@rohitdwivedi97 Dekho baat aisa hai bhai mangal pande saryuparin hi the lekin filhal ke ek interview me unke descendent khud ko kkb batay hai, to aab unhe kkb hi mana jayga, aur bahut sare saryu khud ko kkb bolte hai, abhi bhi mangal pande saryu hai proof ho skta hai lekin ab bekar hai y sb krna
@Sanadhya_vipra@coldfeet1234 Ye dalle bas fekna jante hai 😂 inke bap dada barabri na kar pay ab ye karenge social media pe baith kar kahaniya suna kar hawabaji me 🤣
इस ब्राह्मण योद्धा ने बिहार के भोजपुर क्षेत्र के जगदीशपुर के राजपूत जमींदार कुँअर सिंह को भी संरक्षण (सुरक्षा ) दिया था, अंग्रेज़ उनके किले को जीतने में सक्षम नहीं हो पाए थे, उनके बेटे मधुसूदन राय दीक्षित ने भी अंग्रेज़ों के खिलाफ विद्रोह किया था,
राजा रंजीत राय दीक्षित सरयूपारीण ब्राह्मण थे,
इनके पूर्वज प्रतापगढ़ के निवासी थे,
पंडित राजा रंजीत राय दीक्षित डभौरा रियसत के राजा थे, इन्होने 1857 के क्रांति मे इन्होने अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, और अनेको बार अंग्रेज़ों को हराय थे,
#saryupareen#sarwaria#brahmin
राजा रंजीत राय दीक्षित सरयूपारीण ब्राह्मण थे,
इनके पूर्वज प्रतापगढ़ के निवासी थे,
पंडित राजा रंजीत राय दीक्षित डभौरा रियसत के राजा थे, इन्होने 1857 के क्रांति मे इन्होने अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, और अनेको बार अंग्रेज़ों को हराय थे,
#saryupareen#sarwaria#brahmin
इस ब्राह्मण योद्धा ने बिहार के भोजपुर क्षेत्र के जगदीशपुर के राजपूत जमींदार कुँअर सिंह को भी संरक्षण (सुरक्षा ) दिया था, अंग्रेज़ उनके किले को जीतने में सक्षम नहीं हो पाए थे, उनके बेटे मधुसूदन राय दीक्षित ने भी अंग्रेज़ों के खिलाफ विद्रोह किया था,
Ranjit rai dixit ji great freedom fighter of vindhyanchal a saryupareen brahman confirmed by his decendents the dixits are orginaly from pratapgarh they migrated in vindhya in 15th century
इनकी प्रमुख रचनाएँ : मेरे राम का मुकुट भीग रहा है,चितवन की छाँह, कदम की फूली डाल, तुम चंदन हम पानी,
प्रमुख पुरस्कार :
पद्मश्री (1988)
पद्मभूषण (1999)
साहित्य अकादमी पुरस्कार
सरस्वती सम्मान और मूर्तिदेवी पुरस्कार
विधानिवास मिश्र जी का जन्म गोरखपुर जिले के पकड़डीहा गांव के सरयूपारीण मिश्र ब्राह्मण परिवार मे हुवा था,
वे हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार, निबंधकार, भाषाविद और संस्कृत के विद्वान थे। उन्हें ललित निबंधों का सम्राट माना जाता है।
इनकी प्रमुख रचनाएँ : मेरे राम का मुकुट भीग रहा है,चितवन की छाँह, कदम की फूली डाल, तुम चंदन हम पानी,
प्रमुख पुरस्कार :
पद्मश्री (1988)
पद्मभूषण (1999)
साहित्य अकादमी पुरस्कार
सरस्वती सम्मान और मूर्तिदेवी पुरस्कार
विधानिवास मिश्र जी का जन्म गोरखपुर जिले के पकड़डीहा गांव के सरयूपारीण मिश्र ब्राह्मण परिवार मे हुवा था,
वे हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार, निबंधकार, भाषाविद और संस्कृत के विद्वान थे। उन्हें ललित निबंधों का सम्राट माना जाता है।