छत्तीसगढ़ : सरकारी कार्यक्रम में करोड़ों का घोटाला- 3 दिन के प्रोग्राम में ₹6 करोड़ खर्च, 3 करोड़ के तंबू, फूल माला पर 28 लाख खर्च हुए
#Chhattisgarh#Investigation
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कांग्रेस के 4 मुख्यमंत्री - 3 NSUI की पृष्ठभूमि से (हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और केरलम)
भाजपा के 17 मुख्यमंत्री - 4 कांग्रेस पृष्ठभूमि से (असम, अरूणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, बंगाल इनमें से भी 2 NSUI की पृष्ठभूमि से), 2 अन्य पार्टी की पृष्ठभूमि से आए (बिहार और मणिपुर), मात्र 2 ABVP की पृष्ठभूमि से (मध्यप्रदेश और दिल्ली), 2 ऐसे जो 5-5 साल पहले भाजपा में सक्रिय हुए और सीधे मुख्यमंत्री बन गए (गुजरात और राजस्थान)
भाजपा के दलाल @MediaHarshVT दरी बिछाना ठीक से सिख ले और विपक्ष के नेताओं का पूरा सम्मान कर पता नहीं कब किसको बाप बना कर सर पर बैठा देंगे मोदी-शाह फिर उसी के पीछे 5000-10000 का जुगाड़ जमाने के लिए चैनल की भीख मांगता घूमेगा
शाकाहारी भोजन लोगों को बीमार कर रहा है. दाल चावल और रोटी में अत्यधिक कार्ब्स (कार्बोहाइड्रेट) लोगों को बीमार कर रहा है.
यह एक मिथ है कि डायबिटीज केवल शुगर खाने से होती. डायबिटीज अत्यधिक कार्ब्स युक्त भोजन खाने से भी होती है.
लिवर की क्षमता केवल 100 ग्राम के आसपास कार्बोहाइड्रेट स्टोर करने की क्षमता है. हम 100 ग्राम से ज्यादा कार्ब्स रोज खाते हैं.
100 ग्राम गेंहू में 70 ग्राम कार्ब्स
100 ग्राम चावल में 80 ग्राम कार्ब्स
100 ग्राम दाल में 60 ग्राम कार्ब्स
वही मांसाहारी भोजन में शून्य कार्ब्स होता है.
एक अंडे में 0.5 या 1 ग्राम कार्ब्स
चिकन में 0 कार्ब्स
मछली में 0 कार्ब्स
मटन में 0 कार्ब्स
बकरी में 0 कार्ब्स
ज्यादा मांसाहारी भोजन से हम डायबिटीज जैसी बीमारियों दूर रख सकते हैं. वैसे खीरा, पालक, फूलगोभी, ब्रोकली, पत्तागोभी, बैंगन, लौकी, तोरी और टमाटर में 100 ग्राम सब्ज़ी में 7 ग्राम से कम कार्ब्स होता है.
निर्णय आपके हाथ में है. आज कल के हाइब्रिड गेंहू कार्बोहाइड्रेट और ग्लूटेन ज्यादा होता है.
Gen Z नाराज है ?
ज्ञानेश कुमार-समाधान है ना ,उन्हें वोटर नहीं बनने देंगे ।
बाक़ी स्टूडियो मीडिया उन्हें अर्बन नक्सल बता ही देगी ?
@anubhutivishnoi जी की शानदार रिपोर्ट
“एंटी इंकम्बेंसी नार्थ कोरिया में नहीं होता है ,सद्दाम हुसैन के यहाँ नहीं होता है और भारत में नहीं हो रहा है। भारत में ये कैसे नहीं हो रहा था उसका पता चल गया”
-राहुल गांधी ,चुनाव आयोग पर हुए खुलासे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस पर
18 के हो गए, वोट डालना चाहते हो - लेकिन वोटर लिस्ट में नाम नहीं है?
ये सब ज्ञानू की वजह है.
दरअसल, चुनाव आयोग हर साल Special Summary Revision (SSR) करता है. इससे नए 18 साल के युवाओं को वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है.
साल 2024 से SSR पर रोक लगा दी गई है. दोनो चुनाव आयुक्त - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी SSR फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ज्ञानू मान नहीं रहा.
यूपी और गोवा में अगले साल चुनाव है - लेकिन अड़ियल ज्ञानू SSR को रोके हुए है.
ये रिपोर्ट Economic Times ने की है.
