निकले जो कल क़रीब से उन के मकाँ के हम
शाइ'र शुमार हो गए उर्दू ज़बाँ के हम
डरते रहे जो ज़िक्र से दर्द-ओ-निहाँ के हम
क़िस्से सुना गए उन्हें सारे जहाँ के हम
जन्नत में हाथों-हाथ लिए जाएँगे हमीं
हैं बादशाह आप यहाँ के वहाँ के हम
दिव्या सबा 😭
ए दोस्त क्या कहूँ मैं तुझे ऐसे सीन पर
ख़ुद नाचने लगे हो अगर ख़ुद की बीन पर
इक दिन जो मैंने दांत न तोड़े तो ये हुआ
कुछ साँप शेर कहने लगे आस्तीन पर
अभिसार गीता शुक्ल
हुकूमती नामों के आगे झुक जाये वो सर कैसा
जो हाथों में पहन ले चूड़ी तो फिर वो है नर कैसा
युद्ध श्रेत्र में उतरे हो तो मार दो या फिर मर जाओ
जब एक दिन मरना ही है फिर मर जाने का डर कैसा
ओम शर्मा 'ओम'
ये ज़बरदस्ती का रिश्ता तो नहीं रखना किसी से
जिस को जाना है अगर वो फिर चला जाए ख़ुशी से
दोस्तों पर था किया मैं ने भरोसा सब सेे ज़्यादा
और अब मेरा भरोसा उठ रहा है दोस्ती से
दक़ीक़ जबाली