@nitinmeshram_@yadavakhilesh अखिलेश अंकल इतना ब्लंडर करने के बाद भी कृष्ण मंदिर बनवा रहे हैं मतलब उनको रत्ती भर भी पछतावा नहीं है नहीं तो माफ़ी मांग लिए होते
चुनाव में बसपा चौका सकती है!
यूपी में बसपा धीरे-धीरे मजबूत नजर आ रही है। बसपा को पिछले विधान सभा मे 12.88 प्रतिशत मत मिला था।
हालांकि लोकसभा चुनाव में यह घट कर 10 प्रतिशत के लगभग रह गया था।
लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव को देखे तो बसपा को 23 प्रतिशत के लगभग मत मिला था।
मायावती और आकाश आंनद की सक्रियता के बाद बसपा अब पुराने लय में आती हुई दिखाई पड़ रही है।
मायावती सवर्णो में भी लोकप्रिय होती जा रही है।ब्राह्मण समाज को पहले से ही रिझाने में जुटी है।
उमाशंकर सिंह के निधन के बाद मायावती ने जिस तरह से परिवार के साथ खड़ी नजर आयी। क्षत्रिय समाज मे भी उनके प्रति एक अच्छा संदेश गया है!
विधनासभा चुनाव 2027 में बीजेपी और सपा से नाराज मतदाता अगर बसपा में गये तो बसपा सपा और बीजेपी को चौका सकती है।
आज जो सपा समर्थक बसपा का मजाक उड़ा रहे है हो सकता है।कल को बसपा की वजह से पुराना बवासीर का दर्द उभर जाये😊
पांडिचेरी में एक कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह जी को कोई भगवा झंडा दे रहा था,
उन्होंने मना कर दिया और तिरंगा झण्डा फहराया, साथ ही मंच पर जितने लोग थे सबको भगवा उतारने के लिए कहा,
आखिर डर किस बात का है?
योगी सरकार ने सिर्फ 8 साल में लगभग 7 हजार करोड़ लुटाकर अपनी कमियां छुपाई हैं।
ये मोदी के विज्ञापन बजट 6 हजार करोड़ से भी ज्यादा है।
काम से ज्यादा प्रचार हो रहा है।
आज @AnandAkash_BSP ने सवाल किया,
आगे और विपक्षी नेता पूछें मगर जवाब?
नहीं मिलने वाला है।
आज दिनांक 10-08-2026 को जनपद हाथरस विधानसभा सादाबाद में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में आदरणीय बहनजी का संदेश लेकर पहुंचे बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक माननीय श्री आकाश आनंद जी का संबोधन।
"इस बार वोट हाथी को
अपने पुराने साथी को"
#बहनजी_का_संदेश
#युवाओ_की_आस_आकाश
#जयभीम #मिशन_2027
#हाथरस #lucknow #BSP
@ScienceJourney2 भीख में नहीं मिली थी जमींदारी
ये लोग अपनी बहन बेटियों के बदले लिए।
ये निकम्मी क़ौम मुगलों से लड़ने के बजाय अपनी बहन बेटियों के रिश्ते कर आए
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ने यूपी में अपनी सरकार के दौरान पुलिस व पंचायती राज विभाग में लगभग सवादो लाख नये सरकारी पद सृजित करके तथा नौकरियों की भर्ती पर लगी रोक को भी हटाकर सर्वसमाज के कई लाख लोगों की सरकारी नौकरियों में बहाली की और फिर उसके बाद सरकार में ना रहने पर काफी लम्बे समय से देश में व ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब अदि राज्यों में व्याप्त ज़बरदस्त महंगाई, अति-ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पिछड़ापन एवं उनके मजबूरी के पलायन, महिला असुरक्षा, पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि से त्रस्त लोगों के दुखी जीवन जैसे ज्वलन्त मुद्दों एवं गंभीर समस्याओं के निदान हेतु प्रभावी कदम उठाने की माँग केन्द्र व राज्य सरकारों से बार-बार करती रही है, लेकिन सभी सरकारें, पूर्व की कांग्रेसी सरकारों की तरह ही, ज़्यादातर मामलों में उदासीन व लापरवाह ही बनी हुई हैं, जो देश के बिगड़ते हुये राजनीतिक, आर्थिक, संसदीय व सामाजिक हालात के मद्देनज़र अति-दुखद एवं अत्यन्त चिन्तनीय।
2. और अब जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नाम से विशेषकर बेरोज़गारी व अंधकार भविष्य आदि से पीड़ित व आहत शिक्षित युवा-युवतियों ने ख़ासकर दिल्ली में जंतर मंतर के 36 दिन तक चले अपने बहु-चर्चित आन्दोलन के ज़रिये इन ज्वलन्त मुद्दों को वास्तव में राष्ट्रीय महत्व का विशेष व गंभीर चर्चा का मुद्दा बना दिया है और जिसको लेकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी गवानी पड़ी है, केन्द्र व राज्य सरकारों को देश के क़रीब सवासौ करोड़ ग़रीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों तथा ख़ासकर बेरोज़गारी की मार से पीड़ित लाखों परिवारों की वास्तविक चिन्ता, सब कुछ भुलाकर, तत्काल शुरू कर देनी चाहिये।
