागीय जांच तुरंत शुरू होनी चाहिए ।
इस प्रकरण का समाधान करने के बजाय अपनी जेबें भर रहे अधिकारियों की इस मामले में वृस्तित जांच कर इनकी चल और अचल संपत्ति और इनके कार्यों की जांच @CBIHeadquarters के द्वारा होनी चाहिए । जल्द ही इसके लिए हाई कोर्ट में writ दायर की जाएगी ।
@cbic_india@FinMinIndia@nsitharaman@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@RahulGandhi@PIB_India@DoPTGoI@khurpenchh@VivekGa54515036
थोड़ी सी अफरातफरी मचाओ और उसी अफरातफरी पर अवैध कमाई करो—यही है @cbic_india के IRS नौकरशाही की कठोर सच्चाई। सभी लोग फाइलों के ऊपर बैठे हुए हैं; पिछले सात वर्षों से @cgstluckzone में कोई पदोन्नति नहीं हुई है, जिसके चलते अनगिनत ग्रुप बी अधिकारियों के करियर बर्बाद हो गए हैं। इस विभाग को भारी नुकसान हुआ है।
स्थिति और बिगड़ गई जब दिल्ली के सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने अधिकारियों को पदोन्नति से संबंधित निर्णय लेने का निर्देश इन्ही को करने को दे दिया। इसे भ्रष्ट सरकारी नौकरों ने अपने स्वार्थी एजेंडों को आगे बढ़ाने का एक और अवसर माना। संयुक्त सचिव (प्रशासन), जो पहले सुप्रीम कोर्ट में यह साबित करने वाले शपथ पत्र के प्रमुख सरकारी नौकर थीं कि अनुमत संख्या से अधिक पदोन्नति करना गलत है, अचानक अपना रुख बदल गईं। उन्होंने बिना तर्कसंगत आधार के इस कदम का समर्थन करना शुरू कर दिया, और बोर्ड के एक सदस्य ने तो इस दोषपूर्ण निर्णय को पारित करने के लिए अनावश्यक दबाव भी डाला।
सबसे चौंकाने वाली बात (@DoLA) का रवैया रहा। शुरू में, DOLA ने एक ईमेल भेजा था जिसमें स्पष्ट किया गया था कि अनुमत संख्या से बाहर पदोन्नति करना गलत है, और इस कदम को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। फिर मात्र 24 घंटों में, उन्होंने पाँच पृष्ठों का एक विरोधाभासी पत्र जारी कर दिया, जो अन्य लाभार्थी पक्ष के तर्कों की नकल करते हुए जटिल तर्कों के माध्यम से पदोन्नति को उचित ठहराता था। यह अचानक रुख परिवर्तन न केवल पेशेवराना ढंग से असंगत था, बल्कि प्रणाली में गहरी हेरफेर और भ्रष्टाचार को भी उजागर कर गया। सौभाग्य से, @DoPTGoI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस हेरफेर का समर्थन करने से इनकार कर दिया और इसके खिलाफ मजबूती से खड़े रहे।
तो, DOLA ने अचानक अपना रुख क्यों बदला? यही DOLA है जिसने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दायर किया था, यह साबित करते हुए कि अनुमत संख्या से अधिक पदोन्नति करना गलत है। सच्चाई यह है कि ये लोग असली लोकसेवक नहीं हैं; अगर भारतीय नौकरशाही के पास नागरिकों की जिंदगी बर्बाद करने की शक्ति न होती, तो इनकी कोई इज्जत भी नहीं होती।
CBIC के ग्रुप बी अधिकारियों के साथ लंबे समय से दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जा रहा है, जिन्हें लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
2001 के कैडर पुनर्संरचना में, सरकार ने निरीक्षक पदों की संख्या 22,000 से घटाकर 18,000 कर दिया था, और इसके संतुलन के लिए 3,000-4,000 अधीक्षक पद बनाए गए।
लेकिन असली समस्या हुई भ्रष्टाचार, हेरफेर और धोखाधड़ी से। 2002-03 में अनुमत संख्या नई पुनर्संरचना के अनुसार थी, फिर भी 2007-08 और 2011-12 में, बोर्ड के सरकारी नौकरों ने भ्रष्ट आचरण के जरिए एक अदालत मामले का सहारा लेते हुए निरीक्षक पदों की संख्या को पीछे से 22,000 तक बढ़ा दिया। उच्च न्यायालय ने उन्हें फटकार लगाई, लेकिन भ्रष्ट नौकरों ने रिश्वतखोरी और कागजी कार्रवाई के जरिए मामले को आगे बढ़ने से रोकते रहे। इतनी अफरातफरी मची कि आज तक मामला अनसुलझा है।
कृपया इस मामले की गहराई से जांच करें: @CBIHeadquarters, @nsitharaman, @FinMinIndia। इस गड़बड़ का कड़ा से कड़ा दंड मिलना चाहिए। अवैध तरीके से पैसा कमाने की इस अफरातफरी को रोकना अनिवार्य है।
अब फाइलें बोर्ड में पड़ी हैं, और उसपर कुंडली मार कर कुछ भ्रष्ट आईआरएस नौकर बैठे हैं। ये लोग कुप्रशासक हैं; CBIC का समग्र सुधार और पुनर्गठन अनिवार्य है।
भ्रष्टाचार का उत्साहवर्धन @cbic_india
प्रमोशन में भ्रष्टाचार धुआँधार
आख़िर @IRS_CIT भ्रष्टाचार क्यों न करे? क्यों न पूरे विभाग को भ्रष्टाचार में लिप्त रखकर अपना गैंग बनाकर राज करे? करदाताओं की तो बात ही छोड़ दीजिए, यहां HR पॉलिसी, SSF, केबिन, ऑफिस खर्चे और गाड़ियों तक में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा हो चुकी है।
भ्रष्टाचार अब उत्साहपूर्ण बन चुका है।
क्योंकि यहां किसी को सज़ा मिलनी नहीं है। @dgovcbic ने तो IRS को बचाने और ग्रुप बी कर्मचारियों को फंसाने के लिए पूरा तंत्र तैयार कर रखा है।
अब देखिए, साल 2001 में कैडर रिस्ट्रक्चरिंग आई। कैबिनेट और डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर ने @cbic_india में इंस्पेक्टर्स और सुपरिंटेंडेंट्स की निश्चित पदों की संख्या निर्धारित की। इसमें इंस्पेक्टर्स की संख्या घटाई गई और सुपरिंटेंडेंट्स की बढ़ाई गई।
2004-05 तक प्रमोशन और रिटायरमेंट से यह sanctioned strength पूरी भी हो गई।
लेकिन फिर अचानक, एक कोर्ट केस का बहाना बनाकर, जिसका वेकेंसी से कोई लेना-देना नहीं था, सरकार की नीति को ताक पर रख दिया गया।
2007 और 2011-12 में @cbic_india ने मुख्य आयुक्तों और CAT मुंबई के स्पष्ट निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए sanctioned strength से ऊपर जाकर हजारों प्रमोशन कर दिए।
क्या हुआ इसके बाद?
