@jitu_rajoriya Are bhole baba hain woh... Itne bhole ki ek lota pani se bhi prasann ho jaye ge agar Mann sheetal aur saaf hai.. mann mein mail hai to poori nadi ka paani bhi arpan ker do... Koi laabh nahi... Kal ki Matra adhik nahi... Mann ki pavitrata adhik ho ispe dhyaan do
@Siddhantmt to protective gear pehna...fir achanak se sabko ek sath germi lag gayi...waah....to ek bhi photo nahi hai jissmein kisi police wale ne protective gear pehna ho
instagram pe to isne kaha th aki germi lag grahi thi.... aur doosra yeh ki agar protective gear pehna hua tha jiski wajeh sse badge utarna pada to public ko kaise dikha ki badge nahi hai..matlab protective gear nahi tha... 100 police officials ein se 90 ne protective gear nahi tha
@mssirsa@mssirsa 🙏 माननीय Sirsa Sir, सुप्रीम कोर्ट का आदेश कागज़ों तक सीमित न रहे। कृपया VAHAN डेटाबेस अपडेट कराकर फिट BS4 वाहनों को सड़क पर चलने का उनका अधिकार दिलाइए। Humari cars ko re-register kerwaiye pleqsse taki PUC mil sake.
@mssirsa 🙏 माननीय Sirsa Sir, सुप्रीम कोर्ट का आदेश कागज़ों तक सीमित न रहे। कृपया VAHAN डेटाबेस अपडेट कराकर फिट BS4 वाहनों को सड़क पर चलने का उनका अधिकार दिलाइए। Humari cars ko re-register kerwaiye pleqsse taki PUC mil sake.
@mssirsa 🙏 माननीय Sirsa Sir, सुप्रीम कोर्ट का आदेश कागज़ों तक सीमित न रहे। कृपया VAHAN डेटाबेस अपडेट कराकर फिट BS4 वाहनों को सड़क पर चलने का उनका अधिकार दिलाइए।
The Court has allowed BS4 EOL vehicles, yet the Delhi Transport Department hasn’t enabled PUCC or fitness testing for them.
#BS4EOL
So owners are stuck, as cars can’t legally be on the road without PUCC, and there’s no way to get one, inspite of the best efforts of @mssirsa ji.
@mssirsa@mssirsa sir please help. Transport departent not giving PUC to EOL BS4 vehicles. Justice is not served on ground. How can we drive our vehicles if we are denied fuel and PUC.
@mssirsa sir bs4 15 year old petrol vehicles per "no coercive action" honourable supreme court ki judgement , ground pe justice serve nahi ker rahi. RTO has de-registered the vehicles.. PUC nahi mil raha. NO PUC NO FUEL. public ko justice nahi mil raha @mssirsa sir please help.
@mssirsa@AmitShah@AmitShahOffice@gupta_rekha@moefcc Sir despite supreme court judegement... My eol bs4 is denied a PUC because transport department has deregistrted it. What's the point of justice is only on paper and not on ground. Please help.
17 दिसंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर फिट BS4 और उससे ऊपर के वाहनों पर कोई भी "Coercive Action" नहीं किया जा सकता।
अर्थात केवल 15 वर्ष पूरे हो जाने के आधार पर किसी फिट BS4 वाहन पर जबरन कार्रवाई, प्रतिबंध, जब्ती, स्क्रैपिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
आज भी दिल्ली RTO का VAHAN सिस्टम ऐसे वाहनों को "Deregistered" दिखा रहा है।
इसका सीधा परिणाम क्या है?
❌ PUC नहीं बनता। ❌ PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं मिलता। ❌ पेट्रोल नहीं तो गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब एक सीधा सवाल...
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
क्या इसका मतलब सिर्फ इतना है कि—
✔️ गाड़ी स्क्रैप नहीं करेंगे। ✔️ जब्त नहीं करेंगे। ✔️ जुर्माना नहीं लगाएंगे।
लेकिन...
❌ PUC भी नहीं मिलेगा। ❌ पेट्रोल भी नहीं मिलेगा। ❌ सड़क पर चलाने भी नहीं देंगे।
तो फिर यह कैसी राहत है?
