बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह ( DJ concert) को अनुमति प्रदान करना ना केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण मे शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी उल्लेखनीय है की इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है साँथ में इतनी ऊचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृती के रूप में परिणीत किया जा रहा है।
मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायीयों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूँ कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाये, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूँगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें,
हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास माँ गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।
Rabies is a mild virus;
The virus dies when washed with soap."
- Ambika Shukla, Animal Activist
She should demonstrate it on live TV.
Let a rabies-infested dog bite her; then she should wash the bite mark with detergent and declare herself rabies-free
The people of this country have expectations from the BJP government. Ethical and moral responsibility must be taken by the concerned minister. Simply shunting out or transferring the CBSE Chairman and Secretary is not enough. First the NEET fiasco, and now the CBSE controversy. Completely inexcusable. There are forces which want to instigate GenZ to create a situation against the government. Why are we giving them this opportunity by these fiascos?
What about your son and the children of many ministers? Which country are they helping build while studying and settling abroad? Shouldn’t this ‘build India’ advice start at home first, @PiyushGoyal?
NCERT की किताब वाले विवाद पर J. S. Rajput (पूर्व डायरेक्टर , NCERT) ने ANI के एक इंटरव्यू में कहा कि 👇
पूरा देश Supreme Court of India का सम्मान करता है , लेकिन NCERT भी कोई छोटा संस्थान नहीं है। यहीं से पढ़कर लोग बड़े-बड़े पदों तक पहुंचे हैं।
अगर किताब में कुछ गलती थी , तो बैठकर बात करके ठीक किया जा सकता था। हर साल NCERT अपनी किताबें अपडेट करता ही है।
इतनी सख्त भाषा जैसे “conspiracy” और “scandalous” इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं थी।
उन्होंने ये भी कहा कि गलती हर किसी से होती है , कोर्ट से भी। कई बार लोग सालों बाद बेगुनाह साबित होते हैं, लेकिन गलत फैसलों के लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं होती।
फिर सिर्फ NCERT पर ही इतना सख्त रवैया क्यों?
और हां , करप्शन पर लिखना जरूरी है,
लेकिन उस पर इतनी कड़ी प्रतिक्रिया देना भी सही नहीं था।
किसी किताब को बैन करने से बच्चे, बूढ़े और जवान यह नहीं भूल सकते कि दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से करोड़ों अधजले नोट मिले थे और वे अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं।
JNU की VC कह रही हैं कि दलित छात्र हमेशा विक्टिम कार्ड खेलते हैं और उनको सवर्णों के विरोध का नशा है, उन्होंने UGC Rules को भी पूरी तरह ग़ैर ज़रूरी बताया
शांतिश्री धुलिपुडी “पंडित” स्वयं ओबीसी समाज से आती हैं
सुप्रीम कोर्ट बस ये तय कर दे कि अब से देश का हर नेता, सरपंच से लेकर सांसद तक... -40/800, 4/800 टाइप नंबरों वाले डॉक्टर से ही इलाज कराएगा... कोई नेता इलाज के लिए विदेश या किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में नहीं जाएगा... अगर गया तो उसको अपने पद से इस्तीफ़ा देना होगा 🙏
मौजूदा हालातों में आरक्षण की सबसे बड़ी ख़ामी यह है कि आरक्षण अब सामाजिक न्याय का ज़रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक तुष्टिकरण का हथियार बन गया है।
अगर यह वाक़ई में सामाजिक न्याय का ज़रिया होता, तो समय के साथ आरक्षण लेने वालों की संख्या कम होती जाती।
लेकिन यह राजनीतिक तुष्टिकरण का हथियार बन गया है, इसलिए आरक्षण लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है।
यूजीसी और मोदी: जुड़े गाँठ पड़ जाए
यूजीसी पर सवर्णों का विरोध यूजीसी को ले कर नहीं बल्कि सरकार की हर नीति में ‘दलित, वंचित, शोषित’ की चटनी को ले कर था।
सोच-समझकर जब आप एक वर्ग को, चाहे वह एक ही प्रतिशत क्यों न हो, उपेक्षित रखते हैं, और चुनावी भाषणों में आपको उनकी याद ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ के नारों के लिए आती है, तब एक दिन ऐसा आता है, जब उसको दिखता है कि भाई, हमारा तो ये *** काट रहे हैं।
IAS की कोचिंग हो या उद्यमी को सपोर्ट, हर जगह यह वर्गीकरण हो रहा था। और यह फायनेंस कौन कर रहा था? उसकी फंडिंग का एक बहुत बड़ी हिस्सा इनकम टैक्स और परोक्ष करों के माध्यम से यही सवर्ण दे रहा था क्योंकि कमाने और उपभोग की शक्ति इनके ही पास है।
फिर भी, ‘चुनमंगे’ और ‘ठाकुर का कुआँ’ जैसे विमर्श चले। यूरेशिया भेजो, भारत छोड़ो, वी आर कमिंग फॉर यू लिखा गया और सवर्णों के नरसंहार की बातें ‘डिसेंट’ कह कर डिसेंट्री की तरह उपचार-रहित हो कर फैलती रही।
यही सरकार मुँहठोकबा बन कर ताकती रही। सवर्ण चार पोस्ट लिख कर बताता रहा कि अब अति हो रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को लगा कि थोड़ा और ढकेलते हैं इनको… सवर्ण को उबलते गर्म पानी के पतीले में कैद मेढक समझा गया।
पर सवर्ण बहुत कुछ है, **या तो बिलकुल नहीं, उतना बड़ा *ति* तो बिलकुल ही नहीं, उस कोटि का चू** तो एकदम भी नहीं। वही तुम्हारा विमर्श चला रहे हैं और तुम उन्हीं को डंडा डाल रहे हो? ये कौन सा मास्टरस्ट्रोक है?