सत्ता में आते ही
- आरटीआई एक्ट कमजोर किया।
- प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट कमजोर किया।
- चुनाव आयोग को सीधा कब्जे में लिया।
- देश लूटने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड लाए।
- काला धन सफेद करने के लिए नोटबंदी की।
- हथियार दलाली को वैध बनाया।
- विदेशों में शेल कंपनियों पर कार्रवाई के लिए मौजूद कानून कमजोर किया।
यह पहली सरकार है जिसने आर्थिक घोटाले तो किए ही हैं, कानूनी घोटाले भी किए और लगातार संविधान को रौंदा है। इसने भ्रष्टाचार के अनेक चोर दरवाजे खोलने वाले कानून धड़ाधड़ बनाए। जनता से कहा गया कि 70 साल से पूरा भारत सो रहा था। हम सब सुधार रहे हैं।
यह ऐसी निकृष्ट, भ्रष्ट और बर्बर सरकार है जो देश को ऐसे लूट रही है जैसे ये लोग कोई आक्रांता हों और ये देश इनका है ही नहीं। लूटो और झोला उठाकर निकलो।
किसी भी डेमोक्रेटिक सिस्टम में चुनाव आयोग का खुलासा और वहाँ जो रहा है वह पिछले कई सालों में आए सबसे बड़ी स्टोरी है। सबसे चिंताजनक स्टोरी है। यह UPA के समय आई कई घोटालों की कहानी से कहीं बड़ी और अधिक खतरनाक है।
जो कोई इस स्टोरी को ख़ारिज कर रहे हैं या चुनाव आयोग /सरकार के साथ खड़े हैं वे सभी देश की डेमोक्रेटिक चुनाव प्रोसेस को ख़त्म करने के लिए रची साज़िश का हिस्सा है।
आप उन सबों को देखकर पहचान लीजिए जो इस साजिश का हिस्सा है। ज्ञानेश कुमार के चुनाव सिस्टम को मनमाने तरीके से चलाने के रवैये से सहमत हैं।
The Election Commission of India is under fire like never before.
The SIR has struck 13 crore names off draft rolls, putting the EC at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
HOWEVER, what nobody knew: through that same period, some of the sharpest questions were being asked from inside.
Out today, after months of work. Our #ExpressInvestigation 🧵
(1/10)
राहुल गाँधी एक बार फिर सही साबित हुए!
चुनाव आयोग के वोट चोरी पर जब वे लगातार सवाल कर रहे थे तो कई सहयोगिओं से लेकर अपने दल के नेताओं ने भी उनके इस मुद्दे से दुरी रखने की मंशा दिखाई!
आज एक्सप्रेस के खुलासे के बाद सही साबित हो गया की यह कितना बड़ा और गंभीर मसला है!
उम्मीद करते हैं की आज सुप्रीम कोर्ट खुलते ही इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेगा!
SIR तीनों इलेक्शन कमिश्नर की देखरेख में हुआ है। लेकिन उनमें से दो, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फ़ैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए और जारी किए गए👇
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🎯चुनाव आयोग के अंदर किसकी मनमर्जी चल रही है?
🎯दो चुनाव आयुक्तों ने नियम पालन न होने की शिकायत क्यों की?
🎯नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में कैसे अड़चन पैदा की गई?
🎯फ़ॉर्म 6 के मामले में सरकार की शक्तियों को ठेंगा क्यों दिखाया गया?
🎯आयोग के जिन अधिकारियों को वोटर जोड़ने और हटाने का हक़ है, उनके हाथ क्यों बांध दिए गए?
🎯देशभर के वोटरों के डेटा को दिल्ली से कंट्रोल करने का चलन क्यों शुरू किया गया?
🎯क्यों 10 महीनों में कम से कम 14 बार और एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज करनी पड़ी?
🎯आपत्तियों के बाद फैसले कैसे ले लिए गए?
🎯और ऐसी नौबत क्यों आई कि चुनाव आयुक्तों के कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करनी पड़ी?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब. हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में. वीडियो देखने के लिए आएं इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
लीजिए जिस SIR प्रोसेस को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार “शुद्धीकरण” बता रहे थे,उस प्रोसेस से उनके दो सहयोगी आयुक्त भी सहमत नहीं रहे। लिखित असंतोष जताते रहे।
भारत के इतिहास में कुछ ख़ास “हित” के लिए आम
लोगों को परेशान और लाखों लोगों को चुनावी प्रक्रिया से दूर करने के लिए SIR प्रोसेस को हमेशा याद रखा जाएगा।
SIR प्रोसेस को हमेशा याद रखा जाएगा कि ताक़त के अहंकार में कोई काम इस तरह क्यों नहीं किया जाए!
ज्ञानेश कुमार जिस तरह एक खास मकसद से मतदाताओं के नाम काट और जोड़ रहा है उसका चुनाव आयोग के अंदर भी विरोध है.
लेकिन भारत के लोकतंत्र के ख़िलाफ़ इस साजिश में ज्ञानेश कुमार को हरी झंडी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दी है.
SIR जैसा कुछ है नहीं संविधान या कानून में जिस्की इजाज़त सुप्रीम कोर्ट ने दे दी और कौन नागरिक है कौन नहीं तय करने का ज़रिया भी दे दिया ज्ञानेश कुमार को.
ज्ञानेश कुमार का मकसद क्या है बिहार और बंगाल के नतीजों से साफ है.
अफ़सोस की सुप्रीम कोर्ट भी नागरिकों के मताधिकार छीनने के अपराध में ज्ञानेश कुमार के साथ आ गया.
सुप्रीम कोर्ट में जज साहिब चौंक रहे हैं कि देश में कैंसर की 2700 की दवा 27000 में बिक रही है।
वैसे 27 हजार क्या अगर 27 लाख की भी मिले तो बस कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों को फर्क पड़ेगा बाकि लोगों को फर्क नहीं पड़ेगा वो तो टीवी पर हिंदू-मुस्लिम की डिबेट और हिंदू राष्ट्र की कल्पना में ही खुश रह लेंगे...
@prabaljudevBJP@vishnudsai 3 साल से अपने जिले का मुख्य मार्ग ना बनवा पाए लानत है आपके जैसे मुख्यमंत्री होने पर! दूसरों को बदनाम करने से बेहतर है कुछ अपने भी काम करें!