दगड़ू भाई : बसपा का ग्राफ गिर रहा है।
उत्तर : हो सकता है।
��गड़ू भाई : पदाधिकारी सही तरह कार्य नही कर रहे?
उत्तर : हो सकता है। ।
दगड़ू भाई : बहनजी की नीतियां सही नही है।
उत्तर : राजनीति प्रयोगशाला होती है। निर्णय कभी कभी प्रभावी नही होते। वर्तमान के राजनीतिक युद्ध व सोशल मीडिया में सामंजस्य न बैठा पाना कमजोरी तो है। इससे इनकार नही किया जा सकता।
दगड़ू भाई : पैसे लेकर टिकट दिए जाते है।
उत्तर : बसपा कूपन प्रत्याशियो व पदाधिकारी को देती है जिससे कि गरीब जनता से पैसा इकट्ठा किया जा सके व चुनाव लड़ा जा सके। लेकिन आजकल लोगो के पास इतना ज्यादा पैसा है की प्रत्याशी कूपन बांटकर मेहनत करने की जगह स्वयं पार्टी फंड में कूपन का सारा पैसा जमा कर देते है।। बिना पैसे के कौन चुनाव लड़ सकता है? बसपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसे उधोगपति चन्दा नही देते है।।
दगड़ू भाई : इतना होने के बाद भी आप बसपा का प्रचार क्यो कर रहे है?
उत्तर : में अपने हिस्से किस समाजिक जिम्मेदारी पूरी कर रहा हूँ। जिससे भविष्य में आत्मचिंतन में इसपर गर्व कर सकू की जिस समय समस्या थी उस समय मे पत्थर फेंकने वालो में से नही बल्कि बचाने वालो में था। अगर पैमाना इसे ही ब��ाये तो अनुसुचित जाति का आरक्षण किसी न किसी रूप में खत्म किया जा रहा है। प्रोफेशनल व अन्य सभी फील्ड में एससी के बच्चो को रोकने के लिए साम दाम दंड भेद सभी यूज किये जा रहे है। आरक्षण काफी हद तक खत्म हो गया है। जिस पर सबसे ज्यादा निराशा इसी आरक्षण से नौकरी कर रहे व्यक्ति दे रहे है जो इसका विरोध नही करते है। न ही इसे रोकने के उपाय करते है।
लेकिन हम राजनीतिक से अलग रोजाना इसपर भी लिख रहे है। बता रहे है कि किस किस सेक्टर में एससी आरक्षण खत्म हो रहा है। जिससे कल को यह गर्व रहे कि जब यह सभी हो रहा था तब हम "विरोध कर रहे थे" व "समाज को सचेत कर रहे थे"। हम अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी कर रहे थे।
क्या आप अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी कर रहे है?
दगड़ू भाई :..................
विकास कुमार जाटव
@Mayawati
@AnandAkash_BSP
नीट का exam फिर से हो गया। एडमिशन भी हो जाएगा। लेकिन अनुसुचित जाति के संगठनों से एक प्रश्न है कि उन्होंने इस बात पर कितना ध्यान दिया कि;
"बहन कुमारी मायावती जी ने स्पेशल कम्पोनेंट प्लान अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से जो चार मेडिकल कॉलेज सहरानपुर, जालौन, अम्बेडकरनगर, कन्नौज में बनाये थे, उनमे ए��मिशन बहनजी द्वारा दी गयी व्यवस्था से होंगे या फिर आर्टिकल 30 में विशेष आरक्षण प्राप्त साबरा अहमद व उनके यादव वकील द्वारा हाईकोर्ट से रद्द करवाए अनुसार होगा?"
