असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया - देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
और इस बलिदान के बदले मिला क्या?
15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं।
यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।
ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुँह फेर लेती है।
खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है।
यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं। और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।
हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं। कांग्रेस का साफ वादा है - हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा। क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
(CAPF Bill 2026)
@RajyaSabha @LokSabhaSpeaks
आदरणीय सांसदगण, राज्यसभा एवं लोकसभा,
जय हिंद!
आज प्रश्न किसी एक बिल का नहीं है —
आज प्रश्न है न्याय बनाम अन्याय का।
जिन वीरों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, जिनकी वर्दी पर पूरे देश को भरोसा है, जिनके पहुँचते ही अराजकता थम जाती है और निष्पक्षता का विश्वास स्थापित होता है — आज उसी CAPF के स्वाभिमान और अधिकारों पर प्रहार करने का प्रयास हो रहा है।
पुलवामा में देश ने देखा था —
ये केवल शब्द नहीं होते कि “हम अपना जीवन और रक्त राष्ट्र को समर्पित कर देंगे”,
बल्कि हमारे वीर वास्तव में ऐसा करके दिखाते हैं।
और आज उन्हीं वीरों के साथ यह सरकार अन्याय का कलंक लगाने जा रही है।
ये वही बल है, जिसके बलिदान पर आँसू बहाए जाते हैं, सम्मान के शब्द कहे जाते हैं —
लेकिन आज इस बिल के माध्यम से उनके स्वाभिमान को सदैव-सदैव के लिए अपने बूटों तले कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
इन बलों ने अपनी लड़ाई संविधान के भीतर रहकर लड़ी।
न्यायालयों के द्वार पर गए।
और सुप्रीम कोर्ट ने उनके अधिकारों को मान्यता दी।
जब संविधान की व्याख्या का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को है, तब उस निर्णय को निष्प्रभावी करने का प्रयास — क्या यह न्याय है?
कुछ तर्क दिए जा रहे हैं कि “विधायिका अपना अधिकार क्यों छोड़े” —
पर यह तर्क खोखला है।
संविधान ने हर संस्था की मर्यादा तय की है।
जहाँ न्यायालय का क्षेत्र है, वहाँ उसका सम्मान ही लोकतंत्र की आत्मा है।
आज इस सदन में देश के सर्वश्रेष्ठ विधि-ज्ञान से संपन्न मस्तिष्क उपस्थित हैं —
@KapilSibal@VTankha
और अन्य अनेक।
यहाँ तर्क की परीक्षा होगी, और राष्ट्र एक-एक शब्द को सुनेगा।
जो शब्द न्याय के पक्ष में होंगे — वे इतिहास में अमर होंगे,
और जो अन्याय के पक्ष में होंगे — वे जनमानस में स्थायी पीड़ा बनकर अंकित हो जाएंगे।
संसद के इतिहास में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं, जब राजनीति से ऊपर उठकर संसद को तय करना होता है कि वह न्याय के पक्ष में खड़ी होगी या अन्याय के पक्ष में।
सौभाग्य से आज वही क्षण आपके सामने है।
मैं विशेष रूप से सत्ता पक्ष के माननीय सांसदों से निवेदन करना चाहता हूँ —
अटल बिहारी वाजपेयी जी के शब्द आज भी मार्गदर्शक हैं:
“सत्ताएं आएंगी जाएंगी, लेकिन राष्ट्र एक रहना चाहिए, देश एक रहना चाहिए।”
और राष्ट्र तभी एक रहता है, जब न्याय जीवित रहता है।
आज एक और गंभीर चिंता सामने है —
CAPF की जो सबसे बड़ी पहचान रही है — निष्पक्षता, साहस और संविधान के प्रति अटूट निष्ठा,
उसी को इस बिल के माध्यम से कमजोर करने का प्रयास दिख रहा है।
यह आशंका प्रबल होती है कि इन बलों की कमान एक विशेष ढांचे के अधीन केंद्रित कर
उन्हें भविष्य में चुनावों या सत्ता के हितों के अनुरूप उपयोग करने योग्य एक मशीनरी में बदल दिया जाए।
यदि ऐसा होता है, तो यह केवल एक बल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का प्रश्न बन जाएगा।
स्वामी विवेकानंद का आह्वान आज भी गूंजता है:
“उत्तिष्ठत, जाग्रत, और न्याय-पथ पर अग्रसर हो जाओ।”
और भारत के महान ग्रंथ तिरुक्कुरल का संदेश —
“अरासन नीतियिनाल निलैक्कुम;
नीति इलायेल अरसु निलैयादु।”
(अर्थात: न्याय से ही राज्य टिकता है; न्याय के बिना राज्य नहीं टिक सकता।)
रामसेतु के निर्माण में गिलहरी के छोटे-छोटे प्रयासों को भी भगवान ने आशीर्वाद देकर अमर कर दिया था।
आज राष्ट्र देखेगा — जो न्याय के पक्ष में खड़ा होगा, उस पर भी राष्ट्र अपना आशीर्वाद अंकित करेगा;
और जो शकुनी की तरह कुटिल चालों से CAPF को अन्याय की दलदल में धकेलने का प्रयास करेगा —
उनके प्रत्येक शब्द और उनके प्रत्येक निर्णय इतिहास में सदा के लिए कलंक के रूप में अंकित हो जाएंगे।
जब भी हम अपने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के परिवारों से मिलते हैं,
हम उनके प्रति अपनी कृतज्ञता और राष्ट्र की श्रद्धा अर्पित करते हैं।
लेकिन यदि यह अन्यायी कानून लागू हो गया —
तो आप स्वयं सोचिए, आप उन बलिदानी परिवारों से आँख कैसे मिला पाएंगे?
