मध्यप्रदेश में युवाओं और कर्मचारियों के हिस्से में फिलहाल एक ही चीज दिखाई दे रही है—इंतजार। 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में 13% पदों का फैसला 5 अगस्त से हाईकोर्ट में रिजर्व है और 48 दिन बाद भी आदेश का इंतजार है। जानकारों के मुताबिक फैसला किसी भी पक्ष के लिए आने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना से मामला और लंबा खिंच सकता है।दूसरी तरफ कर्मचारियों का 100% वेतन का मामला भी अदालत में है। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब पीएससी से चयनित कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलता है तो ईएसबी से चयनित कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार क्यों? पूरा काम लिया जाता है तो पूरा वेतन क्यों नहीं लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार का तर्क है कि 100% वेतन और पिछला एरियर देने से वित्तीय बोझ बढ़ेगा और प्रोबेशन में चरणबद्ध भुगतान सेवा नियमों के तहत है। विडंबना देखिए—भर्ती के लिए युवा सालों इंतजार करें, आरक्षण के 13% पद फैसले का इंतजार करें और नौकरी मिलने के बाद पूरा वेतन पाने के लिए कर्मचारी अदालत के फैसले का इंतजार करें। 2023 चुनाव के समय पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 100% वेतन का भरोसा दिया था, लेकिन उसे लागू करने की बारी आए तो वित्तीय बोझ सामने आ जाता है। सवाल किसी एक सरकार का नहीं, उस व्यवस्था का है जिसमें वादा पहले होता है और उसका हिसाब अदालत में बाद में। @INCIndia@INCMP@RahulGandhi@Pawankhera
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