ये है धर्म सिंह सैनी जो पूर्व मंत्री और भाजपा नेता हैं इन्होंने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया के माध्यम से बहन मायावती जी की तारीफ़ करते कहा कि “बहनजी ने मुझे एमएलए बनाया मंत्री बनाया और फिर एमएलए बनाया इसलिए बहनजी को जीवन में कभी भूल ही नहीं सकता हूँ उनका जीते जी आदर और सम्मान करूँगा”
आज भले ही बसपा अपने कठिन समय से गुजर रही हो लेकिन आज भाजपा और सपा की जो शान बने बैठे नेता हैं वो बहनजी की देन के बाद ही नेता बने हैं, बसपा की नर्सरी से निकले हुए नेता है।
If an average Indian had peacocks at home, he would go to prison under the wildlife acts. In India the whole purpose of being in power is to be above the law.
"तिरंगा छोड़िये, भगवा झंडा भी हाथों में लेकर अगर किसी RSS वाले ने अंग्रेजों का विरोध किया हो, कहा हो - अंग्रेज़ों भारत छोड़ो, तो मुझे बताइए। भगत सिंह, अशफ़ाक़ उल्ला, रामप्रसाद बिस्मिल जैसों के पक्ष में कुछ बोला हो तो बताइए। ये तो शहीदों को बेवकूफ़ बताते हैं। इनके गली कोई कुत्ता, बिल्ली, बकरी भी शहीद हुई हो तो बताइए।" - @shamsulislam903
@moliticsindia
In a notable turn in the ongoing criminal defamation trial against Congress leader Rahul Gandhi for allegedly defaming right-wing ideologue Vinayak Savarkar, his grandnephew Satyaki told a Special MP/MLA Court in Pune that his maternal grandfather Gopal Godse and Nathuram Godse, who shot Mahatma Gandhi in 1948, were 'active' members of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS).
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#RahulGandhi #Savarkar #Godse
पकड़ा गया मोहन भागवत का झूठ
1933 का कांग्रेस अधिवेशन जलगांव में नहीं, कलकत्ता में हुआ था।
तिरंगा पहली बार 1933 में नहीं, 1929 में फहराया गया। पंडित नेहरू ने रावी के तट पर पहली बार तिरंगा फहराया था।
RSS ने अपने कार्यालय पर 52 साल तिरंगा नहीं फहराया क्योंकि जब तिरंगा राष्ट्रीय झंडे के रूप में अपनाया गया तब RSS ने इसे अशुभ बताया था।
“35 किलो चावल के लिए महीने में 4 दिन पैदल चलते हैं और रात जहां हो जाती है, वहां चावल पकाते हैं, खाते हैं।”
कौन गाँव के हो?
लड़का - गुंडेकोट
“गुंडेकोट! मैं आपको बता दूँ इधर आप सर्च करेंगे तो गूगल पर भी नहीं मिलेगा। हो सकता है सरकारी कागजों में आपको गुंडेकोट में बहुत सारी व्यवस्थाएं मिलें लेकिन मैं जमीन से आ रहा हूँ वहाँ कुछ भी नहीं है।”
असली भारत TV और सोशल मीडिया की रंगीन दुनिया से बहुत दूर आज भी अपने वजूद और एक वक्त के खाने की जंग लड़ रहा है।
स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट की झटपट लेनदेन, नगरों और महानगरों की चकाचौंध, एक्सप्रेसवे और डिजिटल क्रांति के बड़े-बड़े दावों के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई यही है कि यहाँ ज़िंदगी आज भी बुनियादी हक़ों के लिए मीलों पैदल नापती है।
सोशल मीडिया के ट्रेंड्स और गूगल के नक्शों पर जो गाँव कभी दिखाई भी नहीं देते! लोग सिर्फ 35 किलो चावल के लिए 4-4 दिन का पथरीला सफर तय करते हैं।
नेताओं की ऐसी बेशर्मी कि कागज़ों योजनाएं चमचमा रही हैं लेकिन ज़मीन पर उतरते-उतरते वे सिर्फ खोखले वादे बनकर रह जाती हैं।
देश में तरक्की का बाजा बजता है पर इस असली भारत तक न आज तक राशन की सीधी पहुँच बनी है, न सड़क और न ही कोई बुनियादी सुविधा।
जहाँ रात ढल गई, वहीं चूल्हा जलाकर चावल पका लिया और रात काट ली। यही इनकी दिनचर्या है और इसी को नियति मान लिया।
बात एकमात्र विधायक की नहीं है, उस भाई की है जो बुरे से बुरे दौर में साथ खड़ा रहा।
अटल से लेकर अचल तक, राखी बंधवाकर बहनजी बोलकर, मौके पर धोखा दे दिए।
उमाशंकर साथ निभाते रहे, अंतिम सांस तक। सारी सरकारी मशीनरी उनके खिलाफ छोड़ दी गई फिर भी डिगे नहीं, जवाब देते रहे।
जिस दौर में 80 में 64 विधायक भाजपा चले जाते हैं उस दौर में अकेले चट्टान की तरह खड़े रहे।
हजारों करोड़ की संपत्ति और व्यापार है, उसके बावजूद धमकियों से नहीं डरे।
उमाशंकर सिंह अलग तो थे, श्रद्धांजलि💐। दुनिया में ऐसे ही आपसी भरोसा बना रहे, बचा रहे।
जो व्यक्ति फर्जी डिग्री दिखा सकता है
वो व्यक्ति फर्जी GDP कैसे नहीं दिखता होगा
जो व्यक्ति अपनी शादी छुपा सकता है
वो व्यक्ति देशवासियों से कितना छुपाता होगा
जो व्यक्ति बचपन की झूठी कहानी सुना सकता है
वो व्यक्ति देश को कितने झूठे सपने दिखाता होगा
जो व्यक्ति खुद को भिक्षु बढ़कर विदेश घूमता था
वो व्यक्ति आपको भिक्षु बनने में तनिक भी सोचेगा
आपके जवाब का इंतजार रहेगा 🙏
A recent NITI Aayog report said some 94,000 government schools were closed over the past decade, an average of 25 a day, contributing to a 2.26 crore decline in government school enrolment. The government schools’ share of total enrolment has fallen from 71% in 2005 to 49.24% in 2024-25.
✍️ G. Ramakrishnan
https://t.co/nIXSoWuJkN
सरकार ने संसद में कहा…
इथेनॉल ना मिलाते तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर होता…
ये कौनसा गणित है सरकार का….
UPA की महा भ्रष्ट सरकार… 100 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से कच्चा तेल ख़रीदती थी…
और 70 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल बेचती थी…
और भाजपा की हरीशचंद्र सरकार… 80 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से कच्चा तेल ख़रीद कर…
110 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल बेच रही है…
और इस में भी अपनी पीठ थपथपा रही है, अगर हम इथेनॉल ना मिलाते तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर होता…
वैसे हाथी पालना महँगा तो होता ही है…!!