क्या हमें अपनी फिट BS4 गाड़ी को घर में शोपीस बनाकर रखना है?
क्या यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वास्तविक भावना थी?
यह वैसा ही है जैसे सरकार कहे—
"हम आपकी संपत्ति नहीं छीनेंगे... लेकिन उसका उपयोग भी नहीं करने देंगे।"
यह संरक्षण (Protection) नहीं, बल्कि अधिकार छीनने का एक डिजिटल तरीका है।
एक आम नागरिक जब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे सीधा न्याय चाहिए—न कि कानूनी शब्दों की उलझन, सरकारी सॉफ्टवेयर की खामी या ऐसी शर्तें जो उसे फिर से उसी परेशानी में खड़ा कर दें।
अगर कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी RTO का सॉफ्टवेयर वाहन को "Deregistered" दिखाकर PUC ही न बनने दे, तो यह न्याय की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सरकारी सॉफ्टवेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं हो सकता।
आज RTO कार्यालय में नागरिकों को सिर्फ इतना कहा जाता है—
"सिस्टम में यही दिख रहा है, हम कुछ नहीं कर सकते।"
तो क्या अब एक नागरिक के संवैधानिक अधिकार का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट करेगी या एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर?
हमारी लड़ाई स्क्रैपिंग रोकने की नहीं है।
हमारी लड़ाई अपने फिट और प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले वाहन को वैध रूप से सड़क पर चलाने के अधिकार की है।
हमें कागज़ पर संरक्षण नहीं, सड़क पर अपना अधिकार चाहिए।
हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
✅ VAHAN डेटाबेस को तुरंत अपडेट किया जाए। ✅ फिट BS4 वाहनों का गलत "Deregistered" स्टेटस तुरंत हटाया जाए। ✅ माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ज़मीन पर पूरी तरह लागू किया जाए। ✅ फिट वाहनों के लिए PUC, ईंधन और सड़क पर चलने का अधिकार बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुनिश्चित किया जाए।
न्याय केवल आदेश लिख देने से नहीं होता। न्याय तब होता है जब उसका लाभ वास्तव में आम नागरिक तक पहुँचे।
17 दिसंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर फिट BS4 और उससे ऊपर के वाहनों पर कोई भी "Coercive Action" नहीं किया जा सकता।
अर्थात केवल 15 वर्ष पूरे हो जाने के आधार पर किसी फिट BS4 वाहन पर जबरन कार्रवाई, प्रतिबंध, जब्ती, स्क्रैपिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
आज भी दिल्ली RTO का VAHAN सिस्टम ऐसे वाहनों को "Deregistered" दिखा रहा है।
इसका सीधा परिणाम क्या है?
❌ PUC नहीं बनता। ❌ PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं मिलता। ❌ पेट्रोल नहीं तो गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब एक सीधा सवाल...
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
क्या इसका मतलब सिर्फ इतना है कि—
✔️ गाड़ी स्क्रैप नहीं करेंगे। ✔️ जब्त नहीं करेंगे। ✔️ जुर्माना नहीं लगाएंगे।
लेकिन...
❌ PUC भी नहीं मिलेगा। ❌ पेट्रोल भी नहीं मिलेगा। ❌ सड़क पर चलाने भी नहीं देंगे।
तो फिर यह कैसी राहत है?
क्या हमें अपनी फिट BS4 गाड़ी को घर में शोपीस बनाकर रखना है?
क्या यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वास्तविक भावना थी?
यह वैसा ही है जैसे सरकार कहे—
"हम आपकी संपत्ति नहीं छीनेंगे... लेकिन उसका उपयोग भी नहीं करने देंगे।"
यह संरक्षण (Protection) नहीं, बल्कि अधिकार छीनने का एक डिजिटल तरीका है।
एक आम नागरिक जब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे सीधा न्याय चाहिए—न कि कानूनी शब्दों की उलझन, सरकारी सॉफ्टवेयर की खामी या ऐसी शर्तें जो उसे फिर से उसी परेशानी में खड़ा कर दें।
अगर कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी RTO का सॉफ्टवेयर वाहन को "Deregistered" दिखाकर PUC ही न बनने दे, तो यह न्याय की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सरकारी सॉफ्टवेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं हो सकता।
आज RTO कार्यालय में नागरिकों को सिर्फ इतना कहा जाता है—
"सिस्टम में यही दिख रहा है, हम कुछ नहीं कर सकते।"
तो क्या अब एक नागरिक के संवैधानिक अधिकार का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट करेगी या एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर?