3. ऐसे में, अन्य बातों के अलावा, सरकारी नौकरियों पर खा़स ध्यान देने की ज़रूरत है और इस क्रम में राष्ट्रीय सम्पत्तियों को निजी हाथों में बेचना बंद करके तथा सभी सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों पर पेपरलीक व भ्रष्टाचार-मुक्त समयबद्ध भर्तियाँ तत्काल प्रारम्भ करके समस्या के फौरन निदान के प्रति गंभीर प्रयास शुरू कर दें तो यह उचित होगा।
4. इस प्रकार एक परिवार में अगर एक को भी सरकारी नौकरी मिल गयी तो लाखों परिवारों का सीधे तौर पर भला होगा और साथ ही इससे एससी, एसटी व ओबीसी समाज को भी वह सुरक्षा मिल पायेगी जो आरक्षण के काफी हद तक निष्प्रभावी व निष्क्रिय बना दिये जाने के कारण, संविधान प्रदत्त आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी जीने के बजाय, ग़रीबी व लाचारी का त्रस्त जीवन जीने को ही मजबूर हैं।
5. कुल मिलाकर, सभी सरकारों को हर हाल में मुनाफाखोरी/लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच/प्रवृति को त्याग कर संविधान की सही मानवतावादी व कल्याणकारी नीति एवं सिद्धान्त को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अमल करके आगे बढ़ाना होगा, जो ’हर हाथ को काम’ देने वाली व्यापक देश व जनहित में लाख दुखों की एक दवा है, यही सभी सरकारों से अपील।
6. इसके साथ ही, जंतर मंतर में आन्दोलित छात्र-छात्राओं व बेरोजगार युवाओं आदि के मुद्दों को लेकर संसद के वर्तमान सत्र में अब तक लगातार जारी गतिरोध को भी समाप्त किया जाना ज़रूरी है, ताकि बिना समुचित बहस/चर्चा के सरकारी विधेयकों को पारित होकर कानून बनने की प्रक्रिया पर विराम लग सके।
@Mayawati दलित कभी भी ख़ुद पर भरोसा नहीं करते
धर्म भी दूसरा का ढोएंगे
वोट भी दूसरी पार्टी को देंगे
इनके अत्याचार पर कोई फ़िल्म बना तो हीरो भी दूसरी जाति का ही रहता है
1.जैसाकि विदित है कि दिनांक 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुग़लकाबाद में संतगुरु श्री रविदास जी के पवित्र गुरुघर को बुलडोज़र और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया था। इसके विरोध में देशभर की संगत जब लोकतांत्रिक ढंग से सड़कों पर उतरी तो तब उन्हें लाठीचार्ज, आँसूगैस, गिरफ्तारियाँ और मुकदमों आदि का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
2.इतना ही नहीं गुरुघर की भूमि भी छीन ली गई और आज भी संगत को लोहे के अस्थायी टीन शेड में अपने गुरुजी को माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है और आज भी समाज की स्मृति में अंकित है।
3.अब पंजाब चुनाव नज़दीक आते ही वही भाजपा संतगुरु श्री रविदास जी के नाम पर कलश यात्रा निकालकर गुरुजी के बेगमपुर शहर के लक्ष्य से समाज को भटाकने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पंजाब के धलेता गाँव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने पर जब संगत और बसपा ने आवाज़ उठाई तो गिरफ्तारियाँ की गईं। अन्त में फिर आम आदमी पार्टी की सरकार को झुकना पड़ा और गुरुघर का पुननिर्माण कराना पड़ा।
4.ऐसे में समाज भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहें। पराधीनता का अन्त एवं बेगमपुरा का संकल्प संतगुरु श्री रविदास जी सम्मान यात्रा जो तुग़लकाबाद से धलेता गाँव तक पहुँच रही है, जिसमें समूह संगत सादर आमंत्रित हैं। और संतगुरु श्री रविदास जी बेगमपुरा के आदर्श, सम्मान, समानता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाए तथा गुरुघरों की गरिमा, धार्मिक अधिकारों और संतगुरु श्री रविदास जी के सपनों के अनुरूप पराधीनता मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प को मज़बूत बनायें।