एक तरफ़ गंगा का बढ़ता जलस्तर, दूसरी तरफ़ बाढ़ की मार झेल रहे वे परिवार, जो कई दिनों से चैन की नींद तक नहीं सो पा रहे हैं। और इसी के बीच करोड़ों रुपये खर्च कर जन्मदिन का भव्य उत्सव मनाया जा रहा है।
मैं बार-बार कहूँगी कि हमें युद्ध नहीं चाहिए…
लेकिन पहलगाम के दोषी आतंकवादियों के सिर अभी भी चाहिए…
क्या ये दोनों बातें समझना इतना ज़्यादा कठिन है?
चार आतंकवादियों के सिर लाने के लिए पूरे देश को युद्ध में झोंक देना कहाँ की समझदारी है?
इस लड़ाई में हमारे जवान शहीद हुए…नागरिक मारे गए…देश को क्या मिला?
@narendramodi
*वृक्षों पर सजती है पत्तो कि बहार*
*हरियाली से महकता है प्रकृति का व्यवहार*
*ऐसा सजता है गुडी पाडवा का त्यौहार*
*मौसम ही कर देता है नववर्ष का सत्कार*
*गुड़ी पाडवा और मराठी नूतन वर्ष की शुभकामनाएं...!!!*
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