हमारी लड़ाई स्क्रैपिंग रोकने की नहीं है।
हमारी लड़ाई अपने फिट और प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले वाहन को वैध रूप से सड़क पर चलाने के अधिकार की है।
हमें कागज़ पर संरक्षण नहीं, सड़क पर अपना अधिकार चाहिए।
हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
✅ VAHAN डेटाबेस को तुरंत अपडेट किया जाए। ✅ फिट BS4 वाहनों का गलत "Deregistered" स्टेटस तुरंत हटाया जाए। ✅ माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ज़मीन पर पूरी तरह लागू किया जाए। ✅ फिट वाहनों के लिए PUC, ईंधन और सड़क पर चलने का अधिकार बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुनिश्चित किया जाए।
न्याय केवल आदेश लिख देने से नहीं होता। न्याय तब होता है जब उसका लाभ वास्तव में आम नागरिक तक पहुँचे।
🙏 माननीय Sirsa Sir,
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
17 दिसंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर फिट BS4 और उससे ऊपर के वाहनों पर कोई भी "Coercive Action" नहीं किया जा सकता।
अर्थात केवल 15 वर्ष पूरे हो जाने के आधार पर किसी फिट BS4 वाहन पर जबरन कार्रवाई, प्रतिबंध, जब्ती, स्क्रैपिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
आज भी दिल्ली RTO का VAHAN सिस्टम ऐसे वाहनों को "Deregistered" दिखा रहा है।
इसका सीधा परिणाम क्या है?
❌ PUC नहीं बनता।
❌ PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं मिलता।
❌ पेट्रोल नहीं तो गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब एक सीधा सवाल...
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
क्या इसका मतलब सिर्फ इतना है कि—
✔️ गाड़ी स्क्रैप नहीं करेंगे।
✔️ जब्त नहीं करेंगे।
✔️ जुर्माना नहीं लगाएंगे।
लेकिन...
❌ PUC भी नहीं मिलेगा।
❌ पेट्रोल भी नहीं मिलेगा।
❌ सड़क पर चलाने भी नहीं देंगे।
तो फिर यह कैसी राहत है?
क्या हमें अपनी फिट BS4 गाड़ी को घर में शोपीस बनाकर रखना है?
क्या यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वास्तविक भावना थी?
यह वैसा ही है जैसे सरकार कहे—
"हम आपकी संपत्ति नहीं छीनेंगे... लेकिन उसका उपयोग भी नहीं करने देंगे।"
यह संरक्षण (Protection) नहीं, बल्कि अधिकार छीनने का एक डिजिटल तरीका है।
एक आम नागरिक जब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे सीधा न्याय चाहिए—न कि कानूनी शब्दों की उलझन, सरकारी सॉफ्टवेयर की खामी या ऐसी शर्तें जो उसे फिर से उसी परेशानी में खड़ा कर दें।
अगर कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी RTO का सॉफ्टवेयर वाहन को "Deregistered" दिखाकर PUC ही न बनने दे, तो यह न्याय की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सरकारी सॉफ्टवेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं हो सकता।
आज RTO कार्यालय में नागरिकों को सिर्फ इतना कहा जाता है—
"सिस्टम में यही दिख रहा है, हम कुछ नहीं कर सकते।"
तो क्या अब एक नागरिक के संवैधानिक अधिकार का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट करेगी या एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर?
