खबर है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ग्रेटर @OfficialGNIDA द्वारा BOT मॉडल पर नए बस शेल्टर बनाए जा रहे हैं। यह एक सराहनीय पहल है, लेकिन हमारी मांग है कि इन बस शेल्टरों को केवल औपचारिक ढांचा बनाकर न छोड़ा जाए, बल्कि इन्हें वास्तव में आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल बनाया जाए। प्राधिकरण ने 45 बस स्टैंड विकसित करने की योजना बनाई है, जिनमें नए शेल्टर और पुराने शेल्टरों का उन्नयन शामिल है।
हमारी मांग है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में BOT मॉडल पर बनाए जा रहे बस शेल्टरों में निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं अनिवार्य रूप से शामिल की जाएं—
1) बारिश से पूर्ण सुरक्षा देने वाली मजबूत छत और साइड कवर।
2) भीषण गर्मी एवं लू से बचाव के लिए एयर कंडीशनिंग (AC) अथवा प्रभावी कूलिंग सिस्टम की व्यवस्था।
3)कड़ाके की सर्दी में ठंडी हवाओं से बचाव के लिए उपयुक्त डिज़ाइन।
4)आरामदायक बैठने की पर्याप्त व्यवस्था।
5)पीने के पानी, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, CCTV कैमरे तथा बस रूट और समय की डिजिटल डिस्प्ले जैसी सुविधाएं।
6)दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के अनुरूप सुगम (Accessible) डिज़ाइन।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में बस शेल्टर भी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विश्वस्तरीय बनाए जाएं, ताकि यात्रियों को हर मौसम में सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक सार्वजनिक परिवहन का अनुभव मिल सके।
वाह! कमाल की प्लानिंग है। जिस देश में अभी बुलेट ट्रेन का एक भी कॉमर्शियल रूट चालू नहीं हुआ, देश में बुलेट ट्रेन का एक भी चालू कॉरिडोर नहीं, वहाँ एक ही जिले में तीन-तीन स्टेशन! लगता है पहले स्टॉपेज तय हो गए हैं, ट्रेन बाद में देखी जाएगी। इतनी तेजी तो बुलेट ट्रेन की भी नहीं होगी, जितनी तेजी से @CeoNoida के अधिकारी ये ब्यान दे रहे हैं।
जनता तो बस यही पूछ रही है:
पहले बुलेट ट्रेन पटरी पर दौड़ती हुई दिखा दीजिए, फिर हर 10–20 किलोमीटर पर स्टेशन बनाने के सपने भी देख लेंगे। फिलहाल यह खबर कम और चुनावी जुमला ज़्यादा लग रही है।
विडंबना यह है कि जिले सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं को लेकर लोग सवाल उठाते हैं। मेट्रो कनेक्टिविटी अधूरी है, कहीं सिटी बस सेवा की कमी महसूस होती है। जिन बुनियादी सुविधाओं की जनता रोज़ मांग कर रही है, उन्हें प्राथमिकता देने के बजाय बुलेट ट्रेन के तीन-तीन स्टेशन के सपने दिखाए जा रहे हैं।
@CeoNoida आम नागरिक को बेवक़ूफ़ ना समझे, अपने अधिकारी को समझाए की अनर्गल बयानबाजी से बचें.
.@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@UPGovt@ChiefSecyUP@spgoyal कृप्या संज्ञान लें।
ग्रेटर नोएडा को सेफ सिटी बनाने की मांग, जिसकी मांग गौतमबुद्ध नगर मे @Uppolice की कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने से पहले से किया जा रहा, आज भी अधूरी है। GNIDA के तय बजट 227.6Cr से अधिक बोली आने पर अब बजट बढ़ाने की तैयारी चल रही। यदि यह निर्णय मार्च 2026 मे ही ले लेते तो अभी तक सेफ सिटी का कार्य शुरू हो चुका होता क्योंकि मार्च 2026 मे L1 रही L&T की बोली इस कार्य के लिए GNIDA के बजट से मात्र 2Cr अधिक थी।
@OfficialGNIDA ने पहली बार 09/03/2024 को निविदा जारी किया था, निविदा की तकनीकी खामियों को दूर करते करते एक वर्ष से अधिक समय लगा कर जुलाई 2025 मे खोला गया जिसमे 3 अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निविदाकार आए थे - L&T, NEC और Railtel। तीनों ने अपना अपना प्रस्तुतीकरण भी दिया था, परंतु तीनों की बोली GNIDA के 227.6Cr बजट से थोड़ा अधिक था। L&T ने 229.5Cr (L1), NEC ने 239.6Cr (L2) और Railtel ने 249.3 Cr (L3) की बोली लगाई थी।
GNIDA ने दूसरी बार 20/03/2026 को उसी बजट पर retender किया लेकिन एक भी निविदाकार ने बोली नहीं लगाई। अंततः GNIDA ने बजट बढ़ाने का निर्णय लिया। यही निर्णय मार्च 2026 मे ले लेते तो अभी तक सेफ सिटी का कार्य शुरू हो चुका होता।
.माननीय @CP_Noida मोहदया @DCPCentralNoida@noidapolice कृपया संज्ञान लें:
मामला @2_noida@SHObisrakh थाना क्षेत्र की गौर सिटी-2 पुलिस चौकी का है। पाम ओलंपिया सोसाइटी में 11 जून 2026 को हुई चोरी की घटना के संबंध में शिकायतकर्ता पिछले 15–17 दिनों से लगातार पुलिस चौकी के चक्कर लगा रहा है, लेकिन आज तक FIR तो दूर, शिकायत की रिसीविंग तक नहीं दी गई।
शिकायत में स्पष्ट रूप से CCTV फुटेज का उल्लेख है, जिसमें संदिग्ध व्यक्ति के सोसाइटी में प्रवेश करने और चोरी की घटना से जुड़े तथ्य बताए गए हैं। इसके बावजूद यदि शिकायतकर्ता को लगातार टाल दिया जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि CCTV जैसे प्राथमिक साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की जा रही, तो एक आम नागरिक या सुरक्षा कर्मी न्याय की उम्मीद किस आधार पर करे?
@CP_Noida मोहदया, आप सख्त कार्यशैली, जवाबदेही और कानून के निष्पक्ष पालन के लिए जानी जाती हैं। अतः आपसे अनुरोध है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराते हुए शिकायतकर्ता की FIR तत्काल दर्ज कराई जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनावश्यक विलंब या लापरवाही हुई है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
पीएमओ में बैठे अकर्मण्य अधिकारियों से अनुरोध है कि मेट्रो उन जगहों पर चलाएं जहां इसकी ज्यादा जरूरत है। आपको सपना आता है और कहीं भी मेट्रो चलवा रहे, पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट जहां सबसे ज्यादा जरूरत है, लोग रोज जाम में जूझ रहे है, वहां मेट्रो नहीं देंगे! @PMOIndia@mlkhattar@ANI
माननीय विधायक श्री @DhirendraGBN जी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय है। गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद के हाई-राइज क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा की स्थिति वाकई चिंताजनक है। अब आवश्यक है कि समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित हो, सख्त सेफ्टी ऑडिट, आधुनिक फायर सिस्टम और नियमित मॉक ड्रिल ज़मीन पर लागू हों। सोसाइटी में फायर सेफ्टी की ग्राउंड रियलिटी चिंताजनक है।
मोदी जी और योगी जी का सपना हुआ बेकार कुछ सब्जी वाले अपने दुकान लगाकर 4000 लोगों को सुपरटेक इको विलेज 2 में सप्लाई दे रहे थे उनकी दुकान कुछ दलालों ने बंद कर दी अथॉरिटी की मदद से कृपया उनको दोबारा चालू कराया जाए @myogiadityanath@noida_authority@CP_Noida
एक समय ऐसा आता है जब खामोशी धैर्य नहीं, मजबूरी बन जाती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट आज उसी मोड़ पर खड़ा है।
@narendramodi@PMOIndia@mlkhattar@MoHUA_India
सालों से यहां के निवासी मेट्रो के वादों, और टालमटोल के बीच जी रहे हैं। रोज़ाना घंटों का ट्रैफिक जाम, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अभाव, और इससे होने वाला मानसिक व आर्थिक क्षति अब आम जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक बुनियादी अधिकार का सवाल है।
मेट्रो रेल की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित यह प्रदर्शन सिर्फ एक जुटान नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो हर दिन इस परेशानी को झेल रहे हैं। यह आवाज़ उन कामकाजी लोगों की है जो सुबह से पहले घर छोड़ते हैं, उन माता-पिता की है जो अपने बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर चिंतित हैं, उन बुजुर्गों की है जो खुद को असहाय महसूस करते हैं, उन महिलाओं की है जो सुबह शाम शेयरिंग ऑटो रिक्शा में बैठकर जाम से जूझती हैं और खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
यह एक भावनात्मक अपील है सत्ता को चला रहे अफसरों से तथा नीति निर्माताओं से, क्योंकि मेट्रो की मांग ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए विलासिता नहीं बल्कि जरूरत है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हर निवासी की इस मांग में भागीदारी जरूरी है। यह सिर्फ समर्थन नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।
इतिहास गवाह है परिवर्तन खुद नहीं आता, उसे शांतिपूर्ण तरीके से मांगना पड़ता है।
अगर अब नहीं, तो कब? अगर हम नहीं, तो कौन?
#Metro4GreaterNoidaWest
तमाम इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट एवं ऑनलाइन मीडिया का तहे दिल से धन्यवाद 🙏
जिन्होंने कल के प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए व्यापक रूप से कवरेज दी और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जनता की आवाज़ को मजबूती प्रदान की।
आपकी कवरेज से लाखों निवासियों की वर्षों पुरानी मेट्रो की मांग को नई ऊर्जा मिली है और शासन-प्रशासन तक जनता की भावनाएँ प्रभावी ढंग से पहुँची हैं।
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,@PMOIndia द्वारा एक बार फिर #GrenoWest मेट्रो की डीपीआर को निरस्त किए जाने से नाराज निवासियों ने आज सेक्टर-71 चौराहे के समीप नोएडा एक्सटेंशन की ओर जाने वाले अंतिम मेट्रो पिलर के पास जोरदार प्रदर्शन किया।
अब लटकाना नहीं चलेगा,
नया बहाना नहीं चलेगा,
मेट्रो तो देनी ही होगी।।
अजनारा होम्स निवासियों का 6 साल से इंतज़ार -क्या इस बार खत्म होगा? एनपीसीएल का काम शुरू होगा? क्या @npclgrnoida वास्तव में कार्य शुरू करेगा और क्या @DCPCentralNoida@noidapolice@CP_Noida सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगी?
1200+ निवासियों की सहमति के बावजूद देरी क्यों? क्या अजनारा होम्स में Electricity Act और Electricity Regulatory Commission के नियम लागू नहीं होते? न तो ऑडिट रिपोर्ट साझा की गई, न बैलेंस शीट - पारदर्शिता कहाँ है?
8 महीने से एक निवासीकी बिजली कटी है - क्या यह Article 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन नहीं, जैसा Supreme Court of India ने स्पष्ट किया है?
Air/Water NOC नहीं, STP बंद, Fire और Lift नियमों का उल्लंघन - फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
कुछ बिल्डर इतने शक्तिशाली क्यों कि कानून, प्रशासन और निवासियों की इच्छा - तीनों की अनदेखी कर रहे हैं? आज सोमवार को ही सच सामने आएगा और पता चलेगा पाएगा कि क्या बिसरख थाना के अंतर्गत आने वाले चेरी काउंटी पुलिस चौकी के प्रभारी अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से कर पाते हैं या नहीं.....!!
बेहतर कनेक्टिविटी के लिए कब मेट्रो मिलेगी
नोएडा सेक्टर 52 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो कनेक्टिविटी की मांग को लेकर निवासियो ने प्रदर्शन किया। लोगों ने एकजुट होकर मेट्रो पिलर खींचकर विरोध प्रदर्शन किया।
@NBTDilli@NavbharatTimes
, @narendramodi@PMOIndia@myogiadityanath@mlkhattar@MoHUA_India#Metro4GreaterNoidaWest
केंद्र सरकार द्वारा एक बार फिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) को निरस्त किए जाने से नाराज निवासियों ने आज सेक्टर-71 चौराहे के समीप नोएडा एक्सटेंशन की ओर जाने वाले अंतिम मेट्रो पिलर के पास जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का आयोजन नेफोवा (NEFOWA) द्वारा किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्थानीय रेसिडेंट्स ने भाग लिया।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते हुए मोटी रस्सी से मेट्रो पिलर को खींचकर नोएडा एक्सटेंशन की ओर ले जाने का प्रतीकात्मक प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार डीपीआर निरस्त होने से क्षेत्र के लाखों निवासियों में भारी निराशा है।
नेफोवा अध्यक्ष @abhishek_nefowa ने बताया कि “ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। बार-बार डीपीआर निरस्त करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लाखों लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हम सरकार से मांग करते हैं कि मेट्रो परियोजना को जल्द से जल्द मंजूरी देकर कार्य शुरू किया जाए।”
प्रदर्शन में शामिल निवासियों ने बताया कि वे रोजाना भीषण ट्रैफिक जाम से जूझते हैं, जबकि क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। पिछले 10 वर्षों से मेट्रो को लेकर केवल वादे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नजर नहीं आ रही।आज के प्रदर्शन में शामिल लोगों ने जमकर नारेबाजी की तथा केंद्र एवं राज्य सरकार से गुहार लगाया कि मेट्रो हमारी आवश्यकता है और इसे अब और ज्यादा विलंब किए बिना कार्य शुरू होना चाहिए।
आज सभी निवासियों ने एकजुट होकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मेट्रो परियोजना को स्वीकृति नहीं दी गई, तथा कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके अलावा 26 अप्रैल को हजारों की संख्या में निवासी दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।
टीम नेफोवा
अब लटकाना नहीं चलेगा, नया बहाना नहीं चलेगा।
@narendramodi@PMOIndia@mlkhattar@MoHUA_India@Secretary_MoHUA@myogiadityanath@ChiefSecyUP
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वर्षों से मेट्रो परियोजना को लेकर लगातार डीपीआर में संशोधन किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रगति नगण्य है। सवाल उठना स्वाभाविक है—आखिर बार-बार बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, और क्या यह देरी महज़ प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर जिम्मेदारी से बचने का एक जरिया?
यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर यहां आज भी गंभीर कमी बनी हुई है। रोज़ाना जाम, लंबा आवागमन और असुविधाएं यहां के निवासियों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी हैं। विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र की जनता ने हर चुनाव में सत्तारूढ़ दल को भारी समर्थन दिया है, फिर भी उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी जारी है।
मेट्रो अब सुविधा नहीं, आवश्यकता बन चुकी है। सरकार को यह समझना होगा कि बार-बार की देरी से लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। अब समय आ गया है कि ठोस निर्णय लेकर इस परियोजना को बिना और विलंब के धरातल पर उतारा जाए।
#Metro4GreaterNoidaWest