भाजपा ने जो नग्नता की है एक व्यक्ति के जन्मदिन पर, उस पर दो केस होने चाहिए:
१. हिन्दू प्रतीकों, आस्था और पर्व को नीचा दिखाने का कि इन्होंने कलश, दीपक, आरती और दीवाली को एक जातिवादी नेता के छवि प्रबंधन के लिए प्रयोग किया
२. पार्टी के नेता के जन्मदिन पर करदाताओं के धन के निरर्थक व्यय का
ये चिरकुट कार्यकर्ता और पार्टी का चटुआ सेल किस बात पर कल को नेहरू और राजीव गाँधी को घेरेगा कि ये युद्धपोत पर पिकनिक मनाते थे?
तुमने भगवान राम की दीपावली पर बने दीपों के रिकॉर्ड को टच करने का सोचा भी कैसे? तुमने दीपावली मनाने का ही कैसे सोच लिया? तुम्हारी औकात है भगवान राम के समक्ष खड़े होने की भी, इस चंदा-चोरी के बाद? तुम पापी लोग भगवान की बराबरी करोगे?
तुम स्वयं को भगवान से ऊपर समझने लगे? हस्ती क्या है तुम्हारी? तुम्हारे वश में सरकारी सर्कुलर भेजना ही अब बचा है क्योंकि लोग भय से, कि सैलरी न कट जाए, नौकरी न चली जाए, दीप जलाएँगे।
और हाँ पापियो! बिहार के बाढ़ की विभीषिका के मध्य तुमने यह नंगई की है और जम्मू-कश्मीर की बाढ़ पर तुमने ज्ञान दिया था सहयोग का। नरेन्द्र मोदी के हैंडल से नेपाल की बाढ़ पर पोस्ट है, पर बिहार पर अभी तक नहीं।
दीपक जला और हमारी जेब भी कि हम जो पैसा सड़क-हॉस्पिटल-स्कूल बनाने के लिए देते हैं, वह एक व्यक्ति के ईगो मसाज के लिए लुटाया जा रहा है ताकि रिकॉर्ड बन सके, फोटो और रील कट सके, इनके नाम के गीत गाए जाएँ।
लज्जा कर लो, यदि बची है तो! और चटुआ सेल, ज्ञान मत देना, तुम्हारा बाप हूँ मैं ज्ञान देने में।
UGC के विरोध में जो भी कंटेंट क्रिएटर , नेता , अभिनेता ,कवि वीडियो बना रहे है। उन सबको सपोर्ट करो। उनका वीडियो शेयर और पोस्ट करके उनका मनोबल बढ़ाओ।
ताकि के खिलाफ माहौल बने और ये यूजीसी नामक काला कानून वापस हो।
१. क्या भाजपा द्वारा संशोधित किया गया ‘मोदी एक्ट’ ‘कम्यूनल वायलेंस बिल’ का बाप नहीं है?
२. क्या भाजपा मध्यप्रदेश में 73% आरक्षण के लिए कोर्ट में नहीं लड़ रही?
३. क्या भाजपा ने 10% EWS की बकलोली कर के सीलिंग ब्रीच नहीं की?
४. क्या भाजपा के काल में लिखने और बोलने वालों पर FIR नहीं हो रही?
५. क्या भाजपा, पत्रकारों को बार-बार हाउस अरेस्ट नहीं करवाती?
६. क्या भाजपा, सवर्णों को प्रदर्शन करने से नहीं रोकती और मौर्या जैसों के सामने नहीं बिछ जाती?