हमारी लड़ाई स्क्रैपिंग रोकने की नहीं है।
हमारी लड़ाई अपने फिट और प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले वाहन को वैध रूप से सड़क पर चलाने के अधिकार की है।
हमें कागज़ पर संरक्षण नहीं, सड़क पर अपना अधिकार चाहिए।
हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
✅ VAHAN डेटाबेस को तुरंत अपडेट किया जाए।
✅ फिट BS4 वाहनों का गलत "Deregistered" स्टेटस तुरंत हटाया जाए।
✅ माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ज़मीन पर पूरी तरह लागू किया जाए।
✅ फिट वाहनों के लिए PUC, ईंधन और सड़क पर चलने का अधिकार बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुनिश्चित किया जाए।
न्याय केवल आदेश लिख देने से नहीं होता। न्याय तब होता है जब उसका लाभ वास्तव में आम नागरिक तक पहुँचे।
@mssirsa 🙏 माननीय Sirsa Sir, सुप्रीम कोर्ट का आदेश कागज़ों तक सीमित न रहे। कृपया VAHAN डेटाबेस अपडेट कराकर फिट BS4 वाहनों को सड़क पर चलने का उनका अधिकार दिलाइए।
17 दिसंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर फिट BS4 और उससे ऊपर के वाहनों पर कोई भी "Coercive Action" नहीं किया जा सकता।
अर्थात केवल 15 वर्ष पूरे हो जाने के आधार पर किसी फिट BS4 वाहन पर जबरन कार्रवाई, प्रतिबंध, जब्ती, स्क्रैपिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
आज भी दिल्ली RTO का VAHAN सिस्टम ऐसे वाहनों को "Deregistered" दिखा रहा है।
इसका सीधा परिणाम क्या है?
❌ PUC नहीं बनता।
❌ PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं मिलता।
❌ पेट्रोल नहीं तो गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब एक सीधा सवाल...
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
क्या इसका मतलब सिर्फ इतना है कि—
✔️ गाड़ी स्क्रैप नहीं करेंगे।
✔️ जब्त नहीं करेंगे।
✔️ जुर्माना नहीं लगाएंगे।
लेकिन...
❌ PUC भी नहीं मिलेगा।
❌ पेट्रोल भी नहीं मिलेगा।
❌ सड़क पर चलाने भी नहीं देंगे।
तो फिर यह कैसी राहत है?
क्या हमें अपनी फिट BS4 गाड़ी को घर में शोपीस बनाकर रखना है?
क्या यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वास्तविक भावना थी?
यह वैसा ही है जैसे सरकार कहे—
"हम आपकी संपत्ति नहीं छीनेंगे... लेकिन उसका उपयोग भी नहीं करने देंगे।"
यह संरक्षण (Protection) नहीं, बल्कि अधिकार छीनने का एक डिजिटल तरीका है।
एक आम नागरिक जब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे सीधा न्याय चाहिए—न कि कानूनी शब्दों की उलझन, सरकारी सॉफ्टवेयर की खामी या ऐसी शर्तें जो उसे फिर से उसी परेशानी में खड़ा कर दें।
अगर कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी RTO का सॉफ्टवेयर वाहन को "Deregistered" दिखाकर PUC ही न बनने दे, तो यह न्याय की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सरकारी सॉफ्टवेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं हो सकता।
आज RTO कार्यालय में नागरिकों को सिर्फ इतना कहा जाता है—
"सिस्टम में यही दिख रहा है, हम कुछ नहीं कर सकते।"
तो क्या अब एक नागरिक के संवैधानिक अधिकार का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट करेगी या एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर?
