ठाकुर का कुआं तुम खुद रहे थे और अपना कुआं नहीं खुद पा रहे थे, ये सब फर्जी कहानियां फैलाई गई की दलितों के पीछे मटकी, झाड़ू बांध कर घुमाया जाता है।
इन बातों का कहीं कोई प्रमाण नहीं है।
— अजीत भारती
स्क्रॉल करना बंद करो और इस देसी इन्वेंशन को देखो! इंजीनियरिंग की बड़ी-बड़ी डिग्रियां एक तरफ, और हमारे भाई का यह दिमाग एक तरफ
क्या यह वाकई फ्री-एनर्जी का फ्यूचर है या सिर्फ एक मिथ? https://t.co/ELfCXQ3QKv
भाई साहब ये वाली हरकत तो तुमने एकदम लेंडी वाली कर दी।
लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सबको है, लेकिन बदतमीजी का अधिकार किसी को नहीं है, वो भी महिला के साथ।
आपकी हरकतें टीचर वाली नहीं हैं।
Train No. 20104 में मेरा परिवार यात्रा कर रहा है । अगली ट्रेन 12618 जो की झांसी से आगे की यात्रा के लिए उसमे सफ़र करना है । 20104 जो अभी कानपुर भी नहीं पहुँची है कैसे हमे टाइम से झाँसी पहुचा पाएगी । अगर लेट की वजह से मेरी ट्रेन छूट जाती है इसका जिमेदार कौन होगा ?
@RailMinIndia
दीपक कुमार की मदद के लिए आप सभी का शुक्रिया.
अपना नाम 'मोहम्मद दीपक' बताकर जिस तरह दीपक कुमार ने बजरंग दल के गुंडों का मुंह बंद कर दिया था , वो अपने आपमें एक मिसाल है .
एक मुस्लिम बुजुर्ग का साथ देने के लिए
नफरती लफंगों की भीड़ के सामने छाती ठोककर खड़ा हो जाना कोई मामूली बात नहीं है.
हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि अगर दीपक पर कोई मुसीबत हो तो उसकी मदद करें . आप सबने एक बार फिर उसका साथ दिया है .
रतलाम से लेकर मुंबई, बंगाल से लेकर यूपी तक,बक़रीद से पहले हर जगह से मुसलमानों को सताने की अनगिनत ख़बरें आ रही हैं।कहीं नेता नफ़रती बातें कर रहे हैं, कहीं भगवा संगठन जुलूस निकाल रहे हैं तो कहीं क़ानून के नाम पर पुलिस जेल भर रही है।
वीडियोज़ देखकर आंखें जल रही हैं,मन भारी हो रहा है
पहली बार मैं भी आज साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गया . हुआ ये कि कोलकाता में रहने वाले मेरे एक पत्रकार मित्र प्रभाकर मणि तिवारी के व्हाट्सएप से एक मैसेज आया कि मेरा UPI अभी ब्लॉक है , कुछ पैसे एक QR कोड पर ट्रांसफर कर दें . मैं दफ्तर से बाहर था तो मैंने अपने कैमरामैन की ड्यूटी लगा दी कि इनको ट्रांसफर कर दो . फिर पांच बार पैसे मांगे गए . हर बार कैमरामैन मुझे फोन करके पूछ रहा था . मैं संकोच में प्रभाकर जी को फोन किए बगैर उनके व्हाट्सएप से आ रहे अलग - अलग QR कोड पर पैसे ट्रांसफर करवाता रहा . मुझे लगा कहीं फंसे होंगे. कुछ दिक्कत होगी . अब पूछना क्या है ? भेज देते हैं . प्रभाकर जी शरीफ और भरोसेमंद आदमी हैं . किसी मुसीबत में होंगे , तभी मांग रहे हैं .
छठी बार जब फिर मांगा तो मुझे शक हुआ . तीन बार एक ही अमाउंट का QR कोड भेजा . हर बार बिना दिमाग लगाए ट्रांसफर करवा दिया .तब तक मैं ऑफिस आ चुका था . मैंने अपने सहयोगी करण से कहा भी यार अब कुछ गड़बड़ लग रहा है .
व्हाट्सएप पर कई बार फोन किया . नहीं मिला . फिर नॉर्मल नंबर से फोन किया तो प्रभाकर जी से पता चला कि उनका व्हाट्सएप हैक हो गया है . कुछ और लोगों से पैसे मांगे गए हैं .
अब वो फ्रॉड फोन नहीं उठा रहा . मुझे करीब ग्यारह हजार का चूना लग गया . दिमाग की बत्ती देर से जली.
सभी हिंदुओं को यह सुनना चाहिए।
हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथी मौलाना और कुछ राजनीतिक पार्टियां क्या साजिश चल रही है यह साजिद नोमानी ने साफ साफ बता दिया।
सिख, बौद्ध, OBC, दलित, लिंगायत, गुर्जर और जाट यह सब हिंदू नहीं हैं, इन्हें कुछ राजनीतिक पार्टियां और मौलाना सोशल इंजीनियरिंग के जरिए मुसलमानों से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
विश्वगुरु बनने की दिशा में एक और कदम….
RSS भीम रैली निकाल कर सामाजिक न्याय का झंडा बुलंद कर रही है…
भाजपा को अपना झंडा भी अब भगवा के बजाय नीला कर लेना चाहिये…देर मत करिए अभी माहौल सही बना हुआ है
₹3500 करोड़ का दान पाने वाले @ShriRamTeerth ने जो नागपुर संघ कार्यालय प्रेरित चायनीज लाइट को ‘ज्योति स्वरूप’ कह कर संस्कृत और वेदवाणी का उदाहरण प्रस्तुत किया था, उस पोस्ट को हटा दिया है।
अब पूछना यह है कि हे महानुभावों, रत्ती भर लाज नहीं आई भगवान राम की मूर्ति के पावन स्थल पर चायनीज प्लास्टिक लाइट लगाने में? पोस्ट हटाने से क्या होगा?
भाजपा/संघ वालों को लगता है कि हर जगह रंगीन लाइटिंग कर दो, जनता पागल हो जाएगी। इसी चक्कर में लगा होगा कि लोग कहेंगे, “अरे अखंड ज्योति! वॉव! ज्योति स्वरूप बना दिया… ये लाइट से चलेगा? सौर ऊर्जा से? ओ माय डॉग! हाउ साइंटिफिक! हिन्दू धर्म यही तो है कि हम विज्ञान से लड़ते नहीं, सीधा अपना लेते हैं।”