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"55 की उम्र…
लेकिन मूड अभी भी नर्सरी वाला!" 😄
कुछ नेता मुद्दों पर बोलते हैं,
और कुछ बस मूड के हिसाब से बोलते हैं।
सदन हो या सड़क पप्पू का अंदाज़ ऐसा रहता है जैसे टीचर ने होमवर्क पूछ लिया हो और जवाब में बस बहाने ही बहाने,
गंभीर राजनीति कम,
ड्रामा और जिद ज़्यादा ,
लगता है उम्र 55 है, पर सॉफ्टवेयर अभी भी चाइल्ड वर्ज़न पर चल रहा है!
कुछ लोग उम्र से बड़े हो जाते हैं…
और कुछ लोग उम्र के बाद भी टिफिन-टाइम वाली मानसिकता से बाहर नहीं आते।
सदन के अंदर हों या बाहर पप्पू का अंदाज़ ऐसा लगता है जैसे क्लास मॉनिटर ने चॉक छीन ली हो ना गंभीरता, ना स्थिरता… बस जिद और ड्रामा फुल ऑन। 55 की उम्र कैलेंडर में है, पर दिल-दिमाग अभी भी स्कूल के लास्ट बेंच पर बैठा है!
"दिन में भैया, रात में सैंया की जीती जागती मिसाल"
जो व्यक्ति इतना नीच और बेगैरत है कि दिन में खुले आम अपनी सगी बहन से चूमा-चाटी कर रहा है...
वह निश्चित ही रात में उसेक्षअपने बिस्तर पर ले जाता होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र के प्रथम दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष के गुंडों (विधायकों) द्वारा चिल्ला-चिल्ली देख कर ऐसा लग रहा था कि वहां विधायक नहीं बल्कि कुत्ते रो रहे हैं!
मेरी जनता से अपील है कि वह इन गुंडों को बहिष्कार करें तथा भविष्य में ऐसे को वोट देना बंद करें!
यह देखिए यह भ्रष्ट लुटेरे चरसी खानदान के बंटी और बबली भारत की संसद को अपना एक पिकनिक स्पॉट मौज मस्ती की जगह समझते हैं
यह दोगले कभी भारत के लोकतंत्र का सम्मान कर ही नहीं सकते
यह लोकतंत्र का मंदिर संसद है संसद की मर्यादा बनी रहनी चाहिए
यहां पूरे भारत के लिए कानून बनता है यहां से पूरा देश चलता है
तो कम से कम यहां तो एक परिपक्व को राजनीति का परिचय दो बे दोगलो
मुझे याद है जब मैं गोरखपुर के एमजी कॉलेज में पढ़ता था तब हमारे एक सर थे उनका बेटा भी हम लोगों के साथ पढ़ता था तो एक दिन उसने क्लास रूम में सर को पापा कह दिया
तो उसी वक्त हमारे सर जी ने अपने बेटे को बहुत डांटा था और कहा था कि इस एमजी इंटर कॉलेज की बाउंड्री के बाहर मैं तुम्हारा पापा हूं इस बाउंड्री के अंदर मैं तुम्हारा सर हूं आज के बाद कभी मुझे बाउंड्री के अंदर पापा मत कहना हमेशा सर कहना
क्योंकि हर एक चीज की एक मर्यादा होती है
आप भाई बहन हैं आप घर में रहिए तो आप वहां जो मन चाहे वह करिए संसद में तो यह मौज मस्ती मत करो बे दोगलो