कृपया उस क्षण की कल्पना कीजिए —
जब वे आपसे पूछेंगे:
“आप संसद में थे, फिर आपने हमारे साथ यह अन्याय क्यों होने दिया?”
आज संसद की कलम के सामने वह क्षण खड़ा है —
या तो यह कलम उन राष्ट्रभक्तों के सम्मान में “जय” लिखेगी,
या उनके भाग्य में सदा के लिए अन्याय की पीड़ा और व्यथा अंकित कर देगी।
आज यह भी तय होगा —
कि आपके शब्द फूल बनेंगे,
या उन वीरों के हृदय को विदीर्ण करने वाले काँटे।
राष्ट्र देख रहा है।
इतिहास प्रतीक्षा कर रहा है।
उठिए, जागिए, और न्याय के पक्ष में खड़े हो जाइए।
जब तक है हम — राष्ट्र प्रथम 🇮🇳
जब तक है दम — राष्ट्र प्रथम 🇮🇳
भारत माता की जय 🇮🇳
जय
@PMOIndia@HMOIndia@narendramo@RahulGandhi
@crpfindia@HMOIndia@PIBHomeAffairs My heartfelt condolences to his bereaved family and Adaranjali to the departed soul. He ll remain in my heart like an elder brother who is liked by one and all.
https://t.co/OKfZ4Ljy22आदरणीय @narendramodi जी,
आप केवल एक प्रधानमंत्री नहीं, करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा पुरुष हैं।
भारत की सुरक्षा और सम्मान के लिए आपके निर्णयों पर हर देशवासी को गर्व है।
मोदी जी, जब 90 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था,
और जब वहाँ की स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था एवं नेतृत्व
उन परिस्थितियों से प्रभावी रूप से निपटने में असफल सिद्ध हो रहे थे,
तब CAPF के नेतृत्व और अधिकारियों ने आगे बढ़कर
स्थिति को संभाला और अपनी कुर्बानियों से
भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखा।
कश्मीर हो, पंजाब हो, या नक्सल प्रभावित क्षेत्र—
जब-जब स्थानीय तंत्र कमजोर पड़ा,
तब-तब CAPF के नेतृत्व और अधिकारियों ने
निर्णायक भूमिका निभाई।
मोदी जी,
CAPF ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है—
बिना किसी शर्त, बिना किसी अपेक्षा के।
लेकिन आज जब बात उनके अपने अधिकारों की है,
तो एक गंभीर प्रश्न खड़ा होता है—
क्या 20 वर्ष सेवा देने वाला अधिकारी
5 वर्ष सेवा वाले से जूनियर हो जाए—
क्या यह न्याय है?
और जब सर्वोच्च न्यायालय ने
लंबी और विस्तृत सुनवाई के बाद न्याय दे दिया है,
तो उसे लागू करने में देरी क्यों?