हमारी लड़ाई स्क्रैपिंग रोकने की नहीं है।
हमारी लड़ाई अपने फिट और प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले वाहन को वैध रूप से सड़क पर चलाने के अधिकार की है।
हमें कागज़ पर संरक्षण नहीं, सड़क पर अपना अधिकार चाहिए।
हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
✅ VAHAN डेटाबेस को तुरंत अपडेट किया जाए।
✅ फिट BS4 वाहनों का गलत "Deregistered" स्टेटस तुरंत हटाया जाए।
✅ माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ज़मीन पर पूरी तरह लागू किया जाए।
✅ फिट वाहनों के लिए PUC, ईंधन और सड़क पर चलने का अधिकार बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुनिश्चित किया जाए।
न्याय केवल आदेश लिख देने से नहीं होता। न्याय तब होता है जब उसका लाभ वास्तव में आम नागरिक तक पहुँचे।
#BS4VehicleBan #DelhiRTO #VahanDatabase #RightToDrive #SupremeCourt #DelhiPollution #JusticeForVehicleOwners
@mssirsa 17 दिसंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर फिट BS4 और उससे ऊपर के वाहनों पर कोई भी "Coercive Action" नहीं किया जा सकता।
अर्थात केवल 15 वर्ष पूरे हो जाने के आधार पर किसी फिट BS4 वाहन पर जबरन कार्रवाई, प्रतिबंध, जब्ती, स्क्रैपिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
आज भी दिल्ली RTO का VAHAN सिस्टम ऐसे वाहनों को "Deregistered" दिखा रहा है।
इसका सीधा परिणाम क्या है?
❌ PUC नहीं बनता।
❌ PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं मिलता।
❌ पेट्रोल नहीं तो गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब एक सीधा सवाल...
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
क्या इसका मतलब सिर्फ इतना है कि—
✔️ गाड़ी स्क्रैप नहीं करेंगे।
✔️ जब्त नहीं करेंगे।
✔️ जुर्माना नहीं लगाएंगे।
लेकिन...
❌ PUC भी नहीं मिलेगा।
❌ पेट्रोल भी नहीं मिलेगा।
❌ सड़क पर चलाने भी नहीं देंगे।
तो फिर यह कैसी राहत है?
क्या हमें अपनी फिट BS4 गाड़ी को घर में शोपीस बनाकर रखना है?
क्या यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वास्तविक भावना थी?
यह वैसा ही है जैसे सरकार कहे—
"हम आपकी संपत्ति नहीं छीनेंगे... लेकिन उसका उपयोग भी नहीं करने देंगे।"
यह संरक्षण (Protection) नहीं, बल्कि अधिकार छीनने का एक डिजिटल तरीका है।
एक आम नागरिक जब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे सीधा न्याय चाहिए—न कि कानूनी शब्दों की उलझन, सरकारी सॉफ्टवेयर की खामी या ऐसी शर्तें जो उसे फिर से उसी परेशानी में खड़ा कर दें।
अगर कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी RTO का सॉफ्टवेयर वाहन को "Deregistered" दिखाकर PUC ही न बनने दे, तो यह न्याय की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सरकारी सॉफ्टवेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं हो सकता।
आज RTO कार्यालय में नागरिकों को सिर्फ इतना कहा जाता है—
"सिस्टम में यही दिख रहा है, हम कुछ नहीं कर सकते।"
तो क्या अब एक नागरिक के संवैधानिक अधिकार का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट करेगी या एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर?
हमारी लड़ाई स्क्रैपिंग रोकने की नहीं है।
हमारी लड़ाई अपने फिट और प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले वाहन को वैध रूप से सड़क पर चलाने के अधिकार की है।
हमें कागज़ पर संरक्षण नहीं, सड़क पर अपना अधिकार चाहिए।
हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
✅ VAHAN डेटाबेस को तुरंत अपडेट किया जाए।
✅ फिट BS4 वाहनों का गलत "Deregistered" स्टेटस तुरंत हटाया जाए।
✅ माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ज़मीन पर पूरी तरह लागू किया जाए।
✅ फिट वाहनों के लिए PUC, ईंधन और सड़क पर चलने का अधिकार बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुनिश्चित किया जाए।
न्याय केवल आदेश लिख देने से नहीं होता। न्याय तब होता है जब उसका लाभ वास्तव में आम नागरिक तक पहुँचे।
🙏 @mssirsa माननीय Sirsa Sir, सुप्रीम कोर्ट का आदेश कागज़ों तक सीमित न रहे। कृपया VAHAN डेटाबेस अपडेट कराकर फिट BS4 वाहनों को सड़क पर चलने का उनका अधिकार दिलाइए।
#BS4VehicleBan #DelhiRTO #VahanDatabase #RightToDrive #SupremeCourt #DelhiPollution #JusticeForVehicleOwners
17 दिसंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर फिट BS4 और उससे ऊपर के वाहनों पर कोई भी "Coercive Action" नहीं किया जा सकता।
अर्थात केवल 15 वर्ष पूरे हो जाने के आधार पर किसी फिट BS4 वाहन पर जबरन कार्रवाई, प्रतिबंध, जब्ती, स्क्रैपिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
आज भी दिल्ली RTO का VAHAN सिस्टम ऐसे वाहनों को "Deregistered" दिखा रहा है।
इसका सीधा परिणाम क्या है?
