मेरा भारत महान 🙆🤔
पूरा विडियो देखो समझ जाओगे....!!!!
🗣️ देश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने निकले CJP का विरोध यह लोग क्यों कर रहे हैं आपको समझाते हैं
क्योंकि अगर सभी शिक्षित हो जाएंगे तो इन गुंडों का सहयोग कौन करेगा स्वतंत्र भारद्वाज जैसे देश भक्त लोग इनकी दम पर ही तो REELS में अपने आपको इतना बड़ा देश भक्त बताते हैं
वह हिंदू मुस्लिम, गो हिन्दुरक्षक बने फिरते हैं जिनमें से उन्होंने एक भी काम नहीं किया शिवाए पैसा कमाने के, रील बनाना एक ही काम है
अराजकता फैलाना, लोगो को आपस में लड़वाना,
देश की कानून व्यवस्था लाचार है ऐसी व्यवस्था में दिल्ली पुलिस प्रशासन द्वारा बीजेपी के लोगों द्वारा पूरा सहयोग समर्थन मिल रहा है
कैसे देश में शिक्षा व्यवस्था सुधार होगा,
मुझे नहीं लगता है हम ऐसे लोगों का समर्थन करने वालों के होते हुए, कुछ शिक्षा व्यवस्था में सुधार कर सकते हैं
देश में कोई सच्चाई के लिए लड़ता है उसको पुलिस प्रशासन घंटों में उठा ले जाता है ऐसा है हमारा कानून
4PM की पत्रकार शाहीन ख़ान अरावली पब्लिक स्कूल, मेवात में मेरी जूनियर रही है। मेरा उनके घर से परिवारिक संबंध है। शाहीन की बड़ी बहन शबाना ख़ान, नीलू ख़ान, छोटी बहन नफ़ीसा, भाई आर्यन मेव ख़ान, अब्बू फ़िरोज़ ख़ान और उनकी अम्मी मेरे परिवारिक सदस्य की तरह है।
मैं एक बात बहुत स्पष्ट रूप से लिख रहा हूँ। वह सभी बहनें बहुत स्ट्रॉंग इच्छाशक्ति वाली लड़कियाँ है। उनके अब्बू फिरोज़ ख़ान ने उनलोगों की परवरिश बहुत मजबूती से किया है। वह सभी बहनें मर सकती है लेकिन अन्याय के सामने झुक नहीं सकती है। दिल्ली पुलिस उन्हें केवल लड़की समझने की भूल नहीं करे। वह लड़ेगी और अंतिम साँसों तक लड़ेगी।
शाहीन और नफीसा तुम्हारी बहादुरी को सलाम पेश है। तुम्हारे साथ हुए इस बर्बरता और अन्याय के विरुद्ध लड़े जाने वाली इस लड़ाई में हम क़दम से क़दम और कंधा से कंधा मिलाकर खड़े है।
एक FIR लिखवाने के लिए थाने में पुलिस से बहस करती महिला पत्रकार। कल जिस तरह से दिल्ली में पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान को दिल्ली पुलिस द्वारा पीटा गया था उसके बाद साकेत पुलिस स्टेशन में कई घंटे संघर्ष के बाद भी नहीं लिखा गया FIR!
4 PM की पत्रकार शाहीन को धार्मिक आधार पर पीटे जाने के BBC लंदन की पत्रकार रही हुदा जरीवाला ने दिल्ली पुलिस को दिखाया आइना ,
हुदा जरीवाला का दिल्ली पुलिस से किये गए ये सवाल आने वाले इतिहास में स्वर्ण पन्नों में लिखें जायेंगे ,
सलाम है ऐसे पत्रकारो पर ,
🚨#ALERT!
Two Muslim women journalists, Nafeesa & Shaheen, assaulted by Delhi Police. AISA comrades, along with Comrade @neha_aisa, reach Saket PS in solidarity.
POLICE REFUSES TO EVEN RECEIVE THE COMPLAINT!
We will not leave until justice is ensured.
साली तुम्हे प्यासा मारूंगी..पानी दूंगी तुझे , तुझे तो डंडो से मारूंगी और फिर लात , जूते और डंडों से मारते गए... मारते गए.. मारते गए।
ये हाल है @DelhiPolice का...नाम पूछ कर अब ये मारते पीटते हैं!
इन नफरती लोगों ने क्या हाल बना दिया है देश का..बेहद अफसोस😭 #4PM
“CJP प्रदर्शन में एक पिता पर हमला किया, सिर फटा, 60 टाँके आए”
एक Podcast में हँसकर अपना जुर्म कबूल रहा ये अपराधी खुला कैसे घूम रहा है @DelhiPolice
और कह रहा है कपिल मिश्रा ने बचा लिया
https://t.co/ahq9CbghWE
वीडियो वायरल होने के बाद मुझे और मेरे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता है, लेकिन मैं डरूँगी नहीं में अन्याय जातिवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूँगी।
@DelhiPolice कोई कार्यवाही नहीं कर रही है, हमें विपक्ष के तमाम नेताओं से उम्मीद है कि वो मुझ दलित समाज की बेटी को न्याय दिलाएंगे 🙏
यह बेहद शर्मनाक और पत्रकारिता की आज़ादी पर हमला है। इस पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
क्या इस देश में अब एक मुसलमान को पत्रकारिता करने की भी इजाज़त नहीं है? क्या एक मुस्लिम महिला पत्रकार रिपोर्टिंग नहीं कर सकती, मुख्यमंत्री से सवाल नहीं पूछ सकती?
We stand with Shaheen Khan and @4pmnews_network
“Yes, my name is Khan. I have Khan in my name. I am Mohammed, I am a Muslim… and because of this, a Delhi Police officer beat me with sticks and slapped me…”
I wonder how the world will perceive this statement about the police in India's capital, Delhi!
ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये Gen-Z है।
जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी।
मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है।
भाजपा ने पूरे देश में सत्ताई निरंकुशता की हर सीमा को लाँघ दिया है। निरंकुश भाजपा सरकारों से अब सवाल पूछना उनकी आलोचना करना ही सबसे बड़ा अपराध है।
दिल्ली हो या बिहार, हर जगह कायर भाजपाई अब पुलिस से पत्रकारों को पिटवा रहे हैं, डरा रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में संवैधानिक संस्थाएं और पुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बन गई है।