तो, ये सारी हरामखोरी भाजपा कर ही रही है, जो लोग बता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस कर जाएगी। इसलिए, चिल करो।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं कि गैर-जाटव दलितों को अब किसी पार्टी की ज़रूरत नहीं है, वे ऑटो-पायलट मोड पर हैं। बस उनका SC/ST कानून नहीं बदलना चाहिए। उनको अपना हथियार मिल गया है ,ऐसा हथियार, जिससे वे हर पार्टी को ठीक कर सकते हैं।
मोदी सरकार ने दलितों के एक वर्ग को रोजगार का नया अवसर दे दिया है। कुछ करने की ज़रूरत नहीं है, सुबह उठो, थाने जाओ और जिस पर मन हो, उस पर FIR करा दो।
16 लाख कुल आपको मिलना है। तुरंत आपको 8 लाख तुरंत मिल जाएगा, फिर केस की सुनवाई पर और 25 प्रतिशत, और बाकी 25 प्रतिशत फैसला आने पर।
और सबसे बड़ी बात, अगर आपका आरोप झूठा साबित हुआ तो आपको मिले हुए पैसे लौटाने भी नहीं हैं। तो इसलिए वे परवाह ही नहीं करते कि झूठा आरोप लगा रहे हैं या सही आरोप लगा रहे हैं।
पैसा तो मिलेगा ही, बस वो आखिरी वाला 25 प्रतिशत नहीं मिलेगा। बस इतना ही नुकसान है। मतलब, मुनाफे में घाटा है।
सवाल यह है कि अब देखना है BJP इसे कहाँ तक लेकर जाती है।
प्रदर्शन की तो अनुमति देंगे ही नहीं, चार लोग कमरे में बैठ कर बात भी करें, उसके लिए भी अनुमति चाहिए। अब सवर्ण लोग अपने बेडरूम में बच्चे पैदा करने की योजना बनाने से पूर्व भी अनुमति लेंगे सरकार से। तैयार रहो मित्रों!
लगातार आप सब के विचारों के सुनने के उपरांत, हमने एक सरलीकृत माँग पत्र बनाया है। एक बार आम सहमति बन जाए, फिर डिजिटल से धरातल की योजना बनाई जाएगी। तब तक, नीति निर्धारकों के लिए यह पत्र हम सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि उन्हें AI से हिन्दी लिखवा कर, उसमें प्राइवेट में आरक्षण जैसी बकलोली न करनी पड़े।
@JPNadda जी, कॉपी ही करना है, तो ठीक से करो। वैसे, आपको दोबारा झुका देख कर दुख हुआ।
कमाएगा सवर्ण, टैक्स देगा सवर्ण और सब्सिडी मिलेगी SC/OBC को! @BJP4India के पास बैंक में बहुत पैसा है, अपने वोटबैंक को लुभाने के लिए उसे जो करना है अपने पैसे से करो।
इन दोगलों ने आजतक EWS के लिए एक ढंग की स्कीम नहीं बनाई है कि उन्हें भी निःशुल्क कोचिंग, फॉर्म, हॉस्टल और छात्रवृत्ति की आवश्यकता है।
SC/ST/OBC के लिए उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित योजनाएँ/प्रशिक्षण केन्द्र हैं:
१. छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन, लखनऊ
२. आदर्श पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ (केवल महिलाओं हेतु) ३. राजकीय आई०ए०एस०/पी०सी०एस० कोचिंग सेन्टर, नियामतपुर, हापुड़ ४. संत रविदास आई०ए०एस० / पी०सी०एस० पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, वाराणसी ५. डा० बी०आर० अम्बेडकर आई०ए०एस०/पी०सी०एस० पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, अलीगढ़ ६. न्यायिक सेवा प्रशिक्षण केन्द्र, प्रयागराज ७. IAS/PCS पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, गोरखपुर
इसमें सामान्य वर्ग के लिए क्या है? क्या @myogiadityanath या @narendramodi की एक योजना ऐसी है जिसमें सामान्य वर्ग के निर्धन बच्चों को निःशुल्क आवास, कोचिंग, फॉर्म, कोर्स फीस, हॉस्टल फीस की सुविधा है?
किस आधार पर ‘अभ्युदय योजना’ को आगे किया जा रहा है? इस योजना के पाँच लाभार्थी वर्ग में से एक सामान्य वर्ग है! क्या इसमें हर तरह के आरक्षण लगाने के बाद मेरिट लिस्ट नहीं निकाली जाती? तो ये चूरण तो बाँटना बंद कर दो तुम लोग।
‘भागीदारी भवन’ का खर्चा @BJP4UP उठा रही है या @BJP4India? साढ़े पाँच एकड़ में 45% SC, 5% ST और 50% OBC के लिए जो छात्रावास हैं, और जो आर्थिक सहायता जी जा रही है, वो क्या @myogiadityanath जी की सैलरी से फंड हो रहा है?
जो डिफेंड नहीं किया जा सकता, उसको गोलपोस्ट चेंज कर के डिफेंड मत कीजिए। बात ‘भागीदारी भवन’ की है, अभ्युदय योजना की नहीं। और अभ्युदय योजना क्या केवल सामान्य वर्ग के लिए है?