मोदी जी,
न्याय अगर पूरा न हो, तो वह अन्याय बन जाता है।
आपसे विनम्र निवेदन है कि
इस विषय में जो भी निर्णय लिया जाए,
वह पूर्ण तथ्यों, पारदर्शिता और न्याय के आधार पर लिया जाए—
क्योंकि अंततः देश की नज़र में हर निर्णय
आपके नेतृत्व से ही जुड़ा होता है।
हमारी परंपराएँ भी हमें यह सिखाती हैं कि
अनुमान या अधूरी जानकारी पर लिया गया निर्णय,
कभी-कभी वैसा ही अनपेक्षित परिणाम दे सकता है
जैसा एक क्षणिक भूल ने श्रवण कुमार जैसे निर्दोष के जीवन को प्रभावित किया था।
आदरणीय मोदी जी,
आज आपके पास एक स्वर्णिम अवसर है—
अपने ही राष्ट्रवीरों के साथ न्याय सुनिश्चित करने का।
आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि
इस न्याय को लागू करिए और
जो अन्याय हो रहा है उसे रोकिए।
CAPF के इन सपूतों के साथ न्याय करिए।
@BJP4India@INCIndia@samajwadiparty@AITCofficial@arivalayam @proframgopalya
#CAPF #JusticeForCAPF #ParamilitaryForcesAgainstBadLaw
*मोदी जी, आज आपकी कलम की नोक पर इतिहास और वीरों का सम्मान है।*
“कलम, आज उनकी जय बोल…”
आदरणीय @narendramodi जी,
राष्ट्र अपने वीरों के बलिदान को स्मारकों में अमर करता है—यह निश्चय ही राष्ट्र के गौरव का विषय है। परंतु किसी भी महान राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसके स्मारकों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने जीवित वीरों के सम्मान और न्याय की रक्षा कैसे करता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने CAPF के वीरों की तपस्या, उनके बलिदान और राष्ट्र की एकता-अखंडता की रक्षा में उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए उनके साथ न्याय किया है। यह केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि उन लाखों प्रहरी जवानों के त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है।
किन्तु यदि अब ऐसा कोई विधेयक लाया जाता है जो उस न्याय को पुनः अन्याय में बदल दे, तो यह उन शूरवीरों के सम्मान को गहरे अपमान और पीड़ा के उस अंधकार में धकेल देगा—जो हर दिन अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं।
मोदी जी, आज आपकी कलम की नोक पर इतिहास ठहरा हुआ है।
आपकी कलम की एक रेखा उन शूरवीरों के सम्मान को आकाश तक पहुँचा सकती है—
जो हर दिन अपने सिर को तलवार की नोक पर रखकर राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा करते हैं।
और वही एक रेखा उन्हें सदैव के लिए अपमान के उस गर्त में भी धकेल सकती है,
जिसकी पीड़ा आने वाली पीढ़ियाँ भी भूल नहीं पाएँगी।
आज यदि आपकी कलम वीरों के सम्मान की रक्षा करती है,
तो “कलम, आज उनकी जय बोल” की पुकार केवल कविता की पंक्ति नहीं रहेगी—
वह भारत की आत्मा का सत्य बन जाएगी।
और उस क्षण, राष्ट्रकवि दिनकर की आत्मा भी संतृप्त हो उठेगी,
जब उनकी कलम से निकली पुकार को आप शासन की आत्मा और राष्ट्र के निर्णय में उतार देंगे।
मोदी जी, आपसे करबद्ध निवेदन है—
कृपया राष्ट्र की भावना को समझिए।
आज आपकी कलम केवल एक निर्णय नहीं लिखेगी,
वह भारत के वीरों के सम्मान का इतिहास लिखेगी।
कृपया अपनी कलम उठाइए—
ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह कह सकें कि जब वीरों के सम्मान की घड़ी आई,
तो भारत की सत्ता की कलम ने न्याय को ही चुना।
@narendramodi@BJP4India@INCIndia@samajwadiparty@AITCofficial@arivalayam@proframgopalya1
#CAPF #Paramilitary #JusticeForCAPF #ParamilitaryAgainstBlackLaw
जब तक है दम — राष्ट्र प्रथम।
जब तक है हम — हम राष्ट्र प्रथम।
भारत माता की जय।
T
3 tips to Team India for T20 WC.. field setting by bowlers and bowl to compel batters, best efforts on field, play to the merit of balls, build partnership.
Team india shd learn from English team, look how have their spin bollers bowled against NZ today, we have world top spinners who hardly leave any impact on the batters. Team india shd also think on adding third spinner like bishnoi in place of Dubey, Since Axar is an allrounder.
What happened in Katihar is absolutely unacceptable.A brother and sister going out for dinner should never be treated with suspicion or humiliation by those meant to protect them. Police officers have no right to invade people’s privacy or question family relations without reason
वाह! दो नन्हे-मुन्ने बच्चों ने तो कमाल कर दिया 💫
इनका डांस देखकर दिल खुश हो गया ❤️
इतनी छोटी उम्र में इतना शानदार प्रदर्शन — सच में लाजवाब 👏
हर स्टेप में आत्मविश्वास और हर मूव में मासूमियत झलक रही थी 🌟
ईश्वर करे ये दोनों बच्चे यूँ ही आगे बढ़ते रहें और अपने टैलेंट से सबका दिल जीतते रहें ❤️
"🐕🦺 Golden Paws of Glory! 🏅 | Pawsome Victory! 🥇
CRPF’s K9 Baisha wins GOLD in Narcotics category at the 68th All India Police Duty Meet 2025, Ranchi—a proud moment for the Force.
Kudos to the K9 team for their relentless hard work!
#K9Baisha#CRPF#DBTS#AIPDM2025