स्थिति यह है कि चाहे @RSSorg हो या @BJP4India, जो वातावरण ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का इन्होंने बनाया था, अब इन पर किसी का विश्वास नहीं रहेगा। केवल वही विश्वास करने का ढोंग करेंगे, जिन्हें राजनैतिक रूप से कहीं जाना है। परंतु वह भी, अपने लोगों के बीच, यही कहते पाए जाते हैं: अजीत भाई, ब्लंडर हो गया, उबरना मुश्किल है।
जब आपका पूरा फोकस न केवल बाकी हर समाज के लिए जात्योन्मुखी योजनाओं को लाने का रहे, बल्कि आप लक्षित करके उसके प्रति होती घृणा पर चुप रहें, और अंततः अपनी नीतियों से उसकी उपेक्षा दिखा कर, बाकियों को यह कहें कि देखो, उन्हें पेल दिया, तुम भी ‘हिसाब चुकता करो’, तब वह सोचने लगता है।
सवर्ण अभी वही सोच रहा है। अगले छः माह तक, ये जब भी कुछ सकारात्मक करेंगे, इनका उपहास किया जाएगा। ये त्रिपुंड लगाएँगे, लोग कहेंगे कि तुम ढोंगी हो। ये रैली से ‘समभाव’ की बात करेंगे, लोग कहेंगे कि रहने दे भाई!
240 के बाद का एकजुट होता समाज, इनकी अनेक बकलोलियों के वर्तमान परिणाम के कारण राजनैतिक रूप से टूट रहा है। अब बात ‘जुड़े गाँठ पड़ जाए’ वाली बात हो गई है। जिनको समझना है समझें कि सवर्ण किसी पार्टी के बँधुआ श्रमिक नहीं हैं।
We are going to file an FIR against the RJD leader Kanchan Yadav for provoking SC, ST and OBCs against the innocent college-going Savarna students
You can not provoke vioIen against our kids.
I never even imagined that after supporting BJP for nearly 2 decades and posting over 2 lakh tweets supporting BJP, i will be posting tweets against the very party that was close to my heart.
As the party changes its course so should I
No regrets
1. समिति का चूरन नहीं चाहिए, वापस लो, संशोधित करो
2. स्पष्ट लिखो कि किसी पर भी जातीय टिप्पणी, राजनैतिक नारेबाज़ी, दीवारों पर ग्रैफ़िटी पर समान दंड होगा, कोई भी 'विशेष कर' जैसे शब्द नहीं
3. जाँच होने तक सुरक्षा दो, बच्चे निलंबित न किए जाएँ
4. कैंपस में पुलिस नहीं चाहिए, जब तक अपराध जघन्य/गंभीर ना हो
5. झूठा केस बनाने वाले को कॉलेज से निकाला जाए, आर्थिक दंड और जेल (क्योंकि उद्देश्य भविष्य की हत्या होती है)
Dear @narendramodi. The @ugc_india Equity Regulations are unjust and must be revised:
1 Caste discrimination victim definition excludes general category
2 Equity committee composition excludes mention of general category
3 There is no provision for punishing false complaints
14. In the interest of Bharat's future,I urge the Govt to rollback the #UGCRegulations, & not allow loyalist trolls to block genuine feedback. As someone who bats for & will continue to bat for Hindutva, I can support only the Bhagwa & the Blue of Bhagawans Shiva & Vishnu. JSR!