❌ PUC नहीं बनता।
❌ PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं मिलता।
❌ पेट्रोल नहीं तो गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब एक सीधा सवाल...
अगर गाड़ी को चलाने ही नहीं दिया जाएगा, तो "Coercive Action नहीं होगा" कहने का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?
क्या इसका मतलब सिर्फ इतना है कि—
✔️ गाड़ी स्क्रैप नहीं करेंगे।
✔️ जब्त नहीं करेंगे।
✔️ जुर्माना नहीं लगाएंगे।
लेकिन...
❌ PUC भी नहीं मिलेगा।
❌ पेट्रोल भी नहीं मिलेगा।
❌ सड़क पर चलाने भी नहीं देंगे।
तो फिर यह कैसी राहत है?
क्या हमें अपनी फिट BS4 गाड़ी को घर में शोपीस बनाकर रखना है?
क्या यही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वास्तविक भावना थी?
यह वैसा ही है जैसे सरकार कहे—
"हम आपकी संपत्ति नहीं छीनेंगे... लेकिन उसका उपयोग भी नहीं करने देंगे।"
यह संरक्षण (Protection) नहीं, बल्कि अधिकार छीनने का एक डिजिटल तरीका है।
एक आम नागरिक जब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे सीधा न्याय चाहिए—न कि कानूनी शब्दों की उलझन, सरकारी सॉफ्टवेयर की खामी या ऐसी शर्तें जो उसे फिर से उसी परेशानी में खड़ा कर दें।
अगर कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी RTO का सॉफ्टवेयर वाहन को "Deregistered" दिखाकर PUC ही न बनने दे, तो यह न्याय की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।
सरकारी सॉफ्टवेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं हो सकता।
आज RTO कार्यालय में नागरिकों को सिर्फ इतना कहा जाता है—
"सिस्टम में यही दिख रहा है, हम कुछ नहीं कर सकते।"
तो क्या अब एक नागरिक के संवैधानिक अधिकार का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट करेगी या एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर?
हमारी लड़ाई स्क्रैपिंग रोकने की नहीं है।
हमारी लड़ाई अपने फिट और प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले वाहन को वैध रूप से सड़क पर चलाने के अधिकार की है।
हमें कागज़ पर संरक्षण नहीं, सड़क पर अपना अधिकार चाहिए।
हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
✅ VAHAN डेटाबेस को तुरंत अपडेट किया जाए।
✅ फिट BS4 वाहनों का गलत "Deregistered" स्टेटस तुरंत हटाया जाए।
✅ माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ज़मीन पर पूरी तरह लागू किया जाए।
✅ फिट वाहनों के लिए PUC, ईंधन और सड़क पर चलने का अधिकार बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुनिश्चित किया जाए।
न्याय केवल आदेश लिख देने से नहीं होता। न्याय तब होता है जब उसका लाभ वास्तव में आम नागरिक तक पहुँचे।
🙏 माननीय Sirsa Sir, सुप्रीम कोर्ट का आदेश कागज़ों तक सीमित न रहे। कृपया VAHAN डेटाबेस अपडेट कराकर फिट BS4 वाहनों को सड़क पर चलने का उनका अधिकार दिलाइए।
#BS4VehicleBan #DelhiRTO #VahanDatabase #RightToDrive #SupremeCourt #DelhiPollution #JusticeForVehicleOwners
@AnupamMittal The point is not when and how H1B holders should come back. The problem is companies won't be able to hire Indian Talent. Less exposure to what's going on in tech, globally. You build https://t.co/GUUD6Sdhxi after you got exposure..copy idea of https://t.co/sH8IxxzxjO..