आरक्षितों के लिए सामान्य वर्ग के टैक्स के पैसों से हॉस्टल, कोचिंग और फिर उन्हीं पैसों से ‘अभ्युदय योजना’ जिसमें पुनः आरक्षण! कोई दया कर रही है क्या भाजपा सरकार?
मध्यप्रदेश के शिक्षकों की गुणवत्ता सही रखने हेतु सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2009 से पूर्व के सभी शिक्षकों को TET परीक्षा देनी होगी। फिर मध्यप्रदेश सरकार को लगा कि इसमें कैसे आरक्षण दिया जाए, तो उन्होंने तय किया कि 20-20 वर्ष से अपने विषय पढ़ाते शिक्षकों में भी आरक्षित वर्ग को 10% कम नंबर लाने पर भी उन्हें पास मान लिया जाएगा।
नहीं होगा। 25% क्षमता और 75% आरक्षण के कारण देश 2097 तक भी विकसित नहीं होगा। आपकी आत्मा मरने के बाद आपको कचोटेगी कि मेरे पास सब कुछ था, जनसमर्थन था, संख्या थी, विजन था और मैंने दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत के नाम पर सब बर्बाद किया।
आपके अंबेडकर-फुले प्रेम ने इस देश को बर्बादी की राह पर डाल दिया है।
आरक्षण भीख ही है:
१. मेरिट पर सीट ले नहीं पाते, कोई छोड़ता है तब मिलता है
२. फॉर्म का दाम कम, हॉस्टल-कोर्स फी फ्री, सवर्णों के टैक्स के पैसे से सब्सिडाइज होता है
३. फ्री कोचिंग भी भीख ही है क्योंकि टैक्स का पैसा जाता है
४. हर स्तर पर जितनी भी आर्थिक छूट है, वह भीख ही है जो मेरे जैसे टैक्सदाताओं के पैसे से दी जाती है।
कोई आड़ में कुछ नहीं कर रहा है। मैं कर रहा हूँ, मेरे जैसे लाखों लोग कर रहे हैं। आपको जितने वोट मिलते हैं उससे कई गुणा अधिक लोग। आरक्षण जिस रूप में है, उसको जाना ही होगा। वरना @narendramodi के ‘विकसित भारत’ की योजना केवल ‘दिवास्वप्न’ रह जाएगा।
PM @narendramodi जी के सामाजिक न्याय के मंत्री @RamdasAthawale ने सामान्य वर्ग के बच्चों को 'जाहिल' और 'मानसिक रोगी' कहा है! @RHAreforms ने केवल आरक्षण में सुधारों और इसकी समीक्षा की बात की है, और इसके लिए सरकार हमें 'देशद्रोही', 'जाहिल' और 'मानसिक रोगी' कह रही है।
(विडंबना देखिए कि अनपढ़ नेता उच्चतम कटऑफ वालो को जाहिल बोल रहा है!)
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
मेरे शर्ट के नीचे फटी बनियान हैं आपके स्टूडियो में मै इज्जत ढक के आया हु - नीट टॉपर हर्ष दुबे
हमने परमिशन मांगी इस सरकार ने नहीं दिया
और आतंकियों को परमिशन एयरपोर्ट पर जाके पहुंचाया जाता है
इस देश में 90% बच्चे आत्म हत्या करते है वो सामान्य वर्ग के होते हैं NEET पेपर लीक में जो मरे हैं वो अधिकतर सामान्य वर्ग के है
कोई नहीं बात करना चाहता इसपर
मेरे साथ पढ़ने वाले जिनके बाप हॉस्पिटल हैं बड़ी बड़ी नौकरी थी उनका सिलेक्शन आधे आधे नंबर पर हुआ
आरक्षण केवल जाति आधारित नहीं राज्य अनुसार भी है इस लेवल तक आरक्षण को सिस्टम में घुसा दिया गया है
560 में यूपी बिहार के बच्चों का सिलेक्शन नहीं होगा
लेकिन 530-540 में अलग राज्य के बच्चों का सिलेक्शन हो जाएगा
अब बताओ सवर्णों तुम्हारे अंदर शर्म की पानी है कि नहीं कब हम बोलेंगे ?