वर्तमान में प्रदेश में सबसे बड़ी मांग तृतीय श्रेणी शिक्षकों के ट्रांसफर की है जिसको लेकर शहीद स्मारक पर पिछले दो दिन से शिक्षक साथी धरने पर है, अभी तक सरकार और शिक्षकों के बीच बात नहीं बन पाई है।
#3rd_ग��रेड_ट्रांसफर_बहाल_करो
नारी शक्ति वंदन की बात करने वाली सरकार आज नारी शक्ति की आवाज को दरकिनार कर रही है ,
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले करे अन्यथा ���ससे भी बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा ll
मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी, शिक्षा मंत्री @madandilawar जी, ये दूसरों के बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्���क, जो आज अपनों से मिलने के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं, वर्षों का यह लंबा वनवास अब खत्म होना चाहिए ये जायज मांग है पुरी करों।
@RajCMO
#तृतीय_श्रेणी_ट्रांसफर
तबादला नीति की मांग को लेकर शिक्षकों का धरना आज दूसरे दिन भी जारी, शहीद स्मारक पर डटे हैं शिक्षक-शिक्षिकाएं।
कल देर रात सरकार से वार्ता बेनतीजा रही, इसके बावजूद आंदोलन नहीं थमा।
आज का यह वीडियो देखि���- हाथों में पत्तियां लिए एक शिक्षिका मांग करते-करते भावुक होकर रो पड़ी। सरकार कब सुनेगी इनकी गुहार?
#ट्रांसफर
जीत की और बढ़ते हुवे ✨✌️✌️
अतिरिक मुख्य सचिव महोदय अखिल अरोड़ा जी का बुलावा आया है , वार्ता के लिए डेलिगेशन गया है ।
ट्रांसफर तो करने ही होंगे।।
लोकतंत्र में तानाशाही, नहीं चलेगी नहीं चलेगी।।
#मदन_दिलावर_इस्तीफा_दो#तृतीय_श्रेणी_ट्रांसफर
धरना दे रहे आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर विद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की :
लोकसभा का मेंबर बना पहला काम मैंने किया, यह जो बच्चे हैं, डेफ एंड डम्ब ( मूक-बधिर), तो मैंने उन्हीं के लिए गांधी बधिर विद्यालय खोला था��� आज इस बात को करीब 40 साल से ज्यादा हो गया। अब वो बढ़ते-बढ़ते कॉलेज बन गई है जोधपुर के अंदर।
इस प्रकार से मेरे को उस वक्त से मालूम है कि डेफ एंड डम्ब बच्चों की प्रॉब्लम क्या रहती है। आजकल तो बहुत ही आधुनिक तकनीकें आ गई हैं। हमारी गवर्नमेंट ने ही शुरू की थी देश के अंदर, बाद में भारत सरकार ने शुरू किया। 7 साल- 8 साल तक के बच्चों को जो है कॉकलियर इंप्लांट लग जाते हैं।
बच्चे का अगर बचपन में सरकार ऑपरेशन क���वा देती है जैसे मैंने शुरू किया राजस्थान के अंदर, मेरे दूसरे कार्यकाल के अंदर, साढ़े 6-7 लाख का खर्चा आया। हमने जो भी बच्चा आया, सबका कॉकलियर इंप्लांट लगाया तो वो बच्चे उसके बाद में बोलना और सुनना सीख जाते हैं। जब सुनना सीखेंगे तो बोलना सीख जाते हैं। प्रॉब्लम आती है सुनने में। अगर पैदाइश से ही वो सुन नहीं सकता, तो ये ब���लेगा क्या? जब सुनाई ही नहीं देता है तो कौन क्या बोल रहा है। तो ये जो नई तकनीक आई है, बहुत ही कारगर है। अब मैंने सुना भारत सरकार ने भी इसके ऊपर ध्यान दिया है। तो राजस्थान तो वो राज्य है।
अभी बच्चों की प्रॉब्लम यही थी, एक तो टीचर्स जो हैं, ये साइन लैंग्वेज होती है, बिना साइन लैंग्वेज के जो टीचर लगे हुए हैं अधिकांश, वो क्या पढ़ाएंगे जब उनको साइन लैंग्वेज खुद को नहीं आती है, इनको क्या पढ़ाएंगे? और ये तम���म बच्चे बड़े एक्सपर्ट बन गए हैं, काफी लोग, जो साइन लैंग्वेज से बातचीत कर सकते हैं सब।तो इनकी उस संबंध में समस्याएं हैं।
फिर व्यवहार क्या है टीचर्स का, इनके नियम-कायदे फॉलो होते हैं कि नहीं होते हैं, सरकार सुविधाएं देती है वो इन तक पहुंचती हैं कि नहीं पहुंचती हैं, बिल्डिंग जर्जर हालत में है, बाथरूम गंदे पड़े हैं, गंदगी साफ नहीं होती है, जनरल समस्याएं इन्होंने बताई हैं।
तो मैं मुख्यमंत्री को खुद लिखूंगा डी.ओ. लेटर, बताऊंगा कि मैं जाके आया हूँ और मेरा खुद का बैकग्राउंड इन्हीं की सेवाओं से शुरू हुआ है। मैं उनको अहसास करवाने की कोशिश करूँगा कि आप भी ध्यान दें। ये लड़के-लड़कियाँ यहाँ पर करीब 300 के लगभग पढ़ रहे हैं यहाँ पर। तो जब बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते, आप सोच सकते हो क्या बीत रही होगी। साइन लैंग्वेज ही है जिससे अपना वो जीवन बसर कर सकते हैं। ये बच्चे बड़े उम्र के हैं, इ���का वो ऑपरेशन भी नहीं हो सकता है। ये स्थिति है।
तो इसलिए मैंने जान-बूझकर उचित समझा कि मैं खुद जाऊँ। अभी मिस्टर जूली साहब आके गए थे, वो विपक्ष के नेता हैं, वो भी उठाएंगे असेंबली में भी। वो भी लिखेंगे मुख्यमंत्री जी को, हम दोनों बात करेंगे आपस के अंदर। और जो भी हो सकता है।
ये संस्थान बहुत शानदार संस्थान है । पोद्दार जी के नाम से बनी है, 50 साल पहले बनी होगी, इसका अपना अलग महत्व है राजस्थान के अंदर। बाकी तो धीरे-धीरे पनपती हैं, सात हैं, आठ हैं, जो भी संस्थान हैं।
दुर्भाग्य है प्रदेश का कि मैंने जो बाबा आमटे विश्वविद्यालय खोला यहाँ निशक्तजनों के लिए, उसमें डेफ एंड डम्ब भी आते हैं, ब्लाइंड भी आते हैं, हैंडीकैप्ड भी आते हैं। वो विश्वविद्यालय कागजों के अंदर है। वीसी को बिठा रखा है ये शिक्षा संकुल के अंदर। सरकार की ये स्थिति है, ढ���ई साल से वो वीसी बिठा रखा है वहाँ पर। अब रिटायरमेंट हो गया उनका।
कुछ सेक्टर ऐसे होते हैं जहाँ राजनीति बीच में नहीं आती। उसमें तो सरकार को चाहिए चाहे कोई पार्टी के बच्चे पढ़ते हों, किसी परिवार के कोई, किसी पार्टी का कोई मतलब नहीं है। ये तो सेवा का काम है। इनकी सेवा करना, ईश्वर की सेवा करना है।