Dear Mr @elonmusk ,
We love you, but not at the cost of our sovereignty.
We know Ambani and Adanis are oligarchs and they are the buddies of @narendramodi and @RahulGandhi or anybody in power for that matter. That’s their survival strategy.
But our democratic country knows how to handle our oligarchs and it doesn’t don’t need anyone to give us lectures on our internal affairs.
You have no idea as to how fast Internet has reached our villages and hamlets and at a far cheaper rate! In fact, much faster than some of your western countries could have ever imagined!
You better focus on your own country and utilise your time in making great products.
Stay off. We will figure it out ourselves.
प्रिय देवांशी,
अगर आपसे कोई कहे भारत सैंकड़ों साल गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तो आप बोलोगे, उस समय क्या लोग रेंग रेंग कर चलते थे?
अगर कोई बताये कि मुगल काल में हिन्दू खुली हवा में सांस नहीं ले पा रहा था, तो आप दांत निपोरकर बोलोगे कि तो क्या 300 साल तक हिन्दू बिना हवा के गोबर सूंघकर जिंदा था?
आपको शाब्दिक सन्दर्भ और अर्थ पता नहीं है, अगर इतना अल्पविकसित बौद्धिक स्तर है आपका, तो माफ़ करना आपको अगर EWS पूरा भी चटा दें, तब भी एक ढंग की परीक्षा नहीं निकलेगी, फिर छाती पीटते रहना हाय आरक्षण, हाय अंबेडकर ...
और ये सच्चाई है, सार्वजनिक तालाबो और जलाशयों से द���ितों को पानी पीने से रोका जाता था, इसके लिए आंदोलन तक करने पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से जातीय संघर्ष सिर्फ कुए से पानी भरने को लेकर होते थे।
अगर आपको इतनी सामान्य समझ और जानकारी नहीं है, ��ो या तो आप नितांत मूर्ख है या आपको पता होने के बाद भी ये कर रही है तो आप बहुत बड़ी धूर्त है।
अनंत सिंह बोल रहा है 'चोरी-चमारी'
@indiatvnews की एंकर हँस रही है।
बोल रही है जनता आपको बार बार जिता रही है, मंत्���ी क्यों नहीं बन जाते?
इन जातिवादी पत्रकारों की यही सोच है।
मनुस्मृति के लिए किसी से लड़ जाएंगे मगर दलितों को गाली देने वाला मंत्री चाहिए।
बहनजी भाजपा से इतनी डरी होती हैं कि
-रोहित वेमुला के लिए संसद में स्मृति ईरानी से भिड़ जाती हैं।
सहारनपुर के दलितों के लिए सरका��� को ललकार कर इस्तीफा दे देती हैं।
योगी शब्बीरपुर यात्रा रोकते हैं तो पैदल पहुंच जाती हैं।
समाजवादी पार्टी को समर्थन देकर फूलपुर गोरखपुर कैराना हराती हैं।
भाजपा कांग्रेस के विरोध के बावजूद, सपा RLD संग महागठबंधन करती हैं।
सबसे बड़े राज्य में सबसे बड़ी चुनौती देती हैं।
जांच एजेंसियां लगा दी गईं फिर भी भाजपा को इतनी बड़ी चुनौती पेश करती हैं कि पूरे उत्तर भारत में मात्र 18 सीट हारने वाली BJP उसमें से 15 सीट इसी गठबन्धन से हारती है।
इसलिए ऐसी ओछी बातें कोई नेता कहे तो कोई बात नहीं बयान बदलते रहते हैं मगर प्रोफेसर पत्रकार यूट्यूबर चिंतक विचारक लोगों को इन दुष्प्रचारों का खंडन करना चाहिए।
Video Credit: Arfa Khanum Sherwani Youtube Channel.
समाज के सबसे ज्यादा सताए हुए लोग जुटकर सामाजिक परिवर्तन के महानायक को याद कर रहे हैं।
उनकी नेता उनसे संवाद कर रही हैं।
पार्कों स्मारकों की दुर्दशा कब हुई बता रही हैं।
समझ नहीं आ रहा है लोग इसपर इतना क्यों बौखलाए हुए हैं!
सच में, वाजिब आलोचना भी सुनने की सहनशीलता नहीं रह गई है?