फिर शुरू हुआ कोर्ट केस और कमेटियों का खेल।
जिस विभाग में इंस्पेक्टर्स को बैठने की जगह तक नहीं दी जाती, जहां कागज और प्रिंटर की स्याही तक कर्मचारियों को अपनी अवैध कमाई से खरीदनी पड़ती है, वहां हजारों अवैध प्रमोशन कानून को ताक पर रखकर किए गए, फ्री में तो नहीं होंगे ।
इसके बाद खेल शुरू हुआ इन प्रमोशनों को बनाए रखने का, पैसे का खेल फिर चालू ।
16-18 साल से यह भ्रष्टाचार चलता रहा। लेकिन सबने खा-पीकर अपनी जेबें भर लीं और निकल गए। किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ।
मैंने @nsitharaman जी को एसोसिएशन के माध्यम से इस भ्रष्टाचार की जांच के लिए शिकायत की। लेकिन इन 500-1000 करोड़ के भ्रष्टाचारियों ने मुझे नौकरी से ही निकाल दिया।
तो, @cbic_india में मस्त भ्रष्टाचार कीजिए और साथ में देश सेवा का ढोंग भी कर लीजिए।
क्योंकि यहां भ्रष्टाचार IRS का अधिकार है!
इन्होंने इतना रायता फैलाया कि कोर्ट ने भी १६-१८ साल बाद इसपर कुछ निर्णय ना दे कर, इन्ही को निर्णय करने को दे दिया । कुछ का खेल फिर शुरू है ।
तो खोया किसने- विभाग में अव्यवस्था, टैक्सपेयर के सैकड़ो करोड़ अवैध प्रमोशन की सैलरी और कोर्ट केसेस में गए , DR इंस्पेक्टर के single promotion का career बर्बाद हो गया।
पाया किसने: भ्रष्ट अधिकारियों ने
और इन्हें UPSC को भारत में प्रशासन का पुरोधा बताया जाता है । उल्टा ये कुप्रशासनिक है । कुप्रशासन एवं भ्रष्टाचार पर ही फलते फूलते है ।
@FinMinIndia@CBIHeadquarters@narendramodi@DoPTGoI@CVCIndia@RahulGandhi@AmitShah@cgstluckzone@khurpenchh@PIB_India
@narendramodi@PMOIndia@nsitharaman@mppchaudhary@DrJitendraSingh@cbic_india@DoPTGoI@dghrd_cbic@PIB_India
Cadre Restructuring in CBIC has been pending since 2018, with the last official meeting between the authority side and Staff side conducted in that year. However, since then, no official meeting has been held for over six years. Consequently, all associations of Group-B & C are kept in the dark about cadre restructuring, as has been the historical trend. Previous cadre restructuring efforts have overwhelmingly focused on uplifting the IRS cadre, while neglecting other groups. Therefore, we request to include at least one member from every recognized association, as is the practice in CBDT, to ensure fair representation and transparency in the cadre restructuring process.
#Justice4Abhijat. @narendramodi@PMOIndia@nsitharaman@FinMinIndia@mppchaudhary@cbic_india@cgstluckzone@PIB_India
It is HIGH TIME
-to raise our voice
-to strengthen our unity
-to highlight the prevalent injustice towards Group-B in CBIC.
The sentiment of about 13000 Inspectors against Arbitrary Order No.05/2024 dated 12.03.2024, issued by Shri K P Singh, Principal Commissioner CGST Lucknow for removing Shri Abhijat Srivastava from service will take a form of nation wide peaceful lunch hour demonstration 03.05.2024.
#Justice4Abhijat.
#Justice4Abhijat. @narendramodi@PMOIndia@nsitharaman@FinMinIndia@mppchaudhary@cbic_india@cgstluckzone@PIB_India
It is HIGH TIME
-to raise our voice
-to strengthen our unity
-to highlight the prevalent injustice towards Group-B in CBIC.
The sentiment of about 13000 Inspectors against Arbitrary Order No.05/2024 dated 12.03.2024, issued by Shri K P Singh, Principal Commissioner CGST Lucknow for removing Shri Abhijat Srivastava from service will take a form of nation wide peaceful lunch hour demonstration 03.05.2024.
#Justice4Abhijat.