1.इन चारों मेडकिल कॉलेज में 340 के लगभग शीट है।
2.बहनजी ने मुस्लिम के आर्टिकल 30 में मेडिकल, इंजीनियरिंग या किसी भी प्रकार के अल्पसंख्यक संस्थान में अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित 50% शीट की तर्ज पर इन चारों संस्थान में 70% सीट एससी व 20 शीट एसटी के ल���ए लिए आरक्षित करी थी। जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया ओर राज्य सरकार ने स्वीकार करके 70% से सीधा 21% पर ला दिया। जब हम लोगो ने विरोध किया तब इस साल की छूट देकर सुप्रीम कोर्ट जाने की जानकारी दी।।
3.बहनजी के अनुसार एडमिशन पर =
एससी = 248 शीट
एसटी = 20 शीट
ओबीसी = 44 शीट
सामान्य = 20 शीट
4.साबरा अहमद व यादव वकील की पिटीशन पर निर्णय के बाद स्तिथी यह है कि;
एससी = 340 का 21% = 68 शीट
अथार्त नुकसान है;
248-68 = 180 शीट का है।
5.आप समझ सकते है कि मेडिकल की एक एक शीट कितनी कीमती होती है।।अनुसुचित जाति के 180 डॉक्टर कम बनेंगे।
इंहा ध्यान देने वाली बात है कि यह मेडिकल कॉलेज अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से बने थे। जिसमे एससी से अलग ओबीसी, एसटी, सामान्य तक को शीट दी गयी। इसलिए इसके लिए राज्य सरकार से कोई विशेष फंड नही allot हुआ जिससे साबरा अहमद या अन्य को दिक्कत होती।
6.अब बहनजी ने सत्ता में रहते एससी के लिए कार्य कर दिया। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी एससी समाज व उनके संगठनों की है। एससी के अधिकतर सन्गठन ऐसे मामलों पर गायब मिलते है। इंहा तक कि;
"चन्द्रशेखर से लेकर चिराग पासवान व अन्य अम्बेडकर के नाम पर सभा/महासभा वाले दलित नेता तक इसपर कोई बयान देते नही दिखते"
7.अब नीट में एडमिशन होने वाला है। इन 4 संस्थान में किस प्रकार एडमिशन होंगे यह पूछने वाला कोई नही है?
मजेदार बात यह है कि;
"अधिकतर अपने घर मौज मस्ती करते हुए मुझे कहते है कि आप क्यो नही रिट दाखिल करते। जबकिं यह मामला मेने ही वायरल किया, जि���के कारण राज्य सरकार को डबल बैंच से आदेश पर रोक लगवाकर 1 साल की छूट दिलवाई गयी व असीम अरुण ने बताया कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रहे है। नही तो मामला ही सामने नही आ पाता। अब;
"घर बेचकर इसी काम मे लगा दूँ क्या। मतलब मेने इतना बड़ा नुकसान बताया तो यह मेरी ही जिम्मेदारी है कि इसे में ही देखूं"
अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गए या नही। अगर गए तो निर्णय तक किस प्रकार एडमिशन होंगे, इसकी किसी को जानकारी नही है"
विकास कुमार जाटव
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जान गँवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं है। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके दुख की कोई भरपाई नहीं लेकिन इतना ज़रूर है कि वे इस घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं जानता हूँ कि कोई भी हादसा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी हम पहले भी सुन चुके होते हैं और यही सबसे तकलीफ़देह बात है। उपहार सिनेमा से लेकर आज तक, दिल्ली ने आग से होने वाली मौतों का यह सिलसिला बार-बार झेला है। हर बार वही सवाल उठते हैं, और हर बार जवाब अधूरे रह जाते हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी किसी एक पार्टी पर नहीं डाली जा सकती। दिल्ली में बारी-बारी से कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सरकार चलाई है, नगर निगम भी इनके पास रहा है और फिर भी फायर सेफ्टी के बुनियादी नियम लागू कर���ा किसी की प्राथमिकता नहीं बन सका। बिना मंज़ूरी के रेस्टोरेंट चलते रहे, अनाधिकृत निर्माण होते रहे, और जिनकी ज़िम्मेदारी निगरानी की थी, वे कहीं और देखते रहे। यह सिर्फ़ प्रशासन की चूक नहीं है यह उस भरोसे की चूक है जो हर नागरिक अपनी सरकार से करता है।
