@Hindi_panktiyan में जी भर जिया में मन से मरु,
लौट कर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं..!?
तू दबे पांव चोरी छिपे न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आजमां,
......
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हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पर लिखता–मिटाता हूं,
गीत नया गाता हूं, गीत नया गाता हूं।