पुराने और बड़े शिक्षक संगठनों के सामने हम (@Team_BRVAS) अभी छोटे हैं, कमजोर हैं और खासकर BPSC शिक्षकों के बीच हमारी एकता भी उतनी मजबूत नहीं है—यह सच्चाई है, और इससे हमें इनकार नहीं करना चाहिए।
लेकिन एक सवाल जरूर मन में आता है…
जब बड़े संगठन सातवें वेतनमान जैसे मूल और महत्वपूर्ण मुद्दे से हटकर दूसरे मुद्दों पर ज्यादा बात करते हैं, तो मन में यह सवाल उठता है कि आखिर सातवां वेतनमान हमारे लिए प्राथमिक मुद्दा क्यों नहीं बन पा रहा?
क्या यह संभव है कि यदि सभी शिक्षकों को सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ मिल गया, तो पुराने संगठनों के पास वर्षों से चल रहे आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा खत्म हो जाएगा?
यह सिर्फ मेरी (@Anish97098) सोच है। हो सकता है मैं गलत होऊं।
इसलिए इसे आरोप के रूप में नहीं, बल्कि एक सवाल के रूप में देखिए और स्वयं विचार कीजिए।
हमारा उद्देश्य किसी संगठन को कमजोर करना नहीं है।
हमारा उद्देश्य यह है कि शिक्षकों को भविष्य में ऐसा मजबूत और जवाबदेह प्रतिनिधित्व मिले, जो उनकी आवाज को मजबूती से सरकार और व्यवस्था के सामने रख सके।
अगर आप बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ (Teachers Welfare Association) को मजबूत करते हैं, तो आप सिर्फ एक संगठन को मजबूत नहीं कर रहे हैं—आप अपने लिए एक मजबूत प्रतिनिधि तैयार कर रहे हैं।
आज हम छोटे हैं, लेकिन एकता, संगठन और लगातार संघर्ष से कल हमारी आवाज बड़ी हो सकती है।
सातवां वेतनमान हमारा प्रमुख मुद्दा है।
शिक्षकों की एकता हमारी ताकत है।
और मजबूत प्रतिनिधित्व हमारा भविष्य।
सोचिए… जुड़िए… और संगठन को मजबूत कीजिए।
#7thpayForBiharTeachers
#BiharTeachersNeed7thPay
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शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं शिक्षक! जब काम पूरा तो वेतन में भेदभाव क्यों? बिहार के सभी शिक्षकों को पूर्ण रूप से 7वां वेतनमान मिलना ही चाहिए।
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