दिल्ली के लोग सिर्फ़ फ़रियाद नहीं कर रहे वे यह माँग रहे हैं कि अगली बार किसी और परिवार को इस त्रासदी को ना झेलना पड़े। यह माँग बहुत बड़ी नहीं है। यह ���ही बुनियादी माँग है जिसका हर लोकतंत्र अपने नागरिकों से वादा करता है।
हम मिलकर इसे बदल सकते हैं,पार्टी से ऊपर उठकर, चुनाव से ऊपर उठकर। यही उन परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी जिन्होंने आज अपनों को खोया है।
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में आज हुआ भीषण अग्निकाण्ड अति-दुर्भाग्यपूर्ण तथा इसमें काफी लोगों की हुई मौत तथा कई लोगों के घायल होने की भी घटना अत्यन्त ही दुखद। सभी पीड़ित परिवार वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।
ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम पर केन्द्र ��� दिल्ली सरकार को ज़रूर विशेष ध्यान देना चाहिये ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो सके।
अल्लाह आपको और आपके परिवार को सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य अता फरमाए। आपकी हर जायज़ दुआ कबूल हो।
आपको और आपके पूरे परिवार को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की बहुत-बहुत मुबारकबाद! 🌜✨⭐🌙
कल से जबसे बहन जी ने अपने कार्यकर्ताओं को ये बताया है कि हम 2027 में हर हाल में सरकार बनाएंगे, मानो तबसे सपा वालों के गांव में आग सी लग गई है। जिस दिन बीएसपी सरकार बना लेगी, इनको हार्ट अटैक न आ जाए।
@myogiadityanath@myogioffice कृपया क��के दिल्ली यूनिवर्सिटी की होनहार छात्रा को आत्महत्या करने की अनुमति दे !
एक मनचला एक छात्रा पर लगातार दो बार हमला कर चुका, एक बार कॉलेज परिसर में थप्पड़ मारे और हाली में छात्रा परीक्षा देने गई नोएडा गई, तब परीक्षा केंद्र से पीछा करते हुए लड़की के कपड़े खींचना फोटो वीडियो बनाना गंदी गंदी गालियां देते हुए खुद अपने फोन से वीडियो बनाई और मेट्रो स्टेशन क�� अंदर छात्रा को जबरन खींचने का प्रयास किया गया, जिसकी CCTV फोटोज मेट्रो में उपलब्ध है,
छात्रा के शोर मचाने पर वो भागा उसके बाद नोएडा सेक्टर 59 थाने की नाकाबिल लापरवाह पुलिस को सूचित किया गया !!
पुलिस ने आरोपी को पकड़ा और छात्रा पर दबाव बना कर पहले सुलाह करने मामला दबाने की कोशिश करी गई जब छात्रा ने किसी भी प्रकार समझौता ना कर कार्यवाही करने को कहा तब लचर पचर तहरीर खुद पुलिस ने छात्रा से लिखवाई,
उ��के बाद छात्रा को घर भेज दिया अगले दिन बिना सूचित किए FIR खुदी दर्ज करी और FIR की कॉपी SI गौरव पवार ने हाथ में थमा दी, जिसमें मामूली धाराओं में मामला लिखा, ना तो उसमें जातिसूचक शब्द जोड़े गए,
फिर FIR का सिलसिला यहीं नहीं रुका लगातार छात्रा को मेडिकल के बहाने प्रताड़ित किया छात्रा का हॉस्टल 50 KM दूर थाने से है,
कोई भी पुलिसकर्मी बिना सोचे समझे छात्रा को बोल देता कल अजाना इसी प्रकार पूरे हफ्ते भर दौड़ धूप करने के बाद ,
बिना छात्रा सूचित किए जिसकी जान को खतरा है, आरोपी को टेंपो बिठा के थाने से छोड़ दिया जाता है,
एक छात्रा को FIR no 0079 12/3/2026 दर्ज करवाने में लगे 10 दिन और आरोपी शिवम यादव को थाने से छुटने में लगे मात्र एक घंटा चुकी आरोपी का बाप हिस्ट्रीशीटर है, अनेक बार लड़का धमकी देता हुआ बोल चुका,
थाने से छात्रा को इतनी पड़ताड़ना कम लगी और आज आरोपी को छ��त्रा का नंबर मिला गया जबकि थाने के अलावा छात्रा ने किसी को नंबर नहीं दिया,
अब @DCP_Noida बताए वो लड़का छात्रा को दुबारा लगातार वीडियो कॉल कर रहा है, थाने में IO शिवानी नंबर ब्लॉक करने की नायाब सालह छात्रा को दे रही है , किंतु बताने में असमर्थ है, थाने से पीड़ित छात्रा का नंबर आरोपी को कैसे दिया गया !