हुक्मरान बनने बनाने का ख़्वाब हक़ीक़त से बहुत दूर जा चुका है।
मगर सुखद यही है कि बहुजन समाज पहले से भी ज्यादा जागरूक हो चुका है।
सबसे बुरे दौर में पहुंच गई है आपकी BSP, मगर नेतृत्व ने ना सरेंडर किया है और ना ही मान सम्मान स्वाभिमान से कोई समझौता किया है।
अगर हमारा समाज अपमान का बदला जजों पर जूते फेंककर लेना शुरू कर दे, तो इस देश की तमाम अदालतें जूतों से भर जाएँगी।
मगर बाबासाहेब ने हमें संस्कार सिखाए हैं।
प्रशांत किशोर बोल रहे हैं हम कोई 'चोरी चमारी' करने वाले लोग हैं जो जेल भेज दोगे?
चोरी के साथ चमारी! देश की सबसे बड़ी आबादी वाली जाति तुम्हारे लिए गाली है!
ये अपराध सिर्फ नैतिक नहीं, कानूनी भी है।
SC/ST एक्ट के तहत एक्शन ले@NCSC_GoI#CasteistPrashantKishor
https://t.co/p1bEvE1FFp
धोबी समाज का बच्चा हिमांशु बहुत होनहार था।
उसे रील बनाने में भी रुचि थी। बड़ा भाई गंगा-बहरा है। अतः वही अपने गरीब माँ-बाप का सहारा था।
मीना कोटवाल, क्रांति कुमार, प्रशांत कनौजिया.. भी इसी समाज से आते हैं लेकिन हत्यारे मुस्लिम वर्ग से हैं। अतः ये सारे महानुभाव मौन हैं। शर्मनाक!
सेवा में,
राष्ट्रपति,
राष्ट्रपति भवन, भारत,
नई दिल्ली-110004
विषयः बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद (13, 14, 15, 25, 26, 29, 49 और 51A(f)) का उल्लंघन करने एवं बौद्ध धर्म की विरासत बौद्धों से छीनकर यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर के साथ छेड़छाड़ करने के सम्बन्ध में।
महोदय,
आपको अवगत कराना है कि बोधगया मंदिर अधिनियम-1949, महाबोधि मंदिर के प्रबंधन और नियंत्रण को हिंदू और बौद्ध प्रतिनिधियों के संयुक्त बोर्ड को सौंपता है। इसके तहत 9-सदस्यीय प्रबंधन समिति बनाई गई, जिसमें हिंदू बहुमत (5 हिंदू, 4 बौद्ध) रखा गया। इस समिति के अध्यक्ष हमेशा एक हिंदू ही होते हैं।
महोदय उक्त ��धिनियम के कारण हिन्दू बहुल समिति बौद्धों को उनके अधिकारों से वंचित रखती है और यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वधरोहर के साथ छेड़छाड़ कर बौद्ध धर्म के मूल स्वरूप को बदलने का निरन्तर प्रयत्न कर रही है, जिससे बौद्ध धम्म का मूल अस्तित्व खतरे में पड़ता प्रतीत हो रहा है। उक्त अधिनियम संविधान के निम्नलिखत अनुच्छेदों का उलंघन करता हैः-
संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का विश्लेषण:
1- अनुच्���ेद 13: मूल अधिकार
अनुच्छेद 13(1) मौलिक अधिकारों के विरुद्ध कोई भी कानून शून्य होगा।
संविधान का अनुच्छेद 13(1) कहता है कि कोई भी कानून जो संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, वह शून्य होगा।
बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 बौद्ध समुदाय के (धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार-अनुच्छेद 25-28) का उल्लंघन करता है क्योंकि यह अधिनियम मंदिर का प्रशासन हिंदू बहुल समिति को देता है, जबकि यह स्थल बौद्ध धर्म का केंद्र ह���। इस आधार पर यह अधिनियम अनुच्छेद 13 का उल्लंघन करता है।
2- अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार
संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है कि राज्य सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करेगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा।
महाबोधि मंदिर का प्रशासन हिंदू बहुल समिति को देना स्पष्ट भेदभाव है। भारत में किसी भी अन्य धार्मिक स्थल (जैसे हिंदू मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा) का नियंत्रण दूसरे धर्म के हाथों में नहीं है, लेकिन बौद्धों के सबसे पवित्र स्थल को हिंदू बहुल समिति को सौंप दिया गया। यह स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
3- अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध।
अनुच्छेद 15 (1) कहता है कि राज्य धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता। बौद्ध ��र्म एक स्वतंत्र धर्म है, लेकिन बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 बौद्धों को उनके ही धार्मिक स्थल से वंचित करता है। अगर अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों का पूरा प्रबंधन उनके समुदाय के पास है तो बौद्धों को यह अधिकार क्यों नहीं? यह अनुच्छेद 15(1) का सीधा उल्लंघन है।
4- अनुच्छेद 25: धर्म की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 25(1) हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। बौद्धों को उनके ही ��बसे पवित्र स्थल के प्रबंधन से वंचित करना उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। हिंदू बहुमत वाली समिति मंदिर के संचालन में बौद्ध परंपराओं को सीमित समाप्त कर सकती है। यह अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है।
5- अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 26 (ख): अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध करने का अधिकार
अनुच्छेद 26 (ख), यह अनुच्छेद सभी धार्मिक समूहों को अपने धार्मिक संस्थानों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने का अधिकार देता है। बौद्ध धर्म एक स्वतंत्र धर्म है, लेकिन बोधगया मंदिर अधिनियम हिंदुओं को महाबोधि मंदिर के प्रबंधन में बहुमत देकर बौद्धों के इस अधिकार का हनन करता है।
अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों (जैसे, हिंदू मंदिर, मस्जिद, चर्च) के प्रशासन पर किसी अन्य धर्म का नियंत्रण नहीं है, फिर महाबोधि मंदिर पर हिंदू बहुमत क्यों? इस आधार पर, यह अधिनियम अनुच्छेद 26 क��� स्पष्ट उल्लंघन करता है।
6- अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद 29(1): अल्पसंख्यक समुदायों की संस्कृति और धरोहर की रक्षा
अनुच्छेद 29(1) कहता है कि किसी भी समुदाय की संस्कृति, भाषा या धरोहर को संरक्षित किया जाएगा।
महाबोधि मंदिर बौद्ध संस्कृति और धरोहर का सबसे बड़ा प्रतीक है। लेकिन यह मंदिर बौद्धों के नियंत्रण में न देकर उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को कमजोर किया जा र��ा है। यह अनुच्छेद 29 का उल्लंघन है।
7- अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय स्मारकों और धरोहरों की रक्षा
अनुच्छेद 49 कहता है कि सरकार को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की धरोहरों की रक्षा करनी चाहिए। महाबोधि मंदिर एक विश्व धरोहर स्थल (UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त) है, लेकिन इसे बौद्धों से छीनकर हिंदू बहुमत वाली समिति को देना इसके ऐतिहासिक महत्व और बौद्ध पहचान को खतरे में डालता है। इसलिए, यह अधिनियम अनुच्छेद 49 के ���ंरक्षण सिद्धांतों के भी विपरीत है।
8- अनुच्छेद 51A(f): हमारी विरासत ��ो सुरक्षित रखने का मौलिक कर्तव्य
अनुच्छेद 51A(f) कहता है कि हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति की रक्षा करे। महाबोधि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्व धरोहर (UNESCO) में शामिल है। इसके प्रशासन में बाहरी हस्तक्षेप इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को खतरे में डालता है।
यह अनुच्छेद 51A(f) के खिलाफ है।
बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949, भारतीय संविधान के कम से कम 8 महत्वपूर्ण अनुच्छेदों (13, 14, 15, 25, 26, 29, 49 और 51A) का उल्लंघन करता है। इन सभी अनुच्छेदों का अध्ययन करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह अधिनियम पूरी तरह असंवैधानिक है।
1- यह बौद्धों के धार्मिक अधिकारों का हनन करता है।
2- यह समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
3- यह बौद्ध अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचलता है।
4- यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के विरुद्ध जाता है।
5- यह धार्मिक स्वतंत्रता और सं���्थानों के स्वायत्त प्रबंधन को बाधित करता है।
6- यह एक ऐतिहासिक बौद्ध धरोहर को उसकी मूल पहचान से दूर करने की साजिश को बढ़ावा देता है।
अतः महोदय से विनम्र निवेदन है कि विश्व धरोहर बौद्ध विरासत की सुरक्षा के दृष्टिगत प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए इस असंवैधानिक अधिनियम (बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949) को अवैध घोषित कर पूरी तरह निरस्त करते हुए महाबोधि मंदिर का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपने के लिए उचित संवैधानिक कार्यवाही करवाते हुए बौद्ध धर्म के अधिकारों को दिलायें और संबन्धित कार्यवाही से अवगत कराने का कष्ट करें।
आपकी महान दया होगी।
भवदीय
(हरीराम राना)
राष्ट्रीय सचिव
2017 में CM आवास को जब गंगाजल से धोया गया था तो अखिलेश यादव खुद को 'शुद्र' बताकर रो रहे थे।
आज आप इस घटिया इंसान की भाषा देखिए।
इसे पानी पीने एवं सावर्जनिक जगहों पर पानी पीने के अधिकार में अंतर नहीं पता। इसीलिए मैं इन्हें बैलबुद्धि कह���ा हूँ। कुछ आता न जाता, चुनाव चिन्ह छाता।🤣