सच बोलना इतना बड़ा गुनाह हो गया जहाँ सड़कें गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हैं वहाँ विकास की बातें सिर्फ दीवारों पर रह गई हैं।
जब एक आम इंसान ने सच्चाई सामने रखनी चाही तो उसे सच की कीमत जेल जाकर चुकानी पड़ी
यह दर्द सिर्फ एक इंसान का नहीं
पूरे UP की खामोशी का है💔🥺
"haji salman" lo
सरकार ने मान लिया कि हमसे गलती हुईं है.
ABP न्यूज़ इस वीडियो को डिलीट करवा चुका है... जनता तक पहुंचाना आपकी ज़िम्मेदारी है. मिलाओ हाथ करो RT #Pahalgam
https://t.co/j5ZVagvgzD
बिहार में बुर्का पहनकर शराब तस्करी कर रही 2 महिलाओं को पुलिस ने पकड़ा. सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि ये महिला मुस्लिम है. जबकि ये सच नहीं है. देखिये ये रिपोर्ट #AltNewsFactCheck#Bihar
@ScienceJourney2 भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वाले जय गोपाल और हंस राज वोहरा शायद हिंदू अरोड़ा समुदाय से थे। फाँसी की पैरवी करने वाले वकील राय बहादुर सूर्यनारायण पांडे हिंदू ब्राह्मण थे। उन्हें बचाने वाले वकील असफ अली मुस्लिम थे, जिनका कोई हिंदू जाति नहीं था, और वे कश्मीरी मूल के थे।
उत्सवों में मुसलमानों को नीचा दिखाने, हिंसा करने और मुस्लिम संपत्तियों को नष्ट करने का एक साधन बन गया है। इंदौर के #महू में, भारत की जीत का जश्न मना रही भीड़ ने एक मस्जिद के बाहर सांप्रदायिक नारे लगाए, जिसके परिणामस्वरूप आगजनी और हिंसा हुई। #महू #इंदौ
घायल गाय की तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि एक खास इलाके के मुस्लिमों ने उस गाय पर हमला किया. सुदर्शन न्यूज़ के एक पत्रकार ने इस दावे को और ज़्यादा फैलाया, लेकिन बाद में इसे हटा दिया. जानें क्या है पूरा मामला
अगर औरंगज़ेब का मक़सद (छावा) शांभाजी महाराज को इस्लाम क़बूल कराना होता तो शांभा जी के पिता शहाजी महाराज को पहले इस्लाम क़बूल करवाते और उनके साथ सभी हिंदू मुग़ल आर्मी को करवाते पर औरंगज़ेब ने (छावा)शांभाजी के पिता को अपना आर्मी चीफ बनाया और तोहफ़े में बीजापुर का इलाक़ा सौंप दिया और राजा की उपाधि भी दी, लेकिन औरंगज़ेब का ये चेहरा नहीं दिखाया जात! राजाओं की लड़ाई सिर्फ़ सत्ता हासिल करना था धर्म का मामला कही था ही नहीं,मंदिर को औरंगज़ेब ने तोड़ा सत्य है पर ये जंग के दौरान टूटे ठीक वैसे ही जैसे पंजाब में गुरुद्वारा टूटे ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पर मौजूदा सरकार गुरुद्वारा विरोधी नहीं थी पर ख़किस्तानी उसकी आड़ में छुप कर हमला कर रहे थे.काल्पनिक फ़िल्में और नए नए इतिहासकार धर्म का चश्मा लगा कर एक महान योद्धा जो हर जंग जीत जाए उस औरंगज़ेब को बदनाम और हारे हुए का महिमामंडन कर रहा है.जंग में जीत हार लगा रहता महाभारत से युद्ध होते आ रहा है हारे हुए को मृत्यु दंड मिलता आ रहा है. धर्म का चश्मा उतार के देखें ये दो राजा की लड़ाई के रूप में ही दिखेगा जिसमे एक पराजित होता है और उसे मृत्यु दंड दी जाती है.
Delhi LG edited his post and removed the part where he said there was a stampede and loss of lives...
ANI copy pasted his first tweet, Soon after he edited his tweet, ANI deleted their tweet and posted a new tweet quoting his edited tweet. That's not how a News agency is expected to report.
मदरसे के बच्चों को चलती ट्रेन में दबंगों ने बेरहमी मारा-पीटा उर्दू नाम से कितना नफ़रत है 😡
मुंबई जाने वाली ट्रेनों में ये पहला हादसा नहीं है मुसलमानों के साथ इसके पहले भी कई बार हुआ है ☝️
@IRCTCofficial कृपया इस वीडियो की पुष्टि करके इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए!!
मौलाना कमर गनी उस्मानी साहब बिना किसी अपराध के पिछले 3 सालों से जेल में बंद है वह गुस्ताखियों के खिलाफ जेल में भूख हड़ताल पर बैठे है
यति नरसिंहानंद के खिलाफ जेल भरो आंदोलन की घोषणा करने, जंतर-मंतर पर पिंकी चौधरी के खिलाफ प्रदर्शन करने, त्रिपुरा जाकर जुलूस के दौरान दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करने पर मौलाना कमर गनी उस्मानी और संस्था के अन्य सदस्यों पर कई फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए वह पिछले 3 साल से झूठे मुकदमे में साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है यहां भी जेल प्रशासन एटीएस के दबाव में अत्याचार कर रहा है।
मौलाना कमर गनी उस्मानी के दोनों पैरों तथा एक हाथ में चर्बी की गांठ के कारण चलना मुश्किल है, 2 साल तक सिविल अस्पताल दौड़ दौड़ कर वह थक गए पेन किलर देने के अलावा कोई इलाज नहीं हुआ, उनका कहना है यहां एटीएस का गैर कानूनी ऑफिस है, एटीएस के अधिकारी यहां रहते हैं उनके आदेश पर मेरा जेल रिकॉर्ड और मेरी रिपोर्ट गलत भेजी जाती है, जिस की वजह से इलाज के लिए पैरोल भी नहीं मिलती, पिछले 116 दिनों तक उन्हें खोली में बंद रखा गया, 20 जनवरी को माइनर हार्ट अटैक आने के बिना पर उन्हें खोला गया, नमाज के लिए कुर्सी ना मिलने पर टूटी टॉयलेट चेयर पर बैठकर नमाज पढ़ते है।