अब छात्रा के साथ कुछ भी अप्रिय हुआ या छात्रा ने खुदकुशी करी तो पुलिस प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा ?
चु��ी एक सीरियल ऑफ़ेंडर न��एडा पुलिस के करकमलों से सड़को पर घूम रहा है, चुकी उसका बाप राकेश यादव एक हिस्ट्रीशीटर है,
@PMOIndia उत्तर प्रदेश में दलित छात्रा होना पाप है और पुलिस केवल आरोपी मुस्लिम होने पर ही अपने हाथों की चूड़ियां और पैरों की मेंहदी उतारती है !
निजी सलाह पुलिस स्टेशन का नाम बदल कर दलाली सेंटर किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा !!
पुलिस पर रत्तीभर भरोसा नहीं योगी जी और मोदी जी बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के अपने दिए न���रे पर कितने खरे है उसकी भी कलाई खुल रही है !!
कृपया छात्रा डर के जीना नहीं चाहती तो कृपया उसके हिसाब से खुदकुशी करने की अनुमति दे अनुकम्पा करे !!
@NCWIndia
@SamarRaj_@physics__wallah@PhysicswallahAP कोई माफ़ी नहीं दी जाए इसे और इसके खिलाफ़ SC/ST एक्ट में पूर्णरूप से कार्यवाही हो और सज़ा मिले।
इन्होंने ये धंधा बना लिया है पहले कहने का और फिर माफ़ी मांग कर नाटक करने का।
क्या ये "चमार" को रंगरूप और दिखावे से पहचान लेते है या इन्हें ये ही सिखाया जाता है घरों में इनके!
बामसेफ,डीएस-4,बीवीएफ तथा बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक व जन्मदाता ���हुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब के जन्मदिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन्।🌹
मै अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल,
लोग जुड़ते गए कारवाँ बनता गया।💐
जय भीम जय बसपा
💥🇪🇺🐘🇪🇺💥
@Mayawati
@bspindia
@BSP_Pariwar
@AnandAkash_BSP
नई दिल्ली में आयोजित ’एआई इम्पैक्ट समिट’, जिसमें देश व विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे तथा यह इवेन्ट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खि़यों में था, इस दौर��न जिन भी लोगों द्वारा अर्द्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया है जिसमें अधिकतर कांग्रेसी युवा बताये जा रहे हैं, वह अति-अशोभनीय व निन्दनीय है।
अगर यह सम्मेलन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का नहीं होता तो अलग बात थी, किन्तु समिट के दौरान ऐसा आचरण करना यह चिन्ता की बात है अर्थात अपने देश की गरिमा व इमेज को ना बिगाड़ा जाये तो यह उचित होगा।
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिन्ता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
भारतीय संसद व राज्यों के विधानमण्डल यहाँ देश की संवैधानिक व लोकतां��्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाये रखने का एक सशक्त माध्यम है। संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है।
इसके अलावा, ’सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत।
वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की ख़बरें आती रहती हैं, जिसपर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख़्ती से ज़रूर